मॉनसून में खीरे की खेती बनेगी मुनाफे का सौदा, कम समय में किसान कमा सकते हैं ज्यादा पैसा

बरसात के मौसम में खीरे की खेती किसानों के लिए अच्छी कमाई का जरिया बन सकती है. सही समय पर बुआई और वैज्ञानिक तरीके अपनाने से करीब 40 दिन में फसल तैयार हो जाती है. बाजार में मांग बढ़ने पर किसानों को बेहतर भाव मिल सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार जल निकासी और सही किस्म का चयन जरूरी है.

नोएडा | Updated On: 30 Jul, 2026 | 07:28 PM

Cucumber Farming: बरसात के मौसम में किसान अगर सही फसल का चुनाव करें तो कम समय में अच्छी आमदनी हासिल कर सकते हैं. इस समय बरसाती खीरे की खेती किसानों के लिए मुनाफे का बेहतर विकल्प बन सकती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, मानसून के दौरान खीरे की मांग बढ़ जाती है और सही तकनीक से खेती करने पर किसान कम समय में अच्छी पैदावार ले सकते हैं. बरसाती खीरे की खेती के लिए अभी बुआई का सही समय है. करीब 40 दिन बाद फसल तैयार होकर कमाई शुरू हो सकती है. बाजार में मांग अच्छी रहने पर किसानों को खीरे का बेहतर भाव भी मिल सकता है.

15 दिन में तैयार होते हैं पौधे, 40 दिन बाद मिलने लगते हैं फल

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, बरसाती खीरे की बुआई  करने के बाद करीब 15 दिन में पौधे तैयार हो जाते हैं. इसके बाद खेत में उचित नमी बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. जरूरत के अनुसार सिंचाई करते रहें, ताकि पौधों की बढ़वार अच्छी हो सके. उन्होंने बताया कि सावन और भादो के मौसम में खीरे की मांग बढ़ जाती है. इस दौरान बाजार में अच्छी कीमत मिलने की संभावना रहती है. अगर किसान समय पर खेती शुरू करते हैं तो उन्हें सीजन में बेहतर लाभ मिल सकता है.

80 रुपये किलो तक मिल सकता है भाव

बरसाती खीरे की खेती किसानों के लिए इसलिए फायदेमंद मानी जा रही है क्योंकि बारिश के मौसम  में बाजार में इसकी मांग अच्छी रहती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, अच्छी गुणवत्ता वाले खीरे को किसान करीब 80 रुपये प्रति किलो तक बेच सकते हैं. खासकर त्योहारों के आसपास खीरे की मांग बढ़ जाती है, जिससे किसानों को अच्छे दाम मिलने की संभावना रहती है. सही समय पर फसल तैयार करके किसान बाजार की मांग का फायदा उठा सकते हैं और कम लागत में बेहतर कमाई कर सकते हैं.

इन उन्नत किस्मों से मिलेगा बेहतर उत्पादन

कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, बरसाती मौसम में किसानों को ऐसी किस्मों का चुनाव  करना चाहिए, जो रोगों से बचाव कर सकें और अच्छी पैदावार दें. पूसा उदय, पूसा बरखा और पंत शंकर जैसी उन्नत किस्में खीरे की खेती के लिए बेहतर मानी जाती हैं. इन किस्मों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है और बुआई के करीब 40 दिन बाद फल आना शुरू हो जाते हैं. इससे किसानों को जल्दी उत्पादन मिलने लगता है और बाजार में समय पर फसल बेचकर अच्छा फायदा उठाया जा सकता है.

मेड़ बनाकर करें खेती, जल निकासी का रखें विशेष ध्यान

बरसात के मौसम में खीरे की खेती करते समय खेत में जल निकासी की व्यवस्था  सबसे जरूरी होती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, किसानों को खीरे की खेती हमेशा ऊंची मेड़ बनाकर करनी चाहिए. अगर खेत में पानी जमा हो जाता है तो पौधों की जड़ें खराब हो सकती हैं और फसल को नुकसान पहुंच सकता है. मेड़ बनाने से अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल जाता है और पौधे स्वस्थ रहते हैं. सही किस्म का चयन, समय पर बुआई, बेहतर जल प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान बरसाती खीरे की खेती से अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं. यह फसल कम समय में तैयार होकर किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद कर सकती है.

Published: 30 Jul, 2026 | 11:30 PM

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