ओडिशा में हाइब्रिड धान की फसल फेल, 600 किसानों को नुकसान.. बीज कंपनी पर मुआवजा नहीं देने का आरोप
ओडिशा में हाइब्रिड धान की फसल खराब होने के बाद किसानों को मुआवजा नहीं मिलने के आरोपों की सरकार ने जांच शुरू कर दी है. पांच जिलों के करीब 600 किसान कंपनी के बीज उत्पादन कार्यक्रम से जुड़े थे. किसानों का दावा है कि कंपनी ने 60 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे का वादा किया था, लेकिन भुगतान नहीं किया
ओडिशा के पांच जिलों में हाइब्रिड धान की फसल खराब होने से किसानों को हुए नुकसान के मामले में राज्य सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं. आरोप है कि सिकंदराबाद की एक बीज कंपनी ने किसानों से धान की खेती कराई, लेकिन फसल खराब होने के बाद उन्हें मुआवजा नहीं दिया. किसान प्रतिनिधियों के मुताबिक, कंपनी ने 2023-24 और 2024-25 के दौरान बौध, कटक, पुरी, जाजपुर और भद्रक जिलों के करीब 600 किसानों को हाइब्रिड धान बीज उत्पादन से जोड़ा था. इसके अलावा, 2023-24 में बौध जिले के करीब 60 किसानों ने भी कंपनी के लिए बीज उत्पादन किया था, लेकिन उनकी फसल खराब हो गई.
किसानों का आरोप है कि फसल खराब होने के बावजूद कंपनी की ओर से उन्हें मुआवजा नहीं दिया गया. इसी मामले को लेकर राज्य सरकार ने जांच शुरू करने का फैसला किया है. किसानों ने जब फसल खराब होने के बाद मुआवजे की मांग की तो कंपनी ने अगले सीजन में भुगतान का भरोसा दिया. जाजपुर के किसान संगठन से जुड़े प्रसन्न कुमार राउत ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि 11 सितंबर 2024 को सिकंदराबाद में कंपनी के अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों की बैठक हुई थी. कंपनी के भरोसे पर किसानों ने 2024-25 में दोबारा खेती शुरू की.
600 किसानों ने दोबारा की धान की खेती
राउत के मुताबिक, 2024-25 सीजन में कटक, पुरी, जाजपुर और भद्रक के करीब 600 किसानों को कंपनी ने बीज उपलब्ध कराया. किसानों से समझौते के कागजों पर हस्ताक्षर भी कराए गए, लेकिन बार-बार मांगने के बावजूद उन्हें हस्ताक्षर की हुई कॉपी नहीं दी गई. भद्रक के किसान प्रतिनिधि महेश्वर बेहरा ने आरोप लगाया कि दूसरी बार भी फसल खराब हो गई. उनका कहना है कि कंपनी ने किसानों को बीज देने से पहले पर्याप्त रिसर्च और परीक्षण नहीं किया था, जिसकी वजह से फसल को नुकसान हुआ.
फसल खराब होने के बाद मुआवजा नहीं मिला
भद्रक के किसान प्रतिनिधि महेश्वर बेहरा ने कहा कि फसल खराब होने में किसानों की कोई गलती नहीं थी. उनका आरोप है कि कंपनी ने किसानों से तैयार हुआ बीज लेने के बावजूद मुआवजे का भुगतान नहीं किया. जाजपुर के किसान प्रतिनिधि प्रसन्न कुमार राउत के मुताबिक, कंपनी ने किसानों को प्रति एकड़ 25,000 रुपये एडवांस दिए थे. वहीं, किसानों ने खेती पर करीब 48,000 रुपये प्रति एकड़ खर्च किए. इसमें जमीन और मजदूरी का खर्च शामिल नहीं है.
इसके बाद किसानों और किसान संगठनों ने मामले में हस्तक्षेप की मांग को लेकर राज्य सरकार से संपर्क किया. कृषि विभाग ने भद्रक, पुरी और कटक के मुख्य जिला कृषि अधिकारियों को रिमाइंडर भेजकर 2024-25 के रबी सीजन में फसल खराब होने और बीज उत्पादन कम रहने के कारण कंपनी की ओर से मुआवजा नहीं देने की शिकायतों पर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है.
शिकायतों पर सरकार ने मांगी रिपोर्ट
ओडिशा कृषि एवं खाद्य उत्पादन निदेशालय ने 13 जुलाई को अधिकारियों को किसानों की शिकायतों की जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया. कृषि एवं किसान सशक्तिकरण विभाग के मुताबिक, इस मामले में 24 फरवरी, 21 मई और 5 जून को भी अधिकारियों को पत्र भेजे गए थे, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला. किसानों का दावा है कि कंपनी ने कम उत्पादन या फसल खराब होने की स्थिति में 60,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने का वादा किया था. हालांकि, किसानों का आरोप है कि कंपनी ने उन्हें कोई मुआवजा नहीं दिया. सरकार ने कहा है कि जिलों से जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा.