केंचुआ खाद बेचकर सालाना 1.5 करोड़ कमा रहे ह्रदेश और अभिषेक, देशभर में ऑर्डर सप्लाई

Vermicompost Business: आईटी सेक्टर की जॉब छोड़ने वाले हृदेश राय और अभिषेक के साथ जबलपुर, नागपुर और नीमच क्षेत्र के किसान जुड़े हैं. दोनों युवा किसानों से तैयार वर्मी कंपोस्ट खरीदते हैं और गुणवत्ता जांच के बाद उसे बाजार में सप्लाई करते हैं. आज वह करोड़ों का केंचुआ खाद कारोबार कर रहे हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 21 Aug, 2026 | 08:05 PM

साल 2020 में जब दुनिया कोविड से जूझ रही थी, तब मध्य प्रदेश के जबलपुर के दो युवाओं ने अपनी आईटी जॉब छोड़कर खेती की ओर रुख करने का फैसला किया. हृदेश राय अपने बिजनेस पार्टनर अभिषेक विश्वकर्मा के साथ वर्मी कंपोस्ट खाद का प्रोडक्शन करते हैं उसे देशभर में बेचते हैं. कोविड के दौरान करीब 12 लाख रुपए सालाना के आईटी पैकेज वाली नौकरी छोड़कर 2020 में वर्मी कंपोस्ट का कारोबार शुरू किया. उन्होंने अभिषेक विश्वकर्मा को अपने साथ जोड़ा और 2022 में केंचुआ आर्गेनिक प्राइवेट लिमिटेड नाम से फर्म रजिस्टर्ड करवाई.

मध्य प्रदेश के जबलपुर जनसंपर्क विभाग के अनुसार हृदेश राय ने बताया कि वह कोविड से पहले वे आईटी सेक्टर में नौकरी करते थे, जबकि उनके बिजनेस पार्टनर अभिषेक विश्वकर्मा दिल्ली में सैमसंग कंपनी में कार्यरत थे. हृदेश की इनकम जॉब के अलावा अन्य इन्वेस्टमेंट से करीब 12 लाख हो जाती थी और अभिषेक का 25 लाख का पैकेज था. कोविड के दौरान जब अधिकांश लोग घरों में रहने को मजबूर थे, तब उन्होंने किसानों को लगातार खेतों में काम करते देखा. यहीं से दोनों के मन में कृषि से जुड़कर काम करने का विचार आया.

यूट्यूब से सीखा वर्मी कंपोस्ट खाद बनाना, नेटवर्क बनाया

वर्मी कंपोस्टिंग का काम करने वाले एक परिचित से दोनों को इसकी शुरुआती जानकारी मिली. इसके बाद स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाई और यूट्यूब वीडियो देखकर वर्मी कंपोस्ट तैयार करने की प्रक्रिया सीखी. शुरुआत में छोटे स्तर पर खुद खाद तैयार की. कुछ समय बाद उन्हें महसूस हुआ कि वे जितनी खाद बना रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा बाजार में इसकी मांग है. इसके बाद उन्होंने उन किसानों से वर्मी कंपोस्ट खरीदना शुरू किया, जिनका तैयार माल बाजार में नहीं बिक पा रहा था. धीरे-धीरे किसानों का नेटवर्क बढ़ता गया और कारोबार ने आकार लेना शुरू कर दिया.

किसानों से खाद बनवाकर खुद बिक्री कर रहे

हृदेश राय और अभिषेक के साथ कई जिलों के बड़ी संख्या में किसान जुडे हैं. इनमें जबलपुर के अलावा नागपुर और नीमच क्षेत्र के किसान भी शामिल हैं. दोनों युवा किसानों से तैयार वर्मी कंपोस्ट खरीदते हैं और गुणवत्ता जांच के बाद उसे बाजार में सप्लाई करते हैं. किसानों का सालभर में तैयार होने वाला माल भी उनकी कंपनी खरीद लेती है. सभी किसानों का उत्पादन मिलाकर सालाना 6 हजार टन से अधिक वर्मी कंपोस्ट का कारोबार होता है. मौसम और कच्चे माल की उपलब्धता के अनुसार उत्पादन में उतार-चढ़ाव होता रहता है.

खाद बनाने के लिए एसेनिया फेटिडा प्रजाति के केंचुओं का इस्तेमाल

हृदेश बताते हैं कि कारोबार की शुरुआत में उन्होंने अपना प्लांट लगाया था, लेकिन बाद में खुद उत्पादन करने के बजाय किसानों के साथ काम करने का मॉडल अपनाया. अब वे किसानों से वर्मी कंपोस्ट खरीदकर उसकी गुणवत्ता जांचते हैं और इसके बाद ग्राहकों को सप्लाई करते हैं. खाद की गुणवत्ता जांच के लिए कंपनी का अपना क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम है. निर्धारित गुणवत्ता और सामग्री के मानकों पर खरा उतरने के बाद ही खाद बाजार में भेजी जाती है. वर्मी कंपोस्ट तैयार करने में एसेनिया फेटिडा प्रजाति के केंचुओं का उपयोग किया जाता है. हृदेश के अनुसार भारतीय जलवायु में यह प्रजाति वर्मी कंपोस्टिंग के लिए बेहतर और अनुकूल है.

90 फीसदी ऑर्डर फोन पर और राजस्थान, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में सप्लाई

हृदेश राय बताते हैं कि उनकी केंचुआ खाद की मांग केवल जबलपुर या मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं है. राजस्थान, महाराष्ट्र, दक्षिण भारत और जम्मू-कश्मीर सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में वर्मी कंपोस्ट की सप्लाई की जा रही है. विभिन्न कंपनियों और संस्थानों को भी खाद उपलब्ध कराई जा चुकी है. हृदेश का कार्यालय पहले आधारताल क्षेत्र में था, लेकिन कारोबार बढ़ने के साथ ऑर्डर लेने और सप्लाई का अधिकांश काम फोन से होने लगा. इसके बाद उन्होंने कार्यालय बंद कर दिया और अब घर से ही कारोबार का संचालन कर रहे हैं. उनके मुताबिक करीब 90 फीसदी ऑर्डर फोन पर ही मिल जाते हैं.

Kenchua Organic Private Limited owner hridayesh and abhishek

केंचुआ खाद प्लांट में ह्रदेश और अभिषेक.

केंचुआ खाद बेचकर सालाना कमाई 1.5 करोड़ रुपये

ह्रदेश ने बताया कि उनकी कंपनी केंचुआ आर्गेनिक प्राइवेट लिमिटेड (Kenchua Organic Private Limited) का सालाना टर्नओवर करीब 1.5 करोड़ रुपए है. इसमें से करीब 20-25 लाख रुपए का प्रॉफिट होता है, बाकी कच्चा माल बनवाने और प्रोडक्शन, मार्केटिंग और लॉजिस्टिक्स में खर्च होता है. कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए साल 2022 में हृदेश ने आईडीबीआई बैंक से 10 लाख रुपए का लोन लिया. यह ऋण भारत सरकार की क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE) योजना के तहत लिया गया था. इससे कारोबार को विस्तार देने में मदद मिली.

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Published: 21 Aug, 2026 | 07:55 PM

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