मुर्रा भैंस और साहीवाल गाय बनीं किसानों की पसंद, जानें दूध बढ़ाने और मुनाफा बढ़ाने के तरीके

डेयरी व्यवसाय किसानों के लिए नियमित आय का भरोसेमंद साधन बनता जा रहा है. सही नस्ल का चयन, संतुलित आहार और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके दूध उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. पशुपालन विभाग का कहना है कि बेहतर प्रबंधन और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर कम लागत में अच्छी कमाई की जा सकती है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 25 Jun, 2026 | 12:05 PM

Dairy Farming: पशुपालन विभाग के अनुसार डेयरी व्यवसाय किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए आय बढ़ाने का एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है. कम लागत में शुरू होने वाला यह व्यवसाय नियमित आमदनी का जरिया बन सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पशुपालक सही नस्ल का चयन करें और वैज्ञानिक तरीके अपनाएं, तो दूध उत्पादन के साथ मुनाफे में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की जा सकती है.

उन्नत नस्लों का चयन है सफलता की कुंजी

पशुपालन विभाग के अनुसार डेयरी व्यवसाय  में सफलता काफी हद तक पशुओं की नस्ल पर निर्भर करती है. भैंसों में मुर्रा और भदावरी नस्ल को बेहतर दूध उत्पादन और उच्च फैट के लिए उपयुक्त माना जाता है. वहीं गायों में साहीवाल और गीर नस्ल अच्छे विकल्प हैं. साहीवाल गाय गर्म मौसम को आसानी से सहन कर सकती है, जबकि गीर गाय का दूध बेहतर गुणवत्ता वाला माना जाता है. बड़े स्तर पर डेयरी संचालन के लिए जर्सी और एचएफ क्रॉस नस्ल की गायों को भी अपनाया जा सकता है.

दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

विशेषज्ञों के अनुसार दूध उत्पादन  केवल नस्ल पर ही नहीं, बल्कि संतुलित आहार और उचित देखभाल पर भी निर्भर करता है. पशुओं को हरा चारा, सूखा चारा, मिनरल मिक्सचर और पौष्टिक दाना नियमित रूप से देना चाहिए. अत्यधिक गर्मी और उमस से पशु तनाव में आ सकते हैं, जिससे दूध उत्पादन प्रभावित होता है. ऐसे में शेड में पर्याप्त वेंटिलेशन, पंखे या अन्य ठंडक व्यवस्था करना लाभकारी हो सकता है. साथ ही समय पर टीकाकरण, कृमिनाशक दवाएं और स्वास्थ्य जांच भी जरूरी है.

लागत कम करने के लिए अपनाएं आधुनिक तकनीक

पशुपालन विभाग का कहना है कि डेयरी व्यवसाय में मुनाफा बढ़ाने के लिए लागत नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण है. इसके लिए साइलेज तकनीक  का उपयोग किया जा सकता है, जिससे हरे चारे को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. इससे सालभर चारे की उपलब्धता बनी रहती है और खर्च कम होता है. इसके अलावा बेहतर नस्ल तैयार करने के लिए कृत्रिम गर्भाधान जैसी तकनीकों का उपयोग भी लाभदायक साबित हो सकता है.

छोटे स्तर से शुरू कर बना सकते हैं बड़ा व्यवसाय

विभाग के अनुसार डेयरी व्यवसाय को दो या तीन पशुओं से भी शुरू किया जा सकता है. जैसे-जैसे अनुभव और आय बढ़े, पशुओं की संख्या बढ़ाकर  इसे बड़े व्यवसाय का रूप दिया जा सकता है. पशुओं की खरीद एक साथ करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से करने की सलाह दी जाती है, जिससे पूरे वर्ष दूध उत्पादन जारी रहता है. इसके अलावा विभिन्न सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ लेकर शुरुआती निवेश का बोझ भी कम किया जा सकता है. सही योजना, बेहतर प्रबंधन और उन्नत नस्लों के चयन से डेयरी व्यवसाय किसानों के लिए स्थायी और लाभकारी आय का मजबूत स्रोत बन सकता है.

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