Tip Of The Day: खतरे का अलार्म है धान के पत्ते का मुड़ना, 15 दिन में पूरी फसल हो सकती है तबाह

Paddy Farming Tips: मानसून के मौसम में धान की फसल पर पत्ता लपेटक कीट तेजी से हमला कर रहा है. यह कीट पत्तियों को मोड़कर अंदर से खाता है, जिससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है. समय पर पहचान और सही दवा का प्रयोग किसानों को भारी नुकसान से बचा सकता है.

नोएडा | Updated On: 28 Jul, 2026 | 11:49 AM

मॉनसून के मौसम में धान की फसल पर कई प्रकार के कीटों का खतरा बढ़ जाता है, जिनमें पत्ता लपेटक (लीफ फोल्डर) सबसे नुकसानदायक माना जाता है. यह कीट रोपाई के शुरुआती दिनों में तेजी से हमला करता है और समय पर नियंत्रण नहीं होने पर फसल की बढ़वार रोक देता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, यदि किसान शुरुआती लक्षणों की पहचान कर तुरंत नियंत्रण उपाय अपनाएं, तो फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है.

रोपाई के 10 से 15 दिन सबसे संवेदनशील

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, धान की रोपाई  के बाद शुरुआती 10 से 15 दिन पत्ता लपेटक कीट के हमले के लिहाज से सबसे संवेदनशील होते हैं. यह कीट धान की हरी पत्तियों को मोड़कर उनके अंदर छिप जाता है और उसकी सूंडी पत्तियों के हरे भाग यानी क्लोरोफिल को खुरचकर खाती रहती है. इससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है, पौधों की बढ़वार रुक जाती है और फसल कमजोर होने लगती है. यदि समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया जाए तो कुछ ही दिनों में खेत का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है.

ऐसे पहचानें पत्ता लपेटक कीट का हमला

इस कीट की पहचान करना काफी आसान है. प्रभावित पत्तियां किनारों  से मुड़कर बेलनाकार आकार ले लेती हैं. कुछ दिनों बाद उन पर सफेद लंबी धारियां दिखाई देने लगती हैं और धीरे-धीरे पूरी पत्ती सूखकर सफेद हो जाती है. अधिक प्रकोप होने पर दूर से पूरा खेत झुलसा हुआ दिखाई देता है. विशेषज्ञों के अनुसार 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान, अधिक नमी, लगातार बादल और रिमझिम बारिश इस कीट के तेजी से फैलने के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं. वहीं, जरूरत से अधिक नाइट्रोजन उर्वरक का प्रयोग पौधों को अधिक मुलायम और हरा बनाता है, जिससे कीट का हमला बढ़ सकता है.

समय पर करें नियंत्रण, बच जाएगी फसल

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, यदि रोपाई के 10 से 15 दिनों के भीतर शुरुआती लक्षण दिखाई दें, तो प्रति एकड़ 8 किलोग्राम कार्टेप हाइड्रोक्लोराइड 4 फीसदी जी.आर. का प्रयोग करें. दवा को सूखी रेत या हल्की खाद में मिलाकर पूरे खेत में समान रूप से बिखेरें. इस दौरान खेत में 2 से 3 इंच पानी होना चाहिए और यह पानी कम से कम 4 से 5 दिन तक बना रहना चाहिए, ताकि दवा प्रभावी ढंग से काम कर सके.

यदि प्रकोप अधिक हो चुका हो और पत्तियां तेजी से मुड़ रही हों, तो प्रति एकड़ 60 मिलीलीटर क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 फीसदी एससी को 150 से 200 लीटर पानी में घोलकर दोपहर बाद छिड़काव करें. सही समय पर अपनाए गए ये उपाय पत्ता लपेटक कीट पर प्रभावी नियंत्रण करने के साथ धान की फसल को बड़े नुकसान से बचाने में मददगार साबित होते हैं.

Published: 28 Jul, 2026 | 11:45 AM

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