धान में दिख रहा बौनापन तो हो जाएं सावधान! एक गलती से चौपट हो सकती है पूरी फसल
धान के पौधे छोटे, गुच्छेदार और गहरे हरे दिख रहे हैं तो सतर्क हो जाएं. यह बौनापन वायरस या जिंक की कमी का संकेत हो सकता है. समय पर रसचूसक कीटों पर नियंत्रण, संतुलित खाद और उचित पानी प्रबंधन अपनाकर किसान फसल को बड़े नुकसान से बचा सकते हैं.
Rice Stunting: धान की फसल में पौधों का सामान्य विकास रुकना किसानों के लिए चिंता का कारण बन सकता है. खेत में यदि पौधे छोटे, गुच्छेदार और गहरे हरे दिखाई दे रहे हैं तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. धान में बौनापन कई बार वायरस के संक्रमण के साथ-साथ जिंक जैसे जरूरी पोषक तत्वों की कमी के कारण भी देखने को मिलता है. समय रहते पहचान और नियंत्रण नहीं होने पर इसका सीधा असर फसल की पैदावार पर पड़ सकता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, किसान फसल की नियमित निगरानी करें और लक्षण दिखाई देने पर बिना सलाह के अत्यधिक यूरिया का इस्तेमाल करने से बचें.
वायरस और जिंक की कमी बन सकती है वजह
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, धान में बौनेपन की प्रमुख वजहों में साउदर्न राइस ब्लैक-स्ट्रीक्ड ड्वार्फ वायरस और जिंक की कमी शामिल है. वायरस का प्रसार मुख्य रूप से रसचूसक कीटों, जैसे सफेद पीठ वाला फुदका और भूरा फुदका, के माध्यम से हो सकता है. संक्रमित पौधे का रस चूसने के बाद जब ये कीट स्वस्थ पौधे पर पहुंचते हैं तो संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा खेत में जलभराव, जड़ों का कमजोर विकास और नाइट्रोजन यानी यूरिया का असंतुलित प्रयोग भी पौधों की बढ़वार को प्रभावित कर सकता है.
छोटे और गहरे हरे पौधे दिखें तो रहें सतर्क
बौनेपन से प्रभावित धान के पौधे सामान्य पौधों की तुलना में काफी छोटे दिखाई देते हैं. पौधों में गुच्छेदार बढ़वार देखने को मिल सकती है और पत्तियों का रंग सामान्य से अधिक गहरा हरा हो जाता है. कई बार पत्तियां मोटी या मुड़ी हुई भी नजर आती हैं. प्रभावित पौधों की जड़ों का विकास कमजोर हो सकता है. गंभीर संक्रमण की स्थिति में पौधों में बालियां नहीं निकलतीं और यदि बालियां आती भी हैं तो उनमें दाने कम या पूरी तरह खाली रह सकते हैं. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर किसान तुरंत खेत की जांच कराएं और समस्या के अनुसार प्रबंधन करें.
रसचूसक कीटों पर नियंत्रण जरूरी
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, यदि फसल में रसचूसक कीट दिखाई दे रहे हैं तो उनके नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना चाहिए. इसके लिए कृषि विशेषज्ञ या स्थानीय कृषि विभाग की सलाह के अनुसार ट्राइफ्लूमेज़ोपाइरिम या पाइमेट्रोजिन जैसे अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग किया जा सकता है. जिंक की कमी होने पर जिंक सल्फेट का उपयोग भी फायदेमंद हो सकता है. पत्तियों पर छिड़काव के लिए 0.5 प्रतिशत जिंक सल्फेट और 1 प्रतिशत यूरिया का घोल इस्तेमाल करने से पहले फसल की स्थिति और स्थानीय कृषि सलाह को ध्यान में रखना चाहिए.
संतुलित खाद और पानी से बचाएं फसल
धान में बौनेपन से बचाव के लिए शुरुआत से ही संतुलित पोषण और खेत प्रबंधन जरूरी है. किसान अत्यधिक यूरिया डालने से बचें और जरूरत के अनुसार नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश तथा जिंक का संतुलित इस्तेमाल करें. खेत में लंबे समय तक पानी जमा न रहने दें और सिंचाई की उचित व्यवस्था रखें. प्रमाणित तथा स्वस्थ बीजों का चयन करें और जरूरत के अनुसार बीजोपचार करें. खेत की मेड़ों और आसपास के खरपतवार को साफ रखना भी जरूरी है, क्योंकि ये कीटों के लिए आश्रय बन सकते हैं. फसल की नियमित निगरानी कर शुरुआती लक्षणों में ही कार्रवाई करने से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.