Natural rubber production: भारत में प्राकृतिक रबर की खेती करने वाले किसानों के लिए इस बार अच्छी खबर सामने आई है. वित्त वर्ष 2025-26 में देश में प्राकृतिक रबर उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. बेहतर मौसम, किसानों की मेहनत और सरकारी योजनाओं के कारण इस साल रबर उत्पादन 3.4 प्रतिशत बढ़कर 9.05 लाख टन तक पहुंच गया. पिछले साल यह आंकड़ा 8.75 लाख टन था.
रबर की खेती मुख्य रूप से केरल और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में की जाती है. इस बार मौसम किसानों के पक्ष में रहा, जिससे उत्पादन बढ़ाने में काफी मदद मिली. अच्छी बारिश और अनुकूल तापमान की वजह से किसानों को ज्यादा दिनों तक रबर टैपिंग करने का मौका मिला. यही कारण है कि उत्पादन में अच्छी बढ़त देखने को मिली है.
किसानों को मिला अच्छे दाम का फायदा
बिजनेस लाइन के अनुसार, पिछले कुछ समय से घरेलू बाजार में रबर की कीमतों में मजबूती बनी हुई है. इससे किसानों का रबर खेती के प्रति भरोसा और बढ़ा है. मई 2026 में RSS-4 ग्रेड रबर की कीमत 262 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी. अच्छे दाम मिलने से किसानों ने रबर उत्पादन बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दिया. विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिलता है, तो वे खेती में ज्यादा निवेश करते हैं और उत्पादन बढ़ाने की कोशिश करते हैं. इस बार भी यही देखने को मिला.
सरकार और रबर बोर्ड की योजनाओं का असर
रबर उत्पादन बढ़ाने में रबर बोर्ड और सरकार की योजनाओं ने भी अहम भूमिका निभाई है. किसानों को नई तकनीक अपनाने के लिए लगातार जागरूक किया गया. रेन गार्डिंग, सेल्फ टैपिंग और वैज्ञानिक खेती जैसी तकनीकों को बढ़ावा दिया गया. इसके अलावा किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए गए, ताकि वे बेहतर तरीके से रबर की खेती कर सकें. पौधों को बीमारियों से बचाने और समय पर उपचार की जानकारी भी किसानों तक पहुंचाई गई.
केरल सरकार की रबर प्रोडक्शन इंसेंटिव स्कीम (RPIS) ने भी किसानों को राहत दी. इस योजना के तहत किसानों को न्यूनतम गारंटीड कीमत का भरोसा दिया गया, जिससे उन्होंने टैपिंग जारी रखी.
देश में रबर की मांग भी बढ़ी
भारत में प्राकृतिक रबर की मांग भी लगातार बढ़ रही है. वित्त वर्ष 2025-26 में देश में रबर की खपत 1.2 प्रतिशत बढ़कर 14.27 लाख टन पहुंच गई. पिछले साल यह 14.10 लाख टन थी. हालांकि ऑटो टायर सेक्टर में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई, लेकिन बाकी रबर उत्पाद बनाने वाले उद्योगों में अच्छी मांग बनी रही. यही वजह है कि कुल खपत में बढ़ोतरी देखने को मिली.
आयात में आई कमी
इस दौरान भारत में प्राकृतिक रबर के आयात में भी कमी दर्ज की गई है. रबर आयात 16.7 प्रतिशत घटकर 4.59 लाख टन रह गया, जबकि पिछले साल यह 5.51 लाख टन था. हालांकि कंपाउंडेड रबर का आयात बढ़ा है. इस साल इसका आयात 3.49 लाख टन तक पहुंच गया, जो पिछले साल 2.45 लाख टन था.
दुनिया में भारत की मजबूत पहचान
भारत फिलहाल दुनिया के प्रमुख प्राकृतिक रबर उत्पादक देशों में शामिल है और छठे स्थान पर बना हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौसम इसी तरह अनुकूल रहा और किसानों को अच्छे दाम मिलते रहे, तो आने वाले वर्षों में भारत का रबर उत्पादन और तेजी से बढ़ सकता है. रबर उत्पादन में यह बढ़ोतरी किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था और उद्योगों को भी मजबूती देगी. खासतौर पर ऑटोमोबाइल, टायर और रबर उत्पाद बनाने वाले उद्योगों को इसका बड़ा फायदा मिलेगा.