कम बारिश से झारखंड में धान पर संकट, 11 जिले प्रभावित.. पाकुड़ में 54 फीसदी बारिश की कमी

झारखंड में कम और असमान बारिश से धान समेत खरीफ फसलों पर असर पड़ रहा है. राज्य के 24 में से 11 जिलों में बारिश की कमी दर्ज की गई है. पाकुड़ में सबसे ज्यादा 54 फीसदी कम बारिश हुई है. 1 जून से 28 अगस्त तक राज्य में 698 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 778.3 मिमी होनी चाहिए थी.

नोएडा | Updated On: 30 Aug, 2026 | 11:17 AM

झारखंड में इस बार कम और असमान बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. राज्य में धान समेत सभी खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा सामान्य से कम है. बारिश की कमी के कारण कई जिलों में धान की रोपाई भी धीमी रही और बुवाई में देरी हुई. किसानों के मुताबिक, धान की फसल को अच्छी पैदावार के लिए समय-समय पर पानी और धूप की जरूरत होती है. लेकिन बारिश का पैटर्न ठीक नहीं रहने से फसल पर असर पड़ रहा है. मौसम का अनुमान भी किसानों के लिए ज्यादा अनुकूल नहीं है.

बारिश की कमी और अल नीनो जैसी मौसमी परिस्थितियों के कारण झारखंड के कई जिलों में धान की खेती प्रभावित हुई है. इससे राज्य में सूखे जैसे हालात बनने की चिंता बढ़ गई है. रांची मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, झारखंड के 24 में से 11 जिलों में इस साल बारिश की कमी दर्ज की गई है. झारखंड में इस मॉनसून सीजन में अब तक सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश हुई है. राज्य के संथाल परगना डिवीजन में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है. यहां पाकुड़ में सामान्य से 54 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है.

अल नीनो और स्थानीय परिस्थितियों से बारिश प्रभावित

रांची मौसम विज्ञान केंद्र के डिप्टी डायरेक्टर अभिषेक आनंद के मुताबिक, बारिश का वितरण असमान रहने की वजह से यह कमी आई है. इसके पीछे अल नीनो और स्थानीय मौसम संबंधी परिस्थितियां भी जिम्मेदार हैं. अल नीनो के दौरान मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. मौसम विभाग के मुताबिक, 19 फीसदी तक बारिश की कमी या अधिकता को सामान्य माना जाता है. इसलिए झारखंड में कुल 10 फीसदी बारिश की कमी के बावजूद स्थिति सामान्य श्रेणी में है.

पश्चिमी सिंहभूम में 42 फीसदी ज्यादा बारिश

मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, झारखंड में 1 जून से 28 अगस्त तक 698 मिमी बारिश हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 778.3 मिमी होनी चाहिए थी. पाकुड़ के बाद देवघर में 48 फीसदी, कोडरमा में 40 फीसदी, गढ़वा और गिरिडीह में 37-37 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है. वहीं, गोड्डा में 31 फीसदी और हजारीबाग में 30 फीसदी कम बारिश  हुई है. मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य के 6 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है. इनमें पश्चिमी सिंहभूम सबसे आगे है, जहां शुक्रवार तक 42 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई। वहीं, 7 जिलों में बारिश सामान्य रही.

पानी की कमी से दाने नहीं भरेंगे

बारिश की कमी से धान की फसल को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है. खेतों में धान की रोपाई कर चुके किसानों को फसल खराब होने का डर है. पर्याप्त पानी नहीं मिलने से धान की बढ़वार रुक सकती है, दाने ठीक से नहीं भरते और ज्यादा पानी की कमी होने पर फसल पूरी तरह बर्बाद भी हो सकती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, धान की फसल को अच्छी बढ़वार के लिए खेत में पर्याप्त पानी की जरूरत होती है. लंबे समय तक बारिश नहीं होने से मिट्टी सूख जाती है और पौधों की जड़ों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पाती. इससे पौधों की बढ़वार रुक सकती है, पत्तियां सूखकर भूरी हो सकती हैं और ज्यादा पानी की कमी होने पर पौधे मर भी सकते हैं.

इन 8 जिलों में भारी बारिश का अनुमान

किसानों का कहना है कि धान में फूल आने के समय सूखा पड़ने से दाने खराब हो सकते हैं. पानी की कमी से कमजोर पौधों पर कीट और बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. ऐसे में अगर आने वाले दिनों में बारिश कम हुई तो किसानों को धान समेत खरीफ फसलों में नुकसान उठाना पड़ सकता है. वहीं, मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, दुमका, देवघर, जामताड़ा, गिरिडीह, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और धनबाद में आने वाले दिनों में भारी बारिश होने की संभावना है.

Published: 30 Aug, 2026 | 11:16 AM

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