केमिकल खाद की अब जरूरत नहीं.. गाय के गोबर से बनाएं घन जीवामृत, खेतों में होगी बंपर पैदावार!
बढ़ते रसायनों ने मिट्टी की सेहत बिगाड़ दी है, लेकिन देसी गाय का गोबर इसका रामबाण इलाज है. घन जीवामृत जैसी जैविक खाद बनाकर किसान न केवल लागत कम कर सकते हैं, बल्कि अपनी जमीन को फिर से उपजाऊ बना सकते हैं. गुड़, बेसन और गौमूत्र के मेल से बनी यह खाद बंपर और शुद्ध पैदावार की गारंटी है.
Cow Dung Fertilizer : आज के दौर में बढ़ते रासायनिक खाद और कीटनाशकों ने हमारी धरती मां को बीमार कर दिया है. मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है और खेती की लागत आसमान छू रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके आंगन में बंधी एक देसी गाय आपकी 30 एकड़ खेती की किस्मत बदल सकती है? जी हां, कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि रसायनों के पीछे भागना छोड़िए और अपनी जड़ों की ओर लौटिए. देसी गाय के गोबर और गौमूत्र में वो ताकत है जो न केवल आपकी मिट्टी को फिर से जिंदा कर देगी, बल्कि आपकी पैदावार को भी कई गुना बढ़ा देगी. आइए जानते हैं उस जादुई तरीके के बारे में, जिसे ‘घन जीवामृत’ कहा जाता है.
एक ग्राम गोबर और करोड़ों जीवाणुओं का जादू
कृषि एक्सपर्ट्स के अनुसार, देसी गाय का एक ग्राम गोबर किसी चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि इसमें करोड़ों सूक्ष्म जीवाणु होते हैं जो मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं. ये जीवाणु मिट्टी के पीएच (pH) लेवल को संतुलित करते हैं और उन मित्र कीटों को वापस बुलाते हैं जिन्हें रसायनों ने मार दिया था. गौ-आधारित खेती से किसान न केवल बाजार के महंगे फर्टिलाइजर के चंगुल से आजाद होंगे, बल्कि लोगों को जहर-मुक्त और शुद्ध अनाज भी दे पाएंगे. यह पर्यावरण और जेब, दोनों के लिए फायदे का सौदा है.
घन जीवामृत बनाने की आसान रेसिपी
इसे बनाना उतना ही आसान है जितना घर में खाना बनाना. आपको चाहिए 100 किलो देसी गाय का ताजा गोबर. इसमें मिलाएं 2 किलो गुड़, 2 किलो बेसन (चने का आटा) और किसी पुराने पेड़ (जैसे बरगद या पीपल) के नीचे की एक किलो मिट्टी. अब इसमें 5 लीटर गौमूत्र डालकर इसे आटे की तरह अच्छी तरह गूंथ लें. इस मिश्रण से छोटे-छोटे उपले (कंडे) बना लें और उन्हें किसी छायादार जगह पर सूखने के लिए रख दें. जब ये सूख जाएं, तो समझिये आपकी ताकतवर जैविक खाद तैयार है.
इस्तेमाल करने का तरीका है बेहद सरल
तैयार किए गए सूखे उपलों को आप पीसकर पाउडर बना लें. अब इस 100 किलो पाउडर को लगभग 250 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद में मिला लें और बुवाई के समय खेत में डाल दें. अगर आपकी फसल खड़ी है, तो इन उपलों को पेड़ों की जड़ों से थोड़ी दूरी पर रख दें. जैसे ही आप खेत की सिंचाई करेंगे, पानी के संपर्क में आते ही इसके जीवाणु एक्टिव हो जाएंगे और मिट्टी में घुलकर पौधों की जड़ों तक पोषण पहुंचाने लगेंगे.
छह महीने तक की फुर्सत और जीरो बजट खेती
इस खाद की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक बार बनाने के बाद आप इसे 6 महीने तक स्टोर करके रख सकते हैं. यानी बार-बार खाद बनाने की झंझट खत्म, इससे खेती की लागत लगभग शून्य हो जाती है क्योंकि सारी चीजें घर की ही इस्तेमाल होती हैं. जब लागत कम होगी और पैदावार की गुणवत्ता बढ़ेगी, तो किसानों का मुनाफा खुद-ब-खुद बढ़ जाएगा. यह तरीका न केवल मिट्टी को पुनर्जीवित करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जमीन को सुरक्षित रखता है.