Animal Husbandry: ग्रामीण इलाकों में पशुपालन किसानों की आमदनी का बड़ा सहारा है. गाय, भैंस और अन्य पशुओं की अच्छी सेहत ही दूध उत्पादन और कमाई को बढ़ाती है. लेकिन मौसम बदलने के साथ पशुओं में बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. ऐसे में पशुपालकों को समय रहते सावधान रहने की जरूरत होती है. बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने मार्च महीने को ध्यान में रखते हुए पशुपालकों के लिए कुछ जरूरी सलाह जारी की है, ताकि पशु स्वस्थ रहें और पशुपालकों को नुकसान से बचाया जा सके.
पशुओं को रोज दें खनिज मिश्रण
बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार पशुओं के अच्छे स्वास्थ्य के लिए उन्हें संतुलित आहार देना बहुत जरूरी है. इसके साथ ही पशुओं को रोजाना खनिज मिश्रण देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. विशेषज्ञों के अनुसार पशुओं को उनकी शारीरिक स्थिति और जरूरत के अनुसार रोजाना करीब 30 से 50 ग्राम खनिज मिश्रण देना चाहिए. खनिज मिश्रण देने से पशुओं के शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे उनकी सेहत अच्छी रहती है. इससे पशुओं की कमजोरी दूर होती है और दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन भी बेहतर होता है. खनिज मिश्रण देने से पशुओं की हड्डियां मजबूत रहती हैं और उनकी प्रजनन क्षमता भी बेहतर होती है. इसलिए पशुपालकों को चाहिए कि वे अपने पशुओं के आहार में इसे जरूर शामिल करें.
खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों से बचाव जरूरी
पशुओं में कई संक्रामक बीमारियां तेजी से फैलती हैं, जिनमें खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है. यह बीमारी एक पशु से दूसरे पशु में बहुत तेजी से फैलती है और इससे पशुपालकों को भारी नुकसान हो सकता है. इस बीमारी में पशुओं के मुंह और खुरों में छाले हो जाते हैं, जिससे उन्हें चलने और खाने में परेशानी होती है. कई बार इससे दूध उत्पादन भी अचानक कम हो जाता है. इसलिए पशुपालकों को इस बीमारी को लेकर हमेशा सतर्क रहना चाहिए और समय पर टीकाकरण करवाना चाहिए.

पशुओं की सेहत के लिए मार्च में जरूरी देखभाल और टीकाकरण.
रेबीज और अन्य रोगों से भी करें बचाव
पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को यह भी सलाह दी है कि अगर उनके पशुओं का रेबीज या अन्य रोगों के खिलाफ टीकाकरण नहीं हुआ है तो मार्च महीने में जरूर करवाएं. रेबीज एक गंभीर बीमारी है, जो संक्रमित जानवर के काटने से फैल सकती है. अगर समय पर टीकाकरण न कराया जाए तो यह पशुओं के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. इसलिए पशुपालकों को चाहिए कि वे अपने पशुओं की नियमित जांच करवाते रहें और जरूरत पड़ने पर तुरंत टीकाकरण कराएं.
साफ-सफाई का रखें खास ध्यान
पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए साफ-सफाई बहुत जरूरी होती है. जहां पशु बांधे जाते हैं, वहां की नियमित सफाई करनी चाहिए. गंदगी होने पर कई तरह के कीट और बैक्टीरिया पैदा हो सकते हैं, जिससे पशुओं में बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है. पशुपालकों को चाहिए कि वे पशुशाला को साफ रखें, समय-समय पर कीटाणुनाशक दवाओं का छिड़काव करें और पशुओं को साफ पानी व अच्छा चारा दें. इससे पशु स्वस्थ रहते हैं और उनकी उत्पादकता भी बेहतर होती है.
समय पर देखभाल से बढ़ेगा पशुपालकों का लाभ
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पशुपालक अपने पशुओं की सही देखभाल करें और विभाग द्वारा दी गई सलाह का पालन करें तो पशुपालन से अच्छा लाभ मिल सकता है. पशुओं को संतुलित आहार, खनिज मिश्रण और समय पर टीकाकरण देने से वे लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं. इससे दूध उत्पादन बढ़ता है और पशुपालकों की आय में भी वृद्धि होती है. बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि वे मार्च महीने में इन जरूरी बातों का विशेष ध्यान रखें. इससे पशु बीमारियों से सुरक्षित रहेंगे और पशुपालन का व्यवसाय भी मजबूत होगा.