खेतों में खिली सफेद सोना की फसल.. मशरूम उत्पादन में बिहार बना देश का नंबर-1, अब कचरे से होगी मोटी कमाई!

बिहार ने मशरूम उत्पादन में नया इतिहास रचते हुए देश में पहला स्थान हासिल किया है. कम लागत और सीमित जगह में होने वाली इस खेती ने राज्य के छोटे किसानों और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना दिया है. सरकारी अनुदान और ट्रेनिंग की मदद से अब गांव-गांव में सफेद सोना उग रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 22 Jan, 2026 | 08:21 PM

Bihar Mushroom Farming : बिहार की मिट्टी अब सिर्फ अनाज ही नहीं, बल्कि सफेद सोना यानी मशरूम भी उगल रही है. कभी शौकिया तौर पर उगाई जाने वाली मशरूम आज बिहार के किसानों की तकदीर बदल रही है. राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने खुशी जताते हुए बताया है कि बिहार न केवल मशरूम उगाने में आगे बढ़ रहा है, बल्कि देश के कुल उत्पादन में 12 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अपनी बादशाहत कायम कर चुका है.

आज गांव की गलियों से लेकर शहरों के बाजारों तक, मशरूम आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिख रहा है. चाहे छोटे किसान हों या घर की महिलाएं, हर कोई कम जगह और कम लागत में मशरूम उगाकर अपनी जेब भर रहा है. आइए जानते हैं कैसे मशरूम बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया पावर हाउस बन गया है.

बिहार ने पेश की मिसाल

पिछले कुछ सालों में बिहार में मशरूम का उत्पादन रॉकेट की रफ्तार से बढ़ा है. आंकड़ों की बात करें तो साल 2022-23 में जहां राज्य में 35 हजार मीट्रिक टन मशरूम होता था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 42 हजार मीट्रिक टन हो गया. मंत्री जी ने बताया कि साल 2024-25 में इसके 44,930 मीट्रिक टन तक पहुँचने का अनुमान है. यह कोई मामूली आंकड़ा नहीं है; यह बताता है कि बिहार का किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ स्मार्ट फार्मिंग  की ओर कदम बढ़ा चुका है. देश के कुल मशरूम उत्पादन में 12 फीसदी का योगदान देना बिहार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.

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बिहार का मशरूम बना नंबर-1

कम लागत और ज्यादा मुनाफा

मशरूम की सबसे खास बात यह है कि इसके लिए आपको बड़ी जमीन या महंगे संसाधनों की जरूरत नहीं पड़ती. घर के एक छोटे से कमरे या झोपड़ी में भी इसकी खेती शुरू की जा सकती है. यह उन भूमिहीन परिवारों और छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है जिनके पास खेती के लिए पर्याप्त जमीन नहीं है. धान और गेहूं का भूसा, जिसे अक्सर किसान बेकार समझकर जला देते थे, अब वही भूसा मशरूम उगाने के काम आ रहा है. यानी कचरे से कंचन बनाने की यह तकनीक किसानों की लागत  को कम और मुनाफे को दोगुना कर रही है.

बिहार के ये जिले बने मशरूम हब, विदेश तक है डिमांड

आज बिहार के मुजफ्फरपुर, पटना, नालंदा, गया, वैशाली और पश्चिम चंपारण जिले मशरूम उत्पादन  के सबसे बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं. यहाँ का मशरूम सिर्फ स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पड़ोसी देश नेपाल तक अपनी महक बिखेर रहा है. बेहतर मार्केट और बढ़ती डिमांड की वजह से किसानों को हाथों-हाथ वाजिब दाम मिल रहे हैं. पैकिंग, छंटाई और ट्रांसपोर्टेशन के जरिए स्थानीय स्तर पर युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार भी मिल रहा है.

महिलाओं के लिए घर बैठे रोजगार

मशरूम उत्पादन ने बिहार की महिलाओं को आर्थिक  रूप से आजाद बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है. चूंकि इसे घर के अंदर उगाया जा सकता है, इसलिए बड़ी संख्या में महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) इससे जुड़ रहे हैं. घर के कामकाज के साथ-साथ महिलाएं मशरूम की देखभाल कर रही हैं, जिससे परिवार की आय बढ़ रही है. इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधरी है, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी हुई है. अब महिलाएं अपनी कमाई से बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर खर्च कर पा रही हैं.

आप भी ऐसे उठा सकते हैं लाभ

बिहार सरकार मशरूम खेती  को बढ़ावा देने के लिए हर कदम पर साथ खड़ी है. कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार मशरूम किट बांटने से लेकर झोपड़ी आधारित यूनिट बनाने तक के लिए अनुदान (Subsidy) दे रही है. इसके अलावा, कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के माध्यम से किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की ट्रेनिंग दी जा रही है. अगर आप भी इस मुनाफे वाली खेती से जुड़ना चाहते हैं, तो अपने जिले के उद्यान कार्यालय या नजदीकी KVK से संपर्क कर सकते हैं.

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Published: 22 Jan, 2026 | 08:21 PM

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