क्या प्याज के लिए होगा MSP का ऐलान ? NCP नेता ने सरकार से की मांग.. उठाया ये मुद्दा
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने प्याज संकट को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष दोनों की आलोचना की है. संघ के संस्थापक अध्यक्ष भरत डिघोले ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में लिए गए नीतिगत फैसलों ने प्याज के दाम गिराने में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि 2023 में केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए निर्यात प्रतिबंध, निर्यात शुल्क और न्यूनतम निर्यात मूल्य जैसी नीतियों का किसानों की आय और बाजार स्थिरता पर बड़ा असर पड़ा है.
Maharashtra News: महाराष्ट्र में प्याज की गिरती कीमतों को लेकर किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. NCP (SP) नेता जयंत पाटिल ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि राज्यभर के किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्याज की उत्पादन लागत करीब 2200 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि किसानों को बाजार में केवल 900 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल ही मिल रहे हैं. इस वजह से किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. जयंत पाटिल ने कहा कि यह स्थिति लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है. उनके अनुसार, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारणों की वजह से मांग और आपूर्ति दोनों प्रभावित हुए हैं, जिससे यह संकट और गहरा गया है. उन्होंने किसानों के लिए उचित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित करने की मांग की है.
प्याज के दाम गिरने की बड़ी वजह निर्यात में आई रुकावट
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, जयंत पाटिल ने कहा कि प्याज के दाम गिरने की बड़ी वजह निर्यात में आई रुकावट है, जो पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण प्रभावित हुई है. उन्होंने यह भी कहा कि बेमौसम बारिश से तैयार फसल को नुकसान हुआ है, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है. उन्होंने इसे किसानों के लिए ‘डबल झटका’ बताया, क्योंकि एक तरफ निर्यात के मौके कम हो गए हैं और दूसरी तरफ फसल का नुकसान हुआ है. जयंत पाटिल ने राज्य सरकार से मांग की कि तुरंत कदम उठाए जाएं, जैसे प्याज के निर्यात को फिर से बढ़ावा देना और किसानों के लिए उचित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित करना. उन्होंने कहा कि समय पर कार्रवाई जरूरी है, ताकि कीमतों को स्थिर किया जा सके और किसानों को राहत मिल सके.
केंद्र सरकार और विपक्ष दोनों की आलोचना
वहीं, महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने प्याज संकट को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष दोनों की आलोचना की है. संघ के संस्थापक अध्यक्ष भरत डिघोले ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में लिए गए नीतिगत फैसलों ने प्याज के दाम गिराने में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि 2023 में केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए निर्यात प्रतिबंध, निर्यात शुल्क और न्यूनतम निर्यात मूल्य जैसी नीतियों का किसानों की आय और बाजार स्थिरता पर बड़ा असर पड़ा है. भरत डिघोले ने विपक्षी नेताओं, खासकर महा विकास आघाड़ी के सांसदों की भी आलोचना की. उन्होंने कहा कि किसानों के समर्थन के बावजूद विपक्ष इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से नहीं उठा पाया है.
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प्याज के रेट में भारी गिरावट
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने कहा कि जयंत पाटिल जैसे नेताओं के बयान समस्या को समझाने के लिए तो हैं, लेकिन किसानों की मुश्किलें कम करने के लिए यह पर्याप्त नहीं हैं. संघ के अनुसार APMC मंडियों में प्याज के दाम काफी गिर गए हैं. खरीफ प्याज 300 से 700 रुपये प्रति क्विंटल और रबी प्याज 500 से 1100 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है, जबकि उत्पादन लागत 1800 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल तक है. इसके साथ ही प्याज के निर्यात में लगभग 30 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि खाड़ी देशों को होने वाला निर्यात 55 से 60 फीसदी तक कम हो गया है. संघ के अध्यक्ष भरत डिघोले ने महाराष्ट्र के सभी सांसदों और विधायकों से अपील की कि वे राजनीतिक मतभेद भुलाकर दिल्ली में मिलकर यह मुद्दा उठाएं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो किसान भविष्य में नेताओं को जिम्मेदार ठहराएंगे.