सर्दी-गर्मी से अरहर और चना फसलों पर कीटों का हमला, सरकार ने बताए उपज बचाव के तरीके और दवाइयां
Agriculture Advisory for Rabi Crops: कृषि विभाग ने किसानों को दलहन फसलों में कीटों के प्रकोप से बचाने के लिए अलर्ट किया है. रबी सीजन की प्रमुख दलहनी फसलों में अरहर, चना, सरसों में कीटों का प्रभाव देखा जा रहा है. किसानों को कृषि सलाह में बचाव के उपाय के साथ छिड़काव के लिए जरूरी दवाइयों के बारे में जानकारी दी गई है.
सुबह-शाम हो रही ठंड और दिन में गर्मी ने कीटों के प्रजनन को बढ़ा दिया है, जिसके चलते दलहन फसलों पर कीटों और रोगों का प्रकोप भी बढ़ गया है. अरहर फसल में अचानक फली चूसक कीटों के हमले ने किसानों की मुश्किल बढ़ा दी है. वहीं, चना की फसल में इल्ली और कटवर्म कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है. यह कीट फली को छेदकर अंदर घुस जाते हैं और दाने को खा जाते हैं. इससे फसल उत्पादन कम होता है और उपज की क्वालिटी भी बुरी तरह प्रभावित होती है. किसानों को इन कीटों से अपनी फसलें बचाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने सलाह जारी की है और दवाएं भी बताई हैं, जिनके इस्तेमाल से किसान इन कीटों से छुटकारा हासिल कर सकते हैं.
उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के प्रसार शिक्षा एवं प्रशिक्षण ब्यूरो ने किसानों को दलहन फसलों में कीटों के प्रकोप से बचाने के लिए अलर्ट किया है. रबी सीजन की प्रमुख दलहनी फसलों में अरहर, चना, सरसों में कीटों का प्रभाव देखा जा रहा है. बदलते मौसम के चलते सर्दी-गर्मी के दौरान कीटों का प्रजनन भी बढ़ जाता है. इन दिनों तेजी से दलहन फसलों में कीटों और बीमारियों को देखा जा रहा है.
अरहर फसल में फली चूसक कीट को मारने के लिए ये दवा डालें
कृषि विभाग के अनुसार अरहर खेत में फली माहू या फली चूसक कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है. किसान अपने खेत में पौधे की फलियों पर नजर रखें, अगर उनमें काले धब्बे या छेद दिखें तो समझ जाएं की फली चूसक कीट ने हमला करना शुरू कर दिया है. ऐसे में किसान दवा डायमेथोएट 30% ईसी एक लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें. इसके अलावा किसान इमिडाप्रोपेड 17.8 एसएल 200 मिली या एसिटामिप्रिड 20% डब्ल्यूपी 150 ग्राम पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें.
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उकठा और बांझपन रोग से बचाएं तूअर फसल
कृषि विभाग के अनुसार अरहर यानी तूअर में प्रमुख रोग फ्यूजेरियम विल्ट (उकठा), स्टेरिलिटी मोजैक (बांझपन रोग), फाइटोफ्थोरा ब्लाइट और लीफ स्पॉट भी देखे जा रहे हैं. उकठा रोग से पौधे सूखने लगते हैं, इसकी रोकथाम के लिए बीजोपचार और रोगरोधी किस्मों का चयन जरूरी है. स्टेरिलिटी मोजैक वायरस जनित रोग है, जिसमें पौधे हरे तो रहते हैं लेकिन फूल और फलियां नहीं बनतीं. इसे नियंत्रित करने के लिए रोगग्रस्त पौधों को तुरंत उखाड़कर नष्ट करें और कीट वाहक (माइट) नियंत्रण हेतु डाइमेथोएट जैसे कीटनाशक का छिड़काव करें. फाइटोफ्थोरा ब्लाइट बारिश होने की स्थिति में फैलता है. इससे बचाव के लिए खेत में जल निकासी सही रखें और जरूरत पड़ने पर मेटालेक्सिल मिश्रित दवा का छिड़काव करें.
चना फसल में लगने वाले रोग और उनके उपाय
कृषि विभाग के अनुसार चना फसल में कटुआ कीट यानी कटवर्म दिखे तो जगह-जगह बर्ड पर्चर लगाएं. इसके अलावा चना फसल में उकठा (विल्ट), असकोचाइटा ब्लाइट, ग्रे मोल्ड और जड़ सड़न जैसे रोग भी लग रहे हैं. उकठा रोग में पौधे अचानक मुरझा जाते हैं और जड़ अंदर से भूरे हो जाते हैं, यह फफूंद जनित रोग होता है और इसके नियंत्रण के लिए कार्बेन्डाजिम या ट्राइकोडर्मा से उपचारित करना जरूरी होता है. असकोचाइटा ब्लाइट में पत्तियों और तनों पर भूरे धब्बे बनते हैं, इसके लिए संतुलित खाद प्रबंधन और मैनकोजेब या कार्बेन्डाजिम का छिड़काव करें. ग्रे मोल्ड ठंड और नमी में तेजी से फैलता है, इसलिए खेत में जल निकास की अच्छी व्यवस्था रखें और घनी बुवाई से बचें.