Floriculture Business: अगर आप ऐसी खेती की तलाश में हैं जिसमें खर्च कम हो और कमाई ज्यादा, तो आइस फ्लावर आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है. यह फूल धूप में ऐसा चमकता है, जैसे जमीन पर छोटे-छोटे हीरे बिखरे हों. इसी खास चमक की वजह से इसे आइस प्लांट भी कहा जाता है. छत्तीसगढ़ के उद्यान विभाग के कृषि वैज्ञानिक एफ.आर कोसरिया ने बताया कि सर्दियों के मौसम में यह पौधा तेजी से बढ़ता है और खेत या बगीचे को रंग-बिरंगे कालीन जैसा लुक दे देता है. गुलाबी, पीला, बैंगनी, सफेद और नारंगी रंग के फूल इसे और आकर्षक बनाते हैं. बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों के लिए यह कमाई का नया जरिया बनता जा रहा है.
कम पानी, कम लागत में तैयार फसल
कृषि वैज्ञानिक एफ.आर कोसरिया ने बताया कि आइस फ्लावर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे ज्यादा पानी या भारी खाद की जरूरत नहीं होती. अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में यह आसानी से उग जाता है. जहां पानी की कमी होती है, वहां भी इसकी खेती सफल मानी जाती है. बीज से इसे तैयार करना आसान है. बीज बोने के करीब 60 से 70 दिनों के अंदर पौधे में फूल आने लगते हैं. एक पौधा सीजन में सैकड़ों फूल दे सकता है. अगर एक एकड़ में व्यवस्थित तरीके से खेती की जाए, तो हजारों पौधे लगाए जा सकते हैं और लाखों फूलों का उत्पादन संभव है. कम लागत और कम देखभाल के कारण यह खेती जोखिम कम और मुनाफा ज्यादा देने वाली मानी जा रही है.
शादी-विवाह और डेकोरेशन में भारी मांग
इसके साथ ही उनका कहना है कि आजकल शादी-विवाह, रिसॉर्ट, होटल और गार्डन डेकोरेशन में रंग-बिरंगे फूलों की मांग बढ़ी है. आइस फ्लावर इन सब जगहों पर खूब पसंद किया जाता है. लैंडस्केपिंग और नर्सरी में भी इसके पौधे अच्छे दाम पर बिकते हैं. नर्सरी वाले इसके छोटे पौधों को गमलों में तैयार कर बेचते हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय मिलती है. शहरी इलाकों में टेरेस गार्डन और होम गार्डनिंग का शौक रखने वाले लोग भी इसे पसंद कर रहे हैं. छोटे गमलों, हैंगिंग पॉट्स और बॉर्डर प्लांटिंग में यह बेहद खूबसूरत लगता है. इस बढ़ती मांग की वजह से किसानों के पास बाजार की कमी नहीं रहती और उन्हें अच्छा रिटर्न मिल सकता है.
देखभाल आसान, फायदा ज्यादा
आइस फ्लावर की देखभाल बहुत मुश्किल नहीं है. इसे खुली धूप की जरूरत होती है, इसलिए ऐसी जगह लगाना चाहिए जहां दिनभर रोशनी मिलती रहे. ज्यादा खाद डालने की जरूरत नहीं होती, हल्की जैविक खाद ही काफी है. कीट और रोग भी इस पर कम लगते हैं, जिससे दवाइयों पर खर्च कम आता है. संतुलित सिंचाई और सही समय पर बुवाई से यह पौधा पूरे सीजन में लगातार फूल देता रहता है. बदलते समय में किसान पारंपरिक फसलों के साथ फूलों की खेती भी अपना रहे हैं. आइस फ्लावर ऐसे ही विकल्पों में से एक है, जो कम निवेश में बेहतर कमाई का मौका देता है. सही योजना और बाजार से जुड़ाव के साथ यह खेती किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है.