धान की पछेती बुवाई में ट्राइकोडर्मा से खेत साफ, बीमारी और दीमक से मिलेगा बड़ा बचाव

धान की पछेती बुवाई करने वाले किसानों के लिए खेत की सफाई और रोग नियंत्रण बेहद जरूरी है. फसल अवशेषों में छिपी बीमारियां नई फसल को नुकसान पहुंचा सकती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार ट्राइकोडर्मा का सही उपयोग खेत को प्राकृतिक रूप से साफ करता है और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद करता है, जिससे फसल सुरक्षित रहती है.

नोएडा | Published: 22 Jul, 2026 | 10:43 AM

Paddy Farming: धान की पछेती बुवाई करने वाले किसानों के लिए यह समय बहुत अहम होता है, क्योंकि खेत में मौजूद पुराने फसल अवशेष कई तरह की बीमारियों को जन्म दे सकते हैं. अगर इन अवशेषों का सही प्रबंधन नहीं किया गया तो आने वाली धान की फसल पर इसका सीधा असर पड़ता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, ट्राइकोडर्मा का सही उपयोग खेत को रोगमुक्त बनाने में बहुत मदद करता है और यह प्राकृतिक तरीके से मिट्टी की सेहत को भी सुधारता है.

खेत में पड़े अवशेष बन सकते हैं बीमारी का कारण

धान की कटाई के बाद  खेत में बचे हुए पत्ते, ठूंठ और अन्य अवशेष अक्सर सड़ते नहीं हैं और इनमें फफूंद व कीट पनपने लगते हैं. यही आगे चलकर नई फसल में रोग फैलाते हैं. पछेती बुवाई के समय ये समस्या और गंभीर हो जाती है क्योंकि नमी और तापमान बीमारियों के फैलाव के लिए अनुकूल हो जाते हैं. इसलिए इन अवशेषों का समय पर निस्तारण बेहद जरूरी है.

ट्राइकोडर्मा क्यों है किसानों के लिए फायदेमंद

ट्राइकोडर्मा एक जैविक फफूंदनाशक है जो खेत में मौजूद हानिकारक फफूंद  को खत्म करने का काम करता है. ये न केवल बीमारियों को नियंत्रित करता है बल्कि मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या भी बढ़ाता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, ट्राइकोडर्मा खेत में पड़े अवशेषों को तेजी से गलाने में मदद करता है और दीमक जैसी समस्याओं को भी कम करता है.

घर पर कैसे तैयार करें ट्राइकोडर्मा घोल

किसान इसे आसानी  से घर पर भी तैयार कर सकते हैं. इसके लिए लगभग 200 लीटर पानी में 2 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा, 2 किलोग्राम गुड़ और 1 किलोग्राम बेसन मिलाकर घोल तैयार किया जाता है. इस मिश्रण को अच्छी तरह मिलाकर लगभग एक सप्ताह तक छायादार स्थान पर ढककर रखा जाता है. इस दौरान यह घोल सक्रिय हो जाता है और खेत में उपयोग के लिए तैयार हो जाता है.

खेत में उपयोग का सही तरीका और लाभ

तैयार किया गया ट्राइकोडर्मा घोल सिंचाई के दौरान खेत में डाला जाता है, जिससे यह पूरे खेत में आसानी से और समान रूप से फैल जाता है. इसके उपयोग से खेत में मौजूद पुराने फसल अवशेष तेजी से सड़ने लगते हैं और मिट्टी की प्राकृतिक सफाई  होती है. ये प्रक्रिया मिट्टी की उर्वरक क्षमता को भी बेहतर बनाती है, जिससे फसल की बढ़वार अच्छी होती है. साथ ही यह आने वाली धान की फसल को शुरुआती अवस्था से ही विभिन्न बीमारियों से सुरक्षित रखता है. नियमित उपयोग से खेत की सेहत बनी रहती है और रासायनिक दवाओं पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाती है.

Topics: