Mango serp burn disease: भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है. गर्मियां आते ही बागों में बौर और छोटे-छोटे फलों की बहार दिखाई देने लगती है. किसान पूरे साल जिस मौसम का इंतजार करते हैं, वही समय कई बार उनके लिए चिंता भी लेकर आता है. तापमान बढ़ने के साथ आम के पौधों में कई तरह की बीमारियां और पोषक तत्वों की कमी देखने को मिलती है. इन्हीं समस्याओं में से एक है “सर्प बर्न”. यह बीमारी दिखने में साधारण लगती है, लेकिन अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो पौधे की बढ़वार, फल की गुणवत्ता और उत्पादन पर गहरा असर डाल सकती है. आइए जानते हैं कि सर्प बर्न क्या है, यह क्यों होता है और किसान इससे अपने बाग को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं.
क्या है सर्प बर्न की समस्या?
सरकारी वेबसाइट ppqs.gov.in के अनुसार, सर्प बर्न असल में पत्तियों से जुड़ी एक समस्या है, जो अधिक नमक (लवणता) या असंतुलित पोषण के कारण पैदा होती है. इसे किसी कीड़े या वायरस की बीमारी नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह मिट्टी और पानी की खराब स्थिति के कारण होता है. जब पेड़ की जड़ों तक ज्यादा नमक पहुंचता है या मिट्टी में जरूरी पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ जाता है, तो इसका असर सबसे पहले पत्तियों पर दिखाई देता है.
गर्मी के मौसम में पानी की कमी और ज्यादा वाष्पीकरण के कारण मिट्टी में नमक की मात्रा ऊपर की ओर जमा होने लगती है. यही जमा हुआ नमक धीरे-धीरे पौधों को नुकसान पहुंचाता है.
सर्प बर्न होने के मुख्य कारण
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ा कारण है मिट्टी में अधिक लवणता. अगर खेत की मिट्टी पहले से ही नमकीन है या लंबे समय से नमक वाले उर्वरकों का ज्यादा उपयोग किया गया है, तो पेड़ों की जड़ें प्रभावित होने लगती हैं. कई बार सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाला पानी भी खारा होता है, जिससे धीरे-धीरे मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो जाती है.
इसके अलावा अनियमित सिंचाई भी बड़ी वजह है. जब पौधों को समय पर पानी नहीं मिलता, तो मिट्टी में मौजूद नमक और ज्यादा सघन हो जाता है. मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों की कमी भी इस समस्या को बढ़ा सकती है. लगातार रासायनिक खादों का असंतुलित प्रयोग भी पेड़ों की जड़ों को कमजोर कर देता है.
कैसे पहचानें सर्प बर्न के लक्षण?
इस समस्या के लक्षण सबसे पहले पत्तियों के किनारों पर दिखाई देते हैं. पत्तियों का बाहरी हिस्सा धीरे-धीरे सूखने लगता है और उसका रंग हल्के भूरे से गहरे भूरे में बदल जाता है. ऐसा लगता है जैसे पत्तियां किनारों से जल गई हों.
प्रभावित पत्तियां मुरझाई हुई और झुलसी हुई दिखाई देती हैं. समय के साथ उनका आकार छोटा रह जाता है और वे सामान्य हरी पत्तियों की तरह चमकदार नहीं दिखतीं. जब स्थिति गंभीर हो जाती है, तो पत्तियां समय से पहले गिरने लगती हैं.
पत्तियों की क्षति का सीधा असर प्रकाश संश्लेषण पर पड़ता है. जब पत्तियां सही तरीके से धूप को अवशोषित नहीं कर पातीं, तो पौधे की बढ़वार धीमी हो जाती है. इससे फूल और फल बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है और अंत में उत्पादन घट सकता है.
सर्प बर्न से कैसे बचाएं आम का बाग?
सबसे जरूरी है सही और नियमित सिंचाई. गर्मियों में मिट्टी को पूरी तरह सूखने न दें. समय-समय पर पर्याप्त मात्रा में पानी देने से मिट्टी में जमा नमक नीचे की ओर धुल जाता है और जड़ों को राहत मिलती है.
लीचिंग तकनीक अपनाना भी फायदेमंद है. इसमें कम नमक वाले पानी से गहरी सिंचाई की जाती है, जिससे जड़ों के आसपास जमा लवण नीचे की परतों में चले जाते हैं. इससे मिट्टी का संतुलन बेहतर होता है.
सिंचाई के पानी की जांच कराना भी जरूरी है. अगर पानी में नमक की मात्रा अधिक है, तो उसका विकल्प तलाशना चाहिए. वर्षा जल का संचयन करके उसे सिंचाई में उपयोग करना एक अच्छा उपाय है. जरूरत हो तो पानी को फिल्टर या शुद्ध करके भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
मिट्टी की जांच कराकर उसमें मैग्नीशियम और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करें. जैविक खाद और गोबर की खाद का उपयोग मिट्टी की संरचना सुधारने में मदद करता है और लवणता के प्रभाव को कम करता है.
ऐसे रूटस्टॉक या पौधों का चयन करना भी लाभकारी होता है, जो हल्की लवणीय मिट्टी को सहन कर सकें. नए बाग लगाते समय मिट्टी की गुणवत्ता का परीक्षण जरूर कराएं.
समय पर देखभाल से सुरक्षित रहेगी फसल
सर्प बर्न कोई लाइलाज बीमारी नहीं है. यह एक चेतावनी है कि मिट्टी और पानी की स्थिति में सुधार की जरूरत है. अगर किसान समय रहते लक्षण पहचान लें और सही कदम उठाएं, तो आम के पेड़ स्वस्थ रह सकते हैं और अच्छी पैदावार दे सकते हैं.