सिर्फ एक गमला और कुछ कलियां, 4 से 6 महीने में घर पर तैयार होगा जैविक लहसुन

अगर आप घर पर ताजी और रसायन-मुक्त सब्जियां उगाना चाहते हैं, तो लहसुन एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. कम जगह और आसान देखभाल के साथ इसे गमले में उगाया जा सकता है. सही तरीके अपनाने पर घर बैठे ताजा लहसुन की फसल प्राप्त की जा सकती है, जिससे रसोई की जरूरतें भी पूरी होंगी.

नोएडा | Updated On: 21 Jun, 2026 | 08:12 PM

Garlic Farming: आजकल लोग घर पर उगाई गई ताजी और जैविक सब्जियों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं. सीमित जगह होने के बावजूद किचन गार्डन का चलन तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में लहसुन एक ऐसी फसल है जिसे बहुत कम जगह में आसानी से उगाया जा सकता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, बारिश के मौसम में भी घर की बालकनी, छत या खिड़की के पास गमले में लहसुन की सफल खेती की जा सकती है. सही तरीके अपनाने पर परिवार को कई महीनों तक ताजा और रसायन-मुक्त लहसुन मिल सकता है.

सही गमला और मिट्टी का चुनाव है जरूरी

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार बताते हैं कि लहसुन की अच्छी पैदावार  के लिए सबसे पहले सही गमले का चयन करना जरूरी है. इसके लिए 8 से 12 इंच गहरा गमला उपयुक्त माना जाता है. गमले में ऐसी मिट्टी का मिश्रण तैयार करना चाहिए जिसमें पानी आसानी से निकल सके. इसके लिए 50 प्रतिशत कोकोपीट, 30 प्रतिशत बगीचे की मिट्टी और 20 प्रतिशत कम्पोस्ट मिलाया जा सकता है. यह मिश्रण पौधों को जरूरी पोषण देने के साथ जड़ों को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है.

बड़ी कलियों की बुवाई से मिलेगा बेहतर उत्पादन

विशेषज्ञों के अनुसार, बुवाई के लिए हमेशा बड़ी और स्वस्थ लहसुन की कलियों  का चयन करना चाहिए. कलियों का बाहरी छिलका नहीं हटाना चाहिए क्योंकि इससे पौधे की शुरुआती वृद्धि बेहतर होती है. लहसुन की कलियों को लगभग 2 इंच गहराई में लगाना चाहिए. कली का नुकीला हिस्सा ऊपर की ओर रहे और प्रत्येक कली के बीच 4 से 6 इंच की दूरी रखी जाए. इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और कंद का विकास अच्छी तरह होता है.

बारिश में ऐसे करें देखभाल

मानसून के दौरान लहसुन की खेती  में जलभराव सबसे बड़ी समस्या बन सकती है. इसलिए गमले को ऐसी जगह रखें जहां प्रतिदिन 4 से 5 घंटे धूप मिल सके. मिट्टी को नम बनाए रखें, लेकिन उसमें पानी जमा न होने दें. फफूंद और अन्य रोगों से बचाव के लिए मिट्टी में नीम खली का उपयोग किया जा सकता है. नियमित निगरानी से पौधों को स्वस्थ रखा जा सकता है और उत्पादन बेहतर मिलता है.

4 से 6 महीने में तैयार हो जाएगा लहसुन

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, रोपाई के करीब 2 से 3 सप्ताह बाद लहसुन की हरी पत्तियां उपयोग के लिए तैयार हो जाती हैं. वहीं पूरा कंद विकसित होने में लगभग 4 से 6 महीने का समय लग सकता है. जब पौधे की निचली पत्तियां पीली पड़ने लगें, तब समझना चाहिए कि लहसुन की फसल तैयार हो चुकी है. इसके बाद कंद की खुदाई कर ताजा और जैविक लहसुन का आनंद लिया जा सकता है.

Published: 21 Jun, 2026 | 11:30 PM

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