Kharif Season: देश में जुलाई की शुरुआत में सामान्य से 35 फीसदी अधिक बारिश होने से खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आई है. इसका सबसे ज्यादा फायदा धान की खेती को मिला है. 5 जुलाई तक धान की बुवाई का रकबा पिछले साल की तुलना में 13 फीसदी कम रहा, जबकि 25 जून तक यह कमी 25 फीसदी थी. यानी धान की बुवाई में अंतर काफी हद तक कम हो गया है. हालांकि, सभी खरीफ फसलों को मिलाकर कुल बुवाई का रकबा अभी भी पिछले साल से कम है. 5 जुलाई तक कुल 350.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई, जो इस सीजन के सामान्य रकबे 1,104.46 लाख हेक्टेयर का लगभग 32 फीसदी है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल इसी अवधि में 442.80 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी. इसके मुकाबले इस बार कुल बुवाई का क्षेत्रफल करीब 21 फीसदी कम है. हालांकि, 25 जून तक यह अंतर 23 फीसदी था, जिससे संकेत मिलता है कि मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ बुवाई की रफ्तार में सुधार आ रहा है. 1 जुलाई से मानसून के फिर सक्रिय होने के बाद देश में बारिश की स्थिति में सुधार हुआ है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, जून में बारिश की कमी 39 फीसदी थी, जो अब 1 से 6 जुलाई के दौरान घटकर 20 फीसदी रह गई है.
पिछले कुछ दिनों के दौरान अच्छी बारिश हुई
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम भारत में पिछले कुछ दिनों के दौरान अच्छी बारिश हुई है. इससे खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलेगी और अगले एक सप्ताह में बोए गए क्षेत्र में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई 5 जुलाई तक 60.24 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 69.30 लाख हेक्टेयर थी. दालों का रकबा 37.15 लाख हेक्टेयर रहा, जो एक साल पहले 47.49 लाख हेक्टेयर था.
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किस फसल की कितने हेक्टेयर में हुई बुवाई
| फसल | 2025 (लाख हेक्टेयर) | 2026 (लाख हेक्टेयर) | बदलाव (%) |
|---|---|---|---|
| धान | 69.30 | 60.24 | -13.1 |
| कुल दालें | 47.49 | 37.15 | -21.8 |
| अरहर (तूर) | 21.00 | 12.35 | -41.2 |
| उड़द | 4.63 | 3.01 | -35.0 |
| मूंग | 17.20 | 16.81 | -2.3 |
| श्री अन्न व मोटे अनाज | 71.86 | 60.12 | -16.3 |
| ज्वार | 4.89 | 4.53 | 7.4 |
| तिलहन | 109.27 | 66.31 | 39.3 |
| मूंगफली | 28.00 | 16.93 | -39.5 |
| सोयाबीन | 79.20 | 47.80 | -39.6 |
| कपास | 82.00 | 63.18 | 23.0 |
| गन्ना | 56.72 | 57.58 | +1.5 |
स्रोत: कृषि मंत्रालय (5 जुलाई तक के आंकड़े)
वहीं, तिलहनों की बुवाई 66.31 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय यह 109.27 लाख हेक्टेयर थी. मोटे और पोषक अनाज (श्री अन्न) का रकबा भी 16 फीसदी घटकर 60.12 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले वर्ष 71.86 लाख हेक्टेयर था. हालांकि बारिश में सुधार के बाद किसानों ने बुवाई की गतिविधियां तेज कर दी हैं और आने वाले दिनों में खरीफ फसलों का रकबा तेजी से बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.
फसलों की बुवाई धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही है
देश में खरीफ फसलों की बुवाई धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही है, लेकिन कई प्रमुख फसलों का रकबा अभी भी पिछले साल के मुकाबले कम है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कपास की बुवाई 23 फीसदी घटकर 63.18 लाख हेक्टेयर रह गई है, जो पिछले साल इसी अवधि में 82 लाख हेक्टेयर थी. सोयाबीन का रकबा 79.20 लाख हेक्टेयर से घटकर 47.80 लाख हेक्टेयर और मूंगफली का क्षेत्र 28 लाख हेक्टेयर से घटकर 16.93 लाख हेक्टेयर रह गया है.
अरहर के रकबे में गिरावट
दालों में अरहर (तूर) की बुवाई 21 लाख हेक्टेयर से घटकर 12.35 लाख हेक्टेयर पहुंच गई है. वहीं, मूंग का रकबा 17.20 लाख हेक्टेयर से घटकर 16.81 लाख हेक्टेयर और उड़द का रकबा 4.63 लाख हेक्टेयर से घटकर 3.01 लाख हेक्टेयर रह गया है. मोटे अनाजों में ज्वार की बुवाई 4.89 लाख हेक्टेयर से घटकर 4.53 लाख हेक्टेयर हो गई है. बाजरा का रकबा 30 लाख हेक्टेयर से घटकर 20.82 लाख हेक्टेयर, रागी का 0.88 लाख हेक्टेयर से घटकर 0.84 लाख हेक्टेयर और मक्का का क्षेत्र 35 लाख हेक्टेयर से घटकर 32.94 लाख हेक्टेयर रह गया है.
गन्ने का रकबा बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर हो गया
हालांकि, गन्ने की खेती में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. गन्ने का रकबा बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 56.72 लाख हेक्टेयर था. वहीं जूट और मेस्ता की बुवाई भी बढ़कर 6.28 लाख हेक्टेयर हो गई है, जबकि एक साल पहले यह 6.16 लाख हेक्टेयर थी. सरकार ने खरीफ 2026 सीजन के लिए 1761.6 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है. इसमें 1231.5 लाख टन चावल, 84 लाख टन दालें, 310.4 लाख टन मक्का और 135.6 लाख टन मोटे अनाज शामिल हैं. तिलहन उत्पादन का लक्ष्य 289.2 लाख टन रखा गया है, जिसमें 148.5 लाथ टन सोयाबीन और 113.5 लाख टन मूंगफली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.