गन्ना किसानों के हित में बड़ा फैसला, इस विधि से बुवाई करने पर प्रति एकड़ फ्री में मिलेंगे 5 हजार

किसानों को टिश्यू कल्चर से तैयार पौधे मुफ्त में दिए जाएंगे. सरकार को उम्मीद है कि इससे गन्ने की उत्पादकता बढ़ेगी. ये पौधे करनाल कोऑपरेटिव शुगर मिल के जरिए उपलब्ध कराए जाएंगे और किसान इन्हें अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच प्राप्त कर सकेंगे.

वेंकटेश कुमार
नोएडा | Updated On: 9 May, 2026 | 01:18 PM

Sugarcane Cultivation: हरियाणा सरकार ने गन्ना किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने चौड़ी कतारों में गन्ने की रोपाई और सिंगल बड (एकल-आंख) तकनीक से खेती करने वाले किसानों के लिए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 3000 रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 5000 रुपये प्रति एकड़ कर दी है. इसके साथ ही किसानों की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए शुगरकेन हार्वेस्टर मशीन उपलब्ध कराने और टिश्यू कल्चर से तैयार बेहतर गुणवत्ता वाले पौधे देने की भी घोषणा की गई है. सरकार का कहना है कि इन कदमों से गन्ने की खेती अधिक लाभकारी और आधुनिक तकनीक आधारित बन सकेगी.

कहा जा रहा है कि हरियाणा सरकार ने गन्ना किसानों की आय बढ़ाने और उत्पादन लागत कम करने के लिए यह अहम फैसला लिया है. अब जो किसान 4 फीट की दूरी पर चौड़ी कतारों में गन्ने की बुवाई  करेंगे, उन्हें 5,000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी. पहले यह राशि 3,000 रुपये प्रति एकड़ थी. यह फैसला राज्य सरकार के ‘गन्ना प्रौद्योगिकी मिशन’ के तहत लिया गया है. खास बात यह है कि इसकी जानकारी हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने विभागीय बैठक के बाद दी.

कितनी दूरी पर करनी होगी गन्ना बुवाई

यह फैसला हरियाणा बजट 2026-27 में पहले ही घोषित किया गया था, जिसे अब मंजूरी मिल गई है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, 4 फीट की दूरी पर गन्ना लगाने से फसल को पर्याप्त हवा और धूप मिलती है, जिससे पौधों की बढ़वार बेहतर होती है और बीमारियों का खतरा कम हो जाता है. इसके अलावा, खेत में मशीनों का इस्तेमाल आसान होने से मजदूरी की लागत भी घट सकती है. साथ ही सरकार का कहना है कि इससे बीज की बचत होगी और उत्पादन में बढ़ोतरी होगी.

कटाई में तेजी आएगी और मजदूरी का खर्च कम होगा

वहीं, किसानों को टिश्यू कल्चर से तैयार पौधे मुफ्त में दिए जाएंगे. सरकार को उम्मीद है कि इससे गन्ने की उत्पादकता बढ़ेगी. ये पौधे करनाल कोऑपरेटिव शुगर मिल के जरिए उपलब्ध कराए जाएंगे और किसान इन्हें अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच प्राप्त कर सकेंगे. गन्ने की कटाई को आसान और सस्ता बनाने के लिए राज्य की हर सहकारी चीनी मिल अपने क्षेत्र के किसानों को शुगरकेन हार्वेस्टर मशीन भी उपलब्ध कराएगी. इससे कटाई तेज होगी और मजदूरी का खर्च कम होगा.

इस दिन से शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया

इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को सरकारी पोर्टल  पर आवेदन करना होगा. आवेदन की प्रक्रिया 15 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक चलेगी. इसके बाद सत्यापन किया जाएगा और फरवरी 2027 तक सहायता राशि जारी कर दी जाएगी. सरकार का लक्ष्य है कि किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीक अपनाएं, उत्पादन बढ़ाएं और लागत कम करें, ताकि उनकी आय में सुधार हो सके.

1.08 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती

हरियाणा में गन्ने की खेती मुख्य रूप से यमुनानगर, अंबाला, कुरुक्षेत्र और करनाल जिलों में होती है. साल 2022-23 में राज्य में करीब 1.08 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती की गई थी. हालांकि, राज्य सरकार गन्ने का रकबा बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. इसके लिए योजनाएं भी चलाई जा रही हैं.

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Published: 9 May, 2026 | 01:00 PM
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