Monsoon Update: करीब दो सप्ताह की सुस्ती के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है. अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में मौसमीय गतिविधियां तेज होने लगी हैं, जिससे देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश की उम्मीद बढ़ गई है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की यह सक्रियता न केवल गर्मी से राहत देगी, बल्कि खरीफ फसलों की बुवाई को भी नई गति प्रदान करेगी.
पश्चिमी तट पर फिर छाए घने बादल
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, सोमवार को सामने आए उपग्रह चित्रों में महाराष्ट्र के रत्नागिरी, गोवा, तटीय कर्नाटक और केरल तक घने मानसूनी बादलों का बड़ा क्षेत्र दिखाई दिया. इससे पश्चिमी तट पर बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है. मुंबई में फिलहाल बादलों की मात्रा अपेक्षाकृत कम है, लेकिन अगले कुछ दिनों में यहां भी अच्छी बारिश होने के संकेत मिल रहे हैं. केरल के त्रिशूर से तिरुवनंतपुरम तक फैले वर्षा वाले बादल मानसून के शुरुआती दिनों जैसी स्थिति पैदा कर रहे हैं, जिससे दक्षिण भारत में भी बारिश का दायरा बढ़ने की उम्मीद है.
बंगाल की खाड़ी में बन सकती है नई मौसम प्रणाली
पूर्वी भारत में कोलकाता से विशाखापट्टनम तक बंगाल की खाड़ी के तटीय इलाकों में ऊंचे वर्षा और गरज वाले बादल विकसित हो रहे हैं. मौसम विभाग के अनुसार, यहां इस सीजन का पहला चक्रवाती परिसंचरण या कम दबाव का क्षेत्र बनने के संकेत हैं. यदि ये प्रणाली मजबूत होती है, तो पूर्वी, मध्य और पश्चिमी भारत में बारिश की मात्रा में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रणाली मानसून को नई ऊर्जा देने का काम करेगी.
बारिश की कमी वाले क्षेत्रों को मिलेगी राहत
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस वर्ष देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है. ऐसे में मानसून की नई सक्रियता पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, विदर्भ, पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश, कोंकण, मुंबई और दक्षिण गुजरात के लिए राहत लेकर आ सकती है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार छत्तीसगढ़, विदर्भ और पश्चिम मध्य प्रदेश में अगले सात दिनों तक रुक-रुक कर बारिश हो सकती है, जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश में अगले पांच दिनों तक वर्षा के अच्छे आसार हैं. कई क्षेत्रों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश देखने को मिल सकती है.
खरीफ खेती के लिए बेहद अहम दौर
मौसम विभाग ने कोंकण, गोवा, मुंबई, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, सौराष्ट्र और कच्छ में भी अच्छी बारिश की संभावना जताई है. वहीं केरल, तटीय कर्नाटक, तेलंगाना, लक्षद्वीप और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में भी अगले सप्ताह वर्षा गतिविधियां बढ़ सकती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि धान, सोयाबीन, कपास और दलहन जैसी खरीफ फसलों की बुवाई काफी हद तक बारिश पर निर्भर करती है. ऐसे में मानसून की यह वापसी किसानों के लिए राहतभरी खबर है. हालांकि पूरे सीजन की सफलता जुलाई और अगस्त में होने वाली बारिश पर निर्भर करेगी, क्योंकि मानसून का सबसे महत्वपूर्ण चरण इन्हीं दो महीनों में माना जाता है.