किसान के लिए कुबेर के खजाने से कम नहीं मेथी की फसल! कम खर्च में बार-बार कटाई और बिक्री.. खूब मुनाफा
सितंबर-अक्टूबर में मेथी की वैज्ञानिक खेती किसानों के लिए शानदार कमाई का मौका बन सकती है. केवल 25-45 दिनों में पहली कटाई, एक फसल से कई बार उत्पादन और बाजार में लगातार मांग के साथ ही अच्छी कीमत इसे सबसे लाभदायक पत्तेदार फसल बनाती है.
Methi Farming: कम संसाधन वाले ग्रामीण इलाकों में मेथी की फसल को किसानों के लिए कुबेर के खजाने से कम नहीं समझा जाता है. इसकी वजह एक बार बुवाई और बार-बार कटाई का मौका बनना. वहीं, इसकी खेती बेहद कम लागत में हो जाती है, जबकि सीजन पर बाजार में कीमत अच्छी मिलती है. सितंबर से अक्टूबर का समय मेथी की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. सही मिट्टी, संतुलित पोषण और समय पर कटाई अपनाकर किसान कम अवधि में कई बार हरी मेथी की कटाई कर बेहतर आमदनी हासिल करते हैं.
किसान अब ऐसी फसलों की ओर ध्यान दे रहे हैं, जो कम समय में तैयार हों और बाजार में लगातार मांग बनाए रखें. मेथी ऐसी ही एक लाभकारी पत्तेदार सब्जी है, जिसे हरी पत्तियों के साथ-साथ बीज उत्पादन के लिए भी उगाया जाता है. इसकी खासियत यह है कि पहली कटाई मात्र 25 से 45 दिनों में शुरू हो जाती है, जबकि एक ही फसल से कई बार कटाई लेकर अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाएं तो मेथी छोटे और बड़े दोनों किसानों के लिए फायदे का सौदा बन सकती है.
सितंबर–अक्टूबर है बुवाई का सबसे सही समय
डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, मेथी की सफल खेती के लिए सितंबर से अक्टूबर का महीना आदर्श होता है. इस समय तापमान और नमी का संतुलन बीज अंकुरण के लिए अनुकूल रहता है. किसान ऐसे खेत का चयन करें जहां वर्षा का पानी न ठहरे और जल निकासी की व्यवस्था अच्छी हो. भुरभुरी दोमट मिट्टी मेथी की जड़ों के बेहतर विकास और अधिक उत्पादन के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है.
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खेत की तैयारी और बीज की सही मात्रा
विशेषज्ञ बताते हैं कि खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए. अंतिम जुताई के समय अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों का विकास बेहतर होता है. प्रति एकड़ लगभग 8 से 12 किलोग्राम बीज पर्याप्त रहता है. बुवाई लाइन विधि से करें और कतार से कतार की दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर रखें, ताकि पौधों को पर्याप्त हवा और प्रकाश मिल सके.
25 दिन में पहली कटाई, एक फसल से कई बार कमाई
मेथी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी जल्दी तैयार होने वाली प्रकृति है. बुवाई के 25 से 45 दिन बाद पहली कटाई ली जा सकती है. यदि पौधों की सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और पोषण का सही प्रबंधन किया जाए तो एक ही खेत से दो से तीन बार तक हरी पत्तियों की कटाई संभव है. इससे किसानों को लगातार बाजार में ताजा मेथी बेचने का अवसर मिलता है.
बाजार में मजबूत मांग, बढ़ सकती है किसानों की आय
डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, हरी मेथी की मांग सब्जी मंडियों, होटल और घरेलू बाजार में पूरे सीजन बनी रहती है. समय पर बुवाई कर अच्छी गुणवत्ता की फसल तैयार करने वाले किसान बेहतर कीमत प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही, जो किसान बाद में बीज उत्पादन का विकल्प चुनते हैं, उन्हें अतिरिक्त आर्थिक लाभ भी मिल सकता है. वैज्ञानिक सलाह के साथ की गई मेथी की खेती कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली एक प्रभावी बागवानी फसल साबित हो सकती है.