काली मिर्च की खेती करने का बदला तरीका.. नई तकनीक से बढ़ेगा उत्पादन, किसानों की बंपर कमाई
काली मिर्च की खेती में अब नई तकनीक से बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. टिशू कल्चर और आधुनिक तरीकों से उत्पादन कई गुना बढ़ाया जा रहा है. इससे किसानों की आय में सुधार होगा और देश मसालों के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
Black Pepper Farming: मसालों की खुशबू से भरी भारतीय रसोई में काली मिर्च का खास स्थान है. लेकिन अब यह सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि किसानों की कमाई का बड़ा जरिया भी बनती जा रही है. पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए अब नई तकनीक ने काली मिर्च की खेती में बड़ा बदलाव ला दिया है. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, टिशू कल्चर और आधुनिक तरीकों से उत्पादन कई गुना तक बढ़ाया जा सकता है, जिससे किसानों को बड़ा फायदा मिलेगा.
पारंपरिक खेती में कम उत्पादन, अब बदल रही तस्वीर
भारत में काली मिर्च की खेती लंबे समय से पारंपरिक तरीके से की जाती रही है. खासकर दक्षिण भारत में किसान पेड़ों के सहारे इसकी बेल उगाते हैं. केरल की पारंपरिक वैरायटी सबसे ज्यादा प्रचलित है. लेकिन इस तरीके में उत्पादन सीमित रहता है. आमतौर पर एक हेक्टेयर में 500 से 700 किलो तक ही काली मिर्च मिल पाती है. यही वजह है कि कई बार देश को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए मसाले आयात भी करने पड़ते हैं. अब सरकार और वैज्ञानिक नई तकनीक अपनाने पर जोर दे रहे हैं, जिससे उत्पादन बढ़ाया जा सके.
नई तकनीक से तीन गुना तक बढ़ा उत्पादन
अब खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. महाराष्ट्र के एक फार्म में काली मिर्च की खेती पॉलीहाउस में पोल के सहारे की जा रही है. खास बात यह है कि इसमें वही पारंपरिक वैरायटी इस्तेमाल हो रही है, लेकिन इसे टिशू कल्चर तकनीक से तैयार किया गया है. इस नई तकनीक से उत्पादन बढ़कर 3 टन यानी करीब 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गया है. यानी पहले जहां 500-700 किलो उत्पादन होता था, वहीं अब कई गुना ज्यादा पैदावार मिल रही है. इससे किसानों की आमदनी भी तेजी से बढ़ सकती है और देश मसालों के मामले में आत्मनिर्भर बन सकता है.
आमतौर पर भारत में पारंपरिक काली मिर्च की खेती दक्षिण के राज्यों में पेड़ों के सहारे की जाती है, जहाँ इसका उत्पादन 500 से 700 किलो तक होता है।
जलगांव के जैन इरिगेशन फार्म में पोल के सहारे पॉलीहाउस में आधुनिक तकनीक से काली मिर्च की उसी वैरायटी की टिशू कल्चर आधारित खेती कर 3 टन… pic.twitter.com/WAF9AmYwRo
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) March 19, 2026
कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु हैं टॉप उत्पादक राज्य
भारत में काली मिर्च का सबसे ज्यादा उत्पादन दक्षिण भारत के राज्यों में होता है. कर्नाटक इस सूची में सबसे आगे है, जहां करीब 81,000 टन उत्पादन होता है. यहां के कोडागु, दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जैसे इलाके इसके लिए मशहूर हैं. दूसरे नंबर पर केरल आता है, जहां लगभग 70,000 टन उत्पादन होता है. इडुक्की, वायनाड और कोट्टायम जैसे क्षेत्रों की जलवायु इस फसल के लिए बहुत अनुकूल है. वहीं तमिलनाडु तीसरे स्थान पर है, जहां करीब 15,000 टन उत्पादन होता है और इसे नारियल व सुपारी के साथ उगाया जाता है.
सही तरीके से खेती कर किसान कमा सकते हैं लाखों
काली मिर्च की खेती के लिए गर्म और नमी वाली जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है. 20 से 30 डिग्री तापमान में यह फसल अच्छी होती है. इसकी बुवाई जून-जुलाई में करनी चाहिए और खेत की मिट्टी उपजाऊ व पानी निकालने वाली होनी चाहिए. अगर किसान सही देखभाल करें, समय पर सिंचाई और खाद दें, तो एक एकड़ में 3 से 6 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं. काली मिर्च की बढ़ती मांग को देखते हुए यह खेती आने वाले समय में और ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है. नई तकनीक के साथ यह खेती किसानों के लिए कमाई का मजबूत जरिया बनती जा रही है.