धान की रोपाई के बाद भूलकर भी न करें ये गलती! शुरुआती 7 दिन बचाएंगे पूरी फसल

धान की रोपाई के बाद शुरुआती 3 से 7 दिन फसल के लिए सबसे अहम होते हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इसी दौरान खरपतवार नियंत्रण करने से पौधों को पोषक तत्व, पानी और जगह बेहतर मिलती है, जिससे कल्ले, गुणवत्ता और उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 21 Aug, 2026 | 09:22 PM

Basmati Paddy: धान की रोपाई पूरी होने के बाद किसानों के लिए सबसे अहम चुनौती खरपतवार नियंत्रण की होती है. बारिश और खेत में बनी नमी के कारण अनचाही घास तेजी से उगती है, जो धान के पौधों से पानी, पोषक तत्व और जगह के लिए प्रतिस्पर्धा करती है. कृषि विशेषज्ञ प्रोद कुमार के अनुसार, रोपाई के शुरुआती 3 से 7 दिन खरपतवार प्रबंधन के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं. यदि इस अवधि में सही कदम उठाए जाएं तो फसल की बढ़वार, कल्ले बनने की क्षमता और उत्पादन बेहतर रखा जा सकता है.

रोपाई के शुरुआती 7 दिन क्यों हैं सबसे अहम?

कृषि विशेषज्ञ प्रोद कुमार बताते हैं कि धान की रोपाई  के बाद खेत की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है. शुरुआती दिनों में उगने वाले खरपतवार तेजी से फैलते हैं और यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो ये फसल की उपज पर सीधा असर डाल सकते हैं. इसलिए किसान रोपाई के 2 से 3 दिन के भीतर खेत की स्थिति का आकलन करें और आवश्यकता के अनुसार प्री-इमर्जेंस खरपतवार नाशक का उपयोग करें. यह खरपतवार के बीजों को अंकुरित होने से पहले नियंत्रित करने में मदद करता है.

दवा का असर तभी होगा, जब पानी रहेगा सही

विशेषज्ञों के अनुसार, खरपतवार नाशक के प्रभावी परिणाम के लिए खेत में लगभग 2 से 3 इंच पानी का स्तर बनाए रखना उपयोगी होता है. दवा डालने के बाद कुछ दिनों तक पर्याप्त नमी बनी रहनी चाहिए. यदि खेत में पानी बहुत अधिक भर जाए या पूरी तरह सूख जाए, तो खरपतवार नाशक  का असर कम हो सकता है. इसलिए सिंचाई और जल निकासी दोनों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है.

कौन-सी दवा चुनें? मात्रा और समय का रखें ध्यान

बासमती धान  में खरपतवार नियंत्रण के लिए प्रेटीलाक्लोर, बूटाक्लोर और पायराजोसल्फ्यूरॉन जैसे प्री-इमर्जेंस खरपतवार नाशकों का उपयोग किया जाता है. हालांकि दवा का चुनाव खेत में मौजूद खरपतवार, धान की किस्म और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है. कृषि विशेषज्ञ प्रोद कुमार सलाह देते हैं कि किसान किसी भी दवा का प्रयोग करने से पहले उसके लेबल पर लिखी मात्रा और उपयोग विधि अवश्य पढ़ें या कृषि विभाग की सलाह लें. दवा को निर्धारित मात्रा में पानी में घोलकर पूरे खेत में समान रूप से फैलाना चाहिए. अधिक मात्रा धान के पौधों को नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि कम मात्रा खरपतवार को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर पाएगी.

20 से 25 दिन बाद करें दोबारा निरीक्षण

रोपाई के लगभग 20 से 25 दिन बाद खेत का दोबारा निरीक्षण करना चाहिए. यदि इस दौरान खरपतवार दिखाई दें तो हाथ से निराई-गुड़ाई  की जा सकती है. जरूरत पड़ने पर पोस्ट-इमर्जेंस खरपतवार नाशक का उपयोग भी किया जा सकता है, लेकिन इसका निर्णय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर ही लेना चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर खरपतवार नियंत्रण करने से धान के पौधों को पानी, पोषक तत्व, हवा और सूर्य के प्रकाश का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिलता है. इससे कल्ले अधिक निकलते हैं, पौधों की बढ़वार मजबूत होती है और फसल की गुणवत्ता के साथ उत्पादन में भी सुधार की संभावना बढ़ जाती है.

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Published: 21 Aug, 2026 | 09:22 PM