Paddy Procurement: तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मंगलवार को कहा कि चालू रबी सीजन में देशभर में खरीदे गए कुल धान का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा अकेले तेलंगाना से आया है. तेलंगाना स्थापना दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अब तक 63.65 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद कर चुकी है और किसानों के खातों में सीधे 11,903 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि बेमौसम बारिश से प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को नुकसान से बचाने के लिए सरकार ने लगभग 10 हजार मीट्रिक टन गीले धान की भी खरीद की है. उनका कहना था कि सरकार किसानों की उपज खरीदने और उन्हें समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है.
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कहा कि धान खरीद के मामले में फिलहाल देश का कोई भी राज्य तेलंगाना की बराबरी नहीं कर सकता. उन्होंने दावा किया कि चालू यासांगी (रबी) सीजन में देशभर में खरीदे गए कुल धान का 60 प्रतिशत हिस्सा अकेले तेलंगाना का है. मुख्यमंत्री ने बताया कि 2025-26 में राज्य ने 236.87 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किसानों को दी जा रही प्रोत्साहन योजनाओं का सकारात्मक असर दिखा है, जिससे धान, मक्का और कपास के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. इसके साथ ही पशुपालन और मत्स्य पालन क्षेत्र में भी अच्छी प्रगति दर्ज की गई है.
किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने की जरूरत
रेवंत रेड्डी ने कहा कि अब किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने की जरूरत है. उनका मानना है कि केवल कुछ चुनिंदा फसलों पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न फसलों की खेती को बढ़ावा देकर तेलंगाना को अधिक उत्पादन और समृद्ध कृषि वाला राज्य बनाया जा सकता है. मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कहा कि राज्य सरकार तेलंगाना-महाराष्ट्र सीमा पर गोदावरी नदी पर तुम्मिडीहट्टी बैराज बनाने के लिए प्रयास कर रही है. इस परियोजना को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर सहयोग मांगा गया है, क्योंकि बैराज बनने के बाद महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में जलभराव (डूब क्षेत्र) की स्थिति बन सकती है.
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कलेश्वरम परियोजना को लेकर क्या बोले सीएम
उन्होंने कहा कि पिछली बीआरएस सरकार द्वारा करीब 1 लाख करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए कलेश्वरम परियोजना में निर्माण के सिर्फ तीन साल के भीतर ही संरचनात्मक खामियां सामने आ गई थीं. अब इसकी मरम्मत और पुनर्स्थापना का जिम्मा वर्तमान सरकार पर आ गया है. मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार ने कलेश्वरम परियोजना के मेडिगड्डा, अन्नाराम और सुंदिल्ला बैराजों की मरम्मत और पुनर्स्थापना का काम शुरू कर दिया है.