Animal Care: गर्मी में ये 5 काम कर लें, पशु रहेंगे फिट और दूध उत्पादन नहीं होगा कम

Mineral Mixture: बिहार सरकार ने पशुपालकों को जरूरी सलाह दी है. गर्मी में पशुओं को छाया, दिन में चार बार ताजा पानी, समय पर टीकाकरण, कृमिनाशक दवा, ज्वार-मक्का की बुआई और मिनरल मिक्सचर देना जरूरी है. इन आसान उपायों से पशु स्वस्थ रहेंगे, पाइका और गर्मी का असर कम होगा तथा दूध उत्पादन बेहतर बना रहेगा.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 18 Jun, 2026 | 10:32 PM

Bihar Livestock: तेज धूप के साथ उमस भरी गर्मी बढ़ने लगी है और इसका सीधा असर पशुओं की सेहत पर पड़ता है. तेज तापमान में पशुओं की भूख कम हो जाती है, शरीर में पानी और लवण की कमी होने लगती है और दूध उत्पादन भी घट जाता है. यही वजह है कि बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने पशुपालकों के लिए इस महीने खास सलाह जारी की है. विभाग का कहना है कि अगर पशुपालक इस समय पानी, टीकाकरण, कृमिनाशक दवा, हरा चारा और खनिज मिश्रण पर ध्यान दें, तो पशु गर्मी में भी स्वस्थ रहेंगे और उत्पादन पर असर नहीं पड़ेगा.

गर्मी में छाया, हवा और पानी सबसे जरूरी

अप्रैल में दोपहर की तेज धूप पशुओं के लिए सबसे बड़ा खतरा  बनती है. ज्यादा गर्मी से पशुओं में पानी और लवण की कमी, भूख कम लगना और दूध उत्पादन घटना जैसे लक्षण दिखते हैं. विभाग ने साफ सलाह दी है कि पशुओं को दोपहर के समय छायादार और हवादार जगह में रखें. इसके साथ दिन में कम से कम चार बार ताजा और साफ पानी जरूर पिलाएं. पानी की कमी से पशु जल्दी कमजोर पड़ते हैं और हीट स्ट्रेस का खतरा बढ़ जाता है. अगर संभव हो तो शेड में पंखा, फॉगिंग या पानी का हल्का छिड़काव भी किया जा सकता है, जिससे पशुओं को राहत मिले.

टीकाकरण और कृमिनाशक दवा बिल्कुल न छोड़ें

विभाग ने भेड़ पालकों  को खास सलाह दी है कि मेमनों में Sheep Pox (भेड़ चेचक) और Enterotoxaemia का टीका पशु चिकित्सक की सलाह से जरूर लगवाएं. इसके अलावा गाय-भैंस और अन्य पशुओं में गलाघोंटू और ब्लैक क्वार्टर (लंगड़ी रोग) जैसे संक्रामक रोगों के टीके समय पर लगवाना जरूरी है. गर्मी के मौसम में बाहरी और अंदरूनी परजीवी तेजी से बढ़ते हैं. इसलिए पशुओं को अंतः और बाह्य परजीवी नाशक दवा पशु चिकित्सक की सलाह से दें. मुर्गियों के लिए भी कृमिनाशक दवा जरूरी बताई गई है. साथ ही बाहरी परजीवी से बचाव के लिए शेड और पशुओं पर नियमित दवा का छिड़काव करें.

अभी से करें ज्वार-मक्का और एजोला की तैयारी

आने वाले खरीफ सीजन के लिए विभाग ने सलाह दी है कि पशुपालक ज्वार और मक्का  की बुआई अभी से शुरू करें, ताकि बरसात में हरे चारे की कमी न हो. ये फसलें पशुओं के लिए पौष्टिक हरा चारा देती हैं और दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद करती हैं. इसके साथ विभाग ने एजोला घास के उपयोग पर भी जोर दिया है. एजोला में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज और विटामिन संतुलित मात्रा में मिलते हैं. यह कम लागत में तैयार होने वाला पौष्टिक चारा है, जो पशुओं की सेहत और दूध दोनों के लिए फायदेमंद माना जाता है.

खनिज मिश्रण से दूर होगी पाइका की समस्या

इस मौसम में कई बार पशुओं में फॉस्फोरस और दूसरे खनिज लवणों की कमी होने लगती है. इसकी वजह से पशु मिट्टी, पेशाब या दीवार चाटने लगते हैं. इसे ही पाइका कहा जाता है. यह साफ संकेत है कि पशु के शरीर में मिनरल्स की कमी हो रही है. विभाग ने सलाह दी है कि पशुपालक रोजाना पशुओं  को खनिज लवण मिश्रण जरूर दें. इससे न सिर्फ पाइका की समस्या दूर होगी, बल्कि हड्डियां मजबूत रहेंगी, भूख बेहतर लगेगी और दूध उत्पादन पर भी अच्छा असर पड़ेगा. कुल मिलाकर अप्रैल के महीने में पशुओं की सही देखभाल ही ज्यादा मुनाफे की कुंजी है. छाया, साफ पानी, समय पर टीकाकरण, कृमिनाशक दवा, हरा चारा और मिनरल मिक्सचर-इन आसान उपायों से पशु गर्मी में स्वस्थ रहेंगे और उत्पादन लगातार अच्छा बना रहेगा. सीधी बात यह है कि अभी की सावधानी आने वाले पूरे सीजन में पशुपालकों की कमाई बढ़ा सकती है.

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Published: 18 Jun, 2026 | 10:32 PM

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