Tip Of The Day: ये रोग बर्बाद कर देगा पूरी फसल, कृषि विभाग ने बताए बचाव के असरदार तरीके
Papaya Disease Control: पपीते में एन्थ्रेक्नोज एक फफूंद जनित रोग है, जो फलों और पत्तियों दोनों को नुकसान पहुंचाता है. इससे फलों पर धंसे हुए काले-गुलाबी धब्बे दिखाई देते हैं और पत्तियां किनारों से सूखकर गिरने लगती हैं, जिससे पौधे की वृद्धि और उत्पादन प्रभावित हो सकती है.
Papaya Farming Tips: पपीता एक बहुत ही लाभदायक फल की फसल है, लेकिन इसकी खेती में कई तरह की बीमारियां लग सकती हैं, जो फसल की पैदावार और गुणवत्ता को खराब कर देती हैं. इन्हीं में से एक प्रमुख बीमारी है एन्थ्रेक्नोज (Anthracnose). बागवानी निदेशालय, पंचकुला (हरियाणा) के अनुसार यह रोग पपीते के पौधे और फलों दोनों को नुकसान पहुंचाता है. अगर समय पर इसकी पहचान और इलाज न किया जाए, तो यह पूरी फसल को खराब कर सकता है.
एन्थ्रेक्नोज रोग क्या है?
एन्थ्रेक्नोज एक फफूंद (fungus) से फैलने वाला रोग है, जो पपीते के पौधों और खासकर फलों को नुकसान पहुंचाता है. यह बीमारी फलों को किसी भी अवस्था में प्रभावित कर सकती है चाहे फल कच्चा हो या पकने के करीब हो. इस रोग के असर से फलों पर छोटे-छोटे धंसे हुए काले या भूरे धब्बे बनने लगते हैं. जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, इन धब्बों के ऊपर गुलाबी रंग के फफूंद के छोटे-छोटे बिंदु दिखाई देने लगते हैं. ये लक्षण इस बात का संकेत होते हैं कि रोग काफी फैल चुका है और तुरंत नियंत्रण जरूरी है.
पौधों पर प्रभाव
यह बीमारी सिर्फ फलों तक ही सीमित नहीं रहती, बल्कि पपीते के पौधे की पत्तियों को भी नुकसान पहुंचाती है. संक्रमित पौधों की पत्तियां धीरे-धीरे किनारों से सूखने लगती हैं और बाद में झड़ जाती हैं. इससे पौधे की बढ़त रुक जाती है और उसकी फल देने की क्षमता भी कम हो जाती है. अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो पूरा पौधा कमजोर पड़ जाता है और पूरी फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है.
एन्थ्रेक्नोज रोग के नुकसान
- फलों की गुणवत्ता खराब हो जाती है
- बाजार में फलों का मूल्य कम हो जाता है
- उत्पादन में भारी गिरावट आती है
- पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है
- पूरी फसल नष्ट होने का खतरा बढ़ जाता है
पपीता रोग नियन्त्रण :-
एन्थ्रेक्नोज
एन्थ्रेक्नोज रोग के प्रकोप से फल किसी भी अवस्था में प्रभावित हो जाते हैं। फलों पर ये धब्बे अन्दर की तरफ धंसे हुए दिखाई पड़ते हैं व धब्बों पर फफूंद के गुलाबी रंग के बिन्दु दिखाई देते हैं।प्रभाव:-
रोगग्रस्त पौधों के पत्ते किनारों से झड़ने… pic.twitter.com/5zFLtntyR9— Directorate of Horticulture, panchkula, Haryana (@horticulturehry) May 4, 2026
रोकथाम के प्रभावी उपाय
इस रोग को नियंत्रित करने के लिए शुरुआती चरण में ही उचित कदम उठाना बहुत जरूरी है.
- संक्रमित फलों को नष्ट करें: जैसे ही खेत में संक्रमित फल दिखाई दें, उन्हें तुरंत तोड़कर नष्ट कर देना चाहिए. इन्हें खेत में छोड़ने से रोग और तेजी से फैल सकता है.
- फफूंदनाशक का छिड़काव: रोग के नियंत्रण के लिए निम्न दवाओं का उपयोग किया जा सकता है:
- Captan
- Dithane M-45 (Indofil M-45)
इनका उपयोग 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर किया जाता है.
(यानि 100 लीटर पानी में 200 ग्राम दवा मिलाएं)
छिड़काव का सही समय
फसल को सुरक्षित रखने के लिए इन दवाओं का छिड़काव हर 15 दिन के अंतराल पर करना चाहिए. नियमित छिड़काव से रोग को फैलने से रोका जा सकता है और पौधों को स्वस्थ रखा जा सकता है.
एन्थ्रेक्नोज पपीते की एक गंभीर बीमारी है, लेकिन सही जानकारी और समय पर उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है. खेत की नियमित निगरानी, संक्रमित हिस्सों का नाश और फफूंदनाशकों का सही उपयोग करके किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.