इस घास से सुधरेगी मिट्टी की सेहत और बढ़ेगी उर्वरता, चारे की समस्या भी होगी दूर.. विशेष अभियान शुरू

गोवा में ICAR-CCARI ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत सुपर नेपियर घास की खेती को बढ़ावा देने की पहल शुरू की है. अगले एक वर्ष में 200 एकड़ क्षेत्र में इसका विस्तार किया जाएगा. यह घास पशुओं के लिए पौष्टिक चारा उपलब्ध कराने, मिट्टी की सेहत सुधारने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और डेयरी किसानों की आय बढ़ाने में मददगार मानी जा रही है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 4 Jun, 2026 | 02:53 PM

Napier Grass: गोवा में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए सुपर नेपियर घास की खेती शुरू की गई है. इस पहल के तहत गोवा स्थित ICAR-CCARI ने विशेष अभियान शुरू किया है, जो देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ का हिस्सा है. अभियान की शुरुआत कुंडईम के तपोभूमि क्षेत्र में एक एकड़ जमीन पर हाइब्रिड सुपर नेपियर चारा घास लगाकर की गई है. इससे किसानों को बेहतर चारा उत्पादन के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.

खास बात यह है कि संस्थान का लक्ष्य अगले एक वर्ष में प्राकृतिक खेती के तहत गोवा के 200 एकड़ क्षेत्र में सुपर नेपियर घास की खेती का विस्तार करना है. अधिकारियों का कहना है कि यह घास पशुओं के लिए बेहतर चारे का स्रोत है और इससे पशुपालकों को भी लाभ मिलेगा. आईसीएआर-सीसीएआरआई, गोवा के निदेशक परवीन कुमार ने ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ से कहा कि यह पौधारोपण अभियान पूरी तरह प्राकृतिक खेती के तरीकों के अनुसार चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य मिट्टी की सेहत में सुधार करना और उसकी उर्वरता बढ़ाना है.

पूरे गोवा में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा

उन्होंने कहा कि इस परियोजना का मकसद केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि पूरे गोवा में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, देशी गायों के संरक्षण को मजबूत करना और भारत की प्राचीन ‘ऋषि-कृषि’ परंपरा को फिर से जीवित करना भी है. साथ ही, यह पहल क्षेत्र में टिकाऊ और लंबे समय तक लाभ देने वाली कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करेगी.

75 दिनों में तैयार हो जाती है फसल

सुपर नेपियर एक अधिक उत्पादन देने वाली बहुवर्षीय (पेरिनियल) हाइब्रिड चारा घास है. इसकी पहली कटाई करीब 75 दिनों में की जा सकती है, जबकि इसके बाद हर 40 से 45 दिनों के अंतराल पर कटाई संभव है. अच्छी देखभाल और प्रबंधन के साथ यह घास एक हेक्टेयर में सालाना 300 से 500 मीट्रिक टन तक हरा चारा दे सकती है. कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि बड़े पैमाने पर सुपर नेपियर की खेती अपनाने से पूरे साल पशुओं के लिए गुणवत्तापूर्ण चारे की उपलब्धता बढ़ेगी. इससे पशुपालकों को चारे की कमी की समस्या से राहत मिलेगी और पशुपालन व्यवसाय को भी मजबूती मिलेगी.

डेयरी किसानों के लिए फायदेमंद

यह पहल खास तौर पर डेयरी किसानों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है, क्योंकि इससे उन्हें पौष्टिक हरे चारे की नियमित आपूर्ति मिल सकेगी. ICAR-CCARI लंबे समय से टिकाऊ पोषक तत्व प्रबंधन, हरी खाद (ग्रीन मैन्योरिंग) और एकीकृत कृषि प्रणाली को बढ़ावा दे रहा है, ताकि मिट्टी की उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहे और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो. आईसीएआर-सीसीएआरआई के वरिष्ठ कृषि अर्थशास्त्री श्रीपाद भट्ट ने कहा कि देश के कई हिस्सों में खेती रासायनिक खादों और कीटनाशकों पर अत्यधिक निर्भर हो गई है, जबकि गोवा की पारंपरिक कृषि में रसायनों का उपयोग अपेक्षाकृत कम होता है. उन्होंने कहा कि यही वजह है कि गोवा में प्राकृतिक और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की बेहतर संभावनाएं हैं.

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Published: 4 Jun, 2026 | 02:48 PM

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