e-FARMS App: रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार 1 जून से 30 जून तक देशभर में खेत बचाओ अभियान चला रही है. इस अभियान का उद्देश्य किसानों को मिट्टी की सेहत बनाए रखने और उर्वरकों का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करने के लिए प्रेरित करना है. इसी क्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से Soil Mobile App e-FARMS अपनाने की अपील की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर बताया कि यह एप किसानों को खेत और फसल की जरूरत के अनुसार उर्वरकों के सही उपयोग की जानकारी देने में मदद करेगा.
जरूरत से ज्यादा खाद डालने से बढ़ता है नुकसान
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कई किसान बेहतर उत्पादन की उम्मीद में खेतों में आवश्यकता से अधिक खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल कर देते हैं. इससे फसल को अपेक्षित लाभ नहीं मिलता, बल्कि मिट्टी की उर्वरता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. साथ ही किसानों की उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे वैज्ञानिक सलाह के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करें, ताकि मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे और अनावश्यक खर्च से बचा जा सके.
e-FARMS एप कैसे करेगा मदद
कृषि मंत्री के अनुसार e-FARMS एप किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य और फसल की जरूरत के आधार पर उर्वरकों की सटीक मात्रा की जानकारी देता है. इससे किसानों को ये पता चल सकेगा कि खेत में कौन से पोषक तत्वों की कमी है और किस प्रकार की खाद की आवश्यकता है. सही मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करने से फसल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लागत को भी कम किया जा सकता है. यह तकनीक खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
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E-FARMS ऐप किसानों के लिए उपयोगी पहल है। अक्सर हमारे किसान भाई खेतों में जरूरत से ज्यादा खाद डाल देते हैं। उन्हें लगता है कि जितनी ज्यादा खाद, उतनी अच्छी फसल।
इससे एक तो धरती माँ का स्वास्थ्य बिगड़ता है और किसानों की जेब पर भी अनावश्यक बोझ आता है। यह ऐप मिट्टी के स्वास्थ्य और… pic.twitter.com/PtD25jMM2z
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) June 1, 2026
एक फोटो से मिलेगी मिट्टी की जानकारी
e-FARMS एप का उपयोग काफी आसान है. किसान अपने खेत में जाकर एप के माध्यम से मिट्टी या फसल की फोटो अपलोड कर सकते हैं. इसके बाद एप उपलब्ध डेटा और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर मिट्टी में पोषक तत्वों की स्थिति का आकलन करता है. किसान को यह जानकारी मिल जाती है कि खेत में किस पोषक तत्व की कमी है और कितनी मात्रा में खाद डालनी चाहिए. इससे उर्वरकों का संतुलित उपयोग संभव हो सकेगा.
मध्य प्रदेश के किसानों को मिलेगा विशेष लाभ
ये एप भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत भोपाल स्थित भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान (IISS) द्वारा विकसित किया गया है. इसमें मध्य प्रदेश की मिट्टी और जलवायु से संबंधित आंकड़ों का उपयोग किया गया है. फिलहाल यह एप सभी राज्यों के लिए उपलब्ध नहीं है, लेकिन मध्य प्रदेश के किसान इसका लाभ उठा सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इसका विस्तार अन्य राज्यों तक भी किया जा सकता है, जिससे अधिक किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने में मदद मिलेगी.