UP के किसान हल्दी की नरेंद्र 01 किस्म की करें खेती, एक एकड़ में लाखों की कमाई.. ऐसे करें बुवाई

हल्दी केवल मसाला ही नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर फसल है, जिसकी मांग हर घर और बाजार में सालों तक बनी रहती है. हल्दी केवल सेहत के लिए ही फायदेमंद नहीं है, बल्कि इसकी तेज और ताजी खुशबू खेत के आसपास का माहौल भी सुगंधित कर देती है.

नोएडा | Updated On: 16 Feb, 2026 | 04:43 PM

Turmeric Farming: बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के किसानों को लगता है कि केवल धान और गेहूं जैसी फसलों की खेती में ही कमाई है, लेकिन ऐसी बात नहीं है. अगर किसान हल्दी की खेती करते हैं, तो कम लागात में ज्यादा मुनाफा होगा. क्योंकि मार्केट में हल्दी की मांग हमेशा रहती है और इसकी कीमत भी धान-गेहूं के मुकाबले ज्यादा होती है. अगर हल्दी की खेती करना चाहते हैं, तो अभी आपके पास अच्छा मौका है. आज हम हल्दी एक की ऐसी किस्म के बारे में बात करने जा रहे हैं, जिसकी बुवाई करने पर बंपर पैदावार होगी.

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आप उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रहने वाले हैं, तो आपके लिए हल्दी की नरेंद्र 01 किस्म सबसे बेहतर है. यह किस्म बलिया की मिट्टी के लिए बहुत उपयुक्त मानी गई है. श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बलिया के अनुसार, अगर सही तरह से नरेंद्र 01 की खेती की जाए तो एक एकड़ में 250 से 300 क्विंटल तक पैदावार हो सकती है. अगर किसान 150 रुपये प्रति किलो की दर से भी हल्दी बेचें, तो एक एकड़ से 33 लाख 75 हजार रुपए तक का शानदार मुनाफा हो सकता है. यानी हल्दी की खेती न सिर्फ किसानों की आमदनी  बढ़ाती है, बल्कि आम लोगों को शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण मसाला भी उपलब्ध कराती है.

नरेंद्र 01 प्रजाति की क्या है खासियत

खास बात यह है कि आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय, फैजाबाद ने अपने शोध में कहा है कि नरेंद्र 01 प्रजाति बंपर पैदावार देने में सक्षम है. इसकी गांठें मोटी होती हैं. अच्छी उपज के लिए उपजाऊ मिट्टी, सही बीज, पर्याप्त पोषक तत्व और समय-समय पर देखभाल जरूरी है. हल्दी केवल मसाला ही नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर फसल है, जिसकी मांग हर घर और बाजार में सालों तक बनी रहती है. हल्दी केवल सेहत के लिए ही फायदेमंद नहीं है, बल्कि इसकी तेज और ताजी खुशबू खेत के आसपास का माहौल भी सुगंधित कर देती है. बाजार में हल्दी में मिलावट का डर रहता है, लेकिन आप इसे खेत के अलावा गमले या गार्डन में भी आसानी से उगा सकते हैं. इस प्रजाति की हल्दी की खेती सरल और मुनाफे वाली होती है.

इस तरह करें हल्दी की बुवाई

एक बिस्वा खेत में लगभग 25-30 किलो बीज पर्याप्त होता है. बुवाई के समय बीजों के बीच 1 फुट और पंक्तियों के बीच लगभग 20 सेंटीमीटर की दूरी रखें. 20-25 दिन बाद 1.5 किलो DAP को 100 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें और हल्की गुड़ाई करें, इससे पौधों की बढ़त बेहतर होती है. साथ ही, खरपतवार नियंत्रण और मिट्टी में नमी बनाए रखना भी जरूरी है.

इतने महीने में तैयार हो जाती है हल्दी की फसल

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसान अभी से खेत की तैयारी शुरू कर दें, तो अगले महीने से बुवाई आसानी से की जा सकती है. हल्दी की फसल  लगभग 7-8 महीने में तैयार हो जाती है. बीज के लिए किसान बलिया के चर्चित टीडी कॉलेज के कृषि विभाग से संपर्क कर सकते हैं. बुवाई के समय हल्दी के कंद को छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में गोबर या जैविक खाद मिलाएं. अगर पर्याप्त खाद उपलब्ध न हो, तो पेड़-पौधों की पत्तियां मिट्टी में मिला दें, ये समय के साथ खुद सड़कर प्राकृतिक खाद बन जाएंगी.

Published: 16 Feb, 2026 | 04:41 PM

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