जीएसटी बदलाव से सिंचाई यंत्र सस्ते होंगे, स्मार्ट फार्मिंग के लिए किसान का कितना खर्च बचेगा.. जानिए

केंद्र ने फसल कटाई और उसके बाद के प्रॉसेस को पूरा करने वाली मशीनों पर भी जीएसटी दर घटा दी है. सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई यंत्रों पर जीएसटी को घटाने को माना जा रहा है. इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट ने भी अपनी राय रखी है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 4 Sep, 2025 | 01:56 PM

केंद्र सरकार ने जीएसटी बदलावों को लागू करने की घोषणा के साथ कई कृषि उत्पादों को जीएसटी से मुक्त कर दिया है. जबकि, खेती में इस्तेमाल होने वाले कृषि यंत्रों पर लगने वाले जीएसटी दर को घटा दिया है. सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई यंत्रों पर जीएसटी को घटाने को माना जा रहा है. क्योंकि, किसान तेजी से स्मार्ट फार्मिंग की ओर रुख कर रहे हैं और सिंचाई पद्धति भी मॉडर्न मशीनों के जरिए की जा रही है. ये स्मार्ट सिंचाई उपकरण काफी महंगे होने से किसानों को खरीदने में दिक्कत होती थी, जो अब पहले से कम हो जाएगी और ये उपकरण खरीदना आसान हो जाएगा. वहीं, इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने बताया कि असल में किसान या कंज्यूमर को कितनी बचत होगी.

केंद्रीय जीएसटी परिषद ने 5 फीसदी और 18 फीसदी जीएसटी स्लैब लागू करने को मंजूरी दे दी है. जबकि, 6 और 12 फीसदी वाली जीएसटी दरों को खत्म कर दिया है. जीएसटी बदलाव का लाभ किसानों को भी भरपूर मिलने वाला है. क्योंकि, कृषि उत्पादों के साथ कृषि यंत्रों, ट्रैक्टर आदि को जीएसटी दायरे में बड़ी राहत दी गई है. वित्त मंत्रालय ने कहा है कि किसानों को लाभ देने के इरादे से नई जीएसटी दरों को मंजूरी देने में कृषि पर खास ध्यान रखा गया है.

सिंचाई उपकरणों पर जीएसटी घटने से किसान की जेब पर बोझ घटेगा

वित्त मंत्रालय के फैसले के अनुसार खेती में सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाली स्मार्ट तकनीक और मशीनों को जीएसटी दर में राहत दी गई है. फसलों की सिंचाई के लिए इस्तेमाल की जा रही तकनीक में ड्रिप इरीगेशन सिस्टम लगाने, स्प्रिंकलर सिस्टम लगाना किसानों के लिए सस्ता हो जाएगा. क्योंकि, दोनों सिस्टम के तहत आने वाले उपकरणों पर लगने वाली जीएसटी दर 12 फीसदी को घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है.

कितनी सस्ता मिलेगा स्प्रिंकलर सिस्टम

सरकार के फैसले से किसानों को इन सिंचाई तकनीकों के तहत उपकरण लगाने की कम लागत चुकानी होगी और उन्हें सिंचाई सुविधा बेहतर करने के लिए मोटी रकम खर्च करने के डर से भी राहत मिलेगी. उदाहरण से देखते हैं कि अगर बाजार में स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने का खर्च अभी तक 1 लाख रुपये पड़ रहा था तो अब यह सीधे सीधे 7 हजार रुपये सस्ता हो जाएगा. इसी तरह अन्य कृषि उपकरणों के दाम भी कम होंगे.
इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारें किसानों को कृषि उपकरणों पर 40 से 80 फीसदी तक छूट भी देती है.

Irrigation System News GST

स्मार्ट सिंचाई तकनीक के दो मॉडल.

ट्रैक्ट्रर और फसल कटाई मशीनों पर भी कम टैक्स लगेगा

केंद्र ने फसल कटाई और उसके बाद के प्रॉसेस को पूरा करने वाली मशीनों पर भी जीएसटी दर घटा दी है. वित्त मंत्रालय के अनुसार हार्वेस्टिंग मशीनरी और थ्रेशिंग मशीन पर जीएसटी 12 फीसदी से घटकर 5 फीसदी कर दिया गया है. इसी तरह ट्रैक्टर (1800 सीसी) पर जीएसटी घटाकर 5 फीसदी कर दी गई है. जबकि, ट्रैक्टर टायर, ट्यूब, हाइड्रोलिक पंप समेत अन्य पुर्जों पर जीएसटी 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी की गई है. इससे छोटे किसानों को ट्रैक्टर खरीदना आसान हो जाएगा. जबकि, उपकरणों की कम कीमत के चलते किसानों का मेंटीनेंस खर्च भी घटेगा.

ट्रैक्टर-टायर पर टैक्स घटने से इंडस्ट्री को राहत मिलेगी- राजेंद्र कपूर

आल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र कपूर ने बताया कि 56वीं जीएसटी काउंसिल बैठक में लिए गए निर्णय कारोबारियों, किसानों और आम जनता के लिए लाभकारी होंगे. उन्होंने कहा कि ट्रक, बस, ट्रैक्टर, टायर और स्पेयर पार्ट्स पर टैक्स घटने से परिवहन उद्योग को राहत मिली है. उन्होंने कहा कि कोयला और ईंधन में सबसे अहम डीजल और पेट्रोल को अब तक जीएसटी में शामिल न किए जाने से उद्योग में असंतोष है, क्योंकि इससे परिवहन लागत लगातार बढ़ी हुई बनी रहती है.

किसानों को नहीं मिलेगा बचत का फायदा – चंद्रभूषण

ट्रैक्टर मार्केट दिल्ली में भोलाराम मार्केट ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन चंद्रभूषण गुप्ता ने किसान इंडिया को बताया कि ट्रैक्टर के कुछ पार्ट को 18 फीसदी जीएसटी दर से हटाकर 5 फीसदी की स्लैब में लाया गया है. उन्होंने बताया कि सारे ट्रैक्टर पार्ट के 5 फीसदी आइटम्स पर ही जीएसटी घटाई गई है. इससे किसान को फायदा नहीं मिल पाएगा, क्योंकि कंपनियां सरकार की ओर से बचत की रकम को खा जाती हैं. सरकार तो कीमतें घटाने के लिए 13 फीसदी जीएसटी घटाई है, लेकिन कंपनियां इस बचत की चोरी करती हैं और किसान या कंज्यूमर को कम कीमत का फायदा नहीं देती हैं.

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Published: 4 Sep, 2025 | 12:48 PM
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