Haryana Agriculture News: हरियाणा में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने धान की समय से पहले रोपाई रोकने के लिए कार्रवाई तेज कर दी है. गुरुवार दोपहर को करनाल जिले के सांगोहा और रांबा गांवों में करीब 12 एकड़ में तैयार की गई धान की नर्सरी को नष्ट किया गया. यह कार्रवाई पुलिस और ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में की गई. विभाग के अधिकारियों ने कहा कि किसानों को पहले ही नोटिस देकर नर्सरी खुद हटाने के लिए कहा गया था, लेकिन नियमों का पालन नहीं होने पर हरियाणा प्रिजर्वेशन ऑफ सबसॉइल वाटर एक्ट, 2009 के तहत सख्त कदम उठाया गया.
विभाग ने रांबा गांव के जोगा सिंह की 2 एकड़, करमबीर की 1 एकड़ और सांगोहा गांव के राजीव की 7 एकड़ व लवप्रीत की 2 एकड़ में तैयार धान की नर्सरी को नष्ट कर दिया. अधिकारियों के अनुसार इन किसानों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए तय समय से पहले धान की नर्सरी तैयार की थी. उप कृषि निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने ‘द ट्रिब्यून’ को कहा कि हरियाणा प्रिजर्वेशन ऑफ सबसॉइल वाटर एक्ट के तहत 15 मई से पहले धान की नर्सरी बोना और 15 जून से पहले रोपाई करना प्रतिबंधित है. नियम तोड़ने पर फसल नष्ट करने के साथ-साथ प्रति हेक्टेयर हर महीने 10 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है और कार्रवाई का खर्च भी किसान से वसूला जाता है.
भूजल स्तर को बचाने के लिए कार्रवाई की गई
उन्होंने कहा कि यह प्रतिबंध तेजी से गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए लगाया गया है. समय से पहले धान की रोपाई करने पर पानी की खपत लगभग तीन गुना बढ़ जाती है, क्योंकि गर्मियों में तेज गर्मी से पानी जल्दी सूखता है और किसानों को ज्यादा ट्यूबवेल सिंचाई करनी पड़ती है. करनाल के रांबा और सांगोहा गांव में नियमों के खिलाफ तैयार की गई धान की नर्सरी पर कृषि विभाग ने कार्रवाई की.
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इन फसलों की खेती करने पर मिलेगी प्रोत्साहन राशि
डॉ. वजीर सिंह ने कहा कि जो किसान ढैंचा और समर मूंग की खेती कर रहे हैं, उन्हें सरकार की ओर से प्रति एकड़ 1,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी. इसके लिए किसानों को ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है. उन्होंने कहा कि समय से पहले धान की खेती पर रोक और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने से भूजल का अत्यधिक दोहन कम होगा. साथ ही मिट्टी की उर्वरता बेहतर होगी और भविष्य में पानी व खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.
प्रभावित किसानों को आर्थिक नुकसान
वहीं, अधिकारियों ने कहा कि किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है कि वे तय समय से पहले धान की बुवाई न करें. प्रशासन का कहना है कि उनका मकसद किसानों को परेशान करना नहीं, बल्कि पानी जैसे प्राकृतिक संसाधनों को बचाना है. विभाग ने साफ किया है कि जो किसान नियम तोड़कर समय से पहले धान की खेती करेंगे, उनके खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद इलाके के किसानों में चिंता बढ़ गई है. एक तरफ सरकार इसे भूजल संरक्षण के लिए जरूरी कदम बता रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रभावित किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.