पपीता उगाने पर बिहार सरकार देगी 45 हजार तक अनुदान, इन 22 जिलों में लागू हुई योजना

बिहार सरकार ने राज्य के 22 जिलों में पपीता की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष अनुदान योजना शुरू करने का फैसला किया है. इस योजना के तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर 45 हजार रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाएगी, ताकि वे पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी की ओर भी कदम बढ़ा सकें.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 19 Jan, 2026 | 07:32 AM

Bihar papaya subsidy: बिहार में खेती को लाभ का सौदा बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार नए कदम उठा रही है. इसी कड़ी में अब पपीता की खेती करने वाले किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है. बिहार सरकार ने राज्य के 22 जिलों में पपीता की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष अनुदान योजना शुरू करने का फैसला किया है. इस योजना के तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर 45 हजार रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाएगी, ताकि वे पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी की ओर भी कदम बढ़ा सकें.

राज्य सरकार का मानना है कि पपीता जैसी फसलों से किसानों को कम समय में बेहतर आमदनी मिल सकती है. यही वजह है कि बागवानी को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से यह योजना लागू की जा रही है.

दो साल तक लागू रहेगी योजना

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह योजना “समेकित बागवानी विकास मिशन” के तहत चलाई जाएगी. इसे वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2026-27 तक लागू करने का फैसला लिया गया है. सरकार का उद्देश्य इन दो वर्षों में पपीता की खेती का रकबा बढ़ाना, उत्पादन में सुधार करना और किसानों को बाजार से बेहतर दाम दिलाना है. अधिकारियों के मुताबिक, पपीता की मांग बाजार में लगातार बनी रहती है और इसकी खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है.

खेती की लागत और अनुदान का गणित

पपीता क्षेत्र विस्तार योजना के तहत एक हेक्टेयर में खेती की कुल लागत 75 हजार रुपये तय की गई है. इसमें से 60 प्रतिशत राशि सरकार अनुदान के रूप में देगी. केंद्र सरकार की ओर से 40 प्रतिशत और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त 20 प्रतिशत सहायता मिलेगी. इस तरह किसानों को कुल 45 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक की मदद मिलेगी.

यह राशि एक साथ नहीं, बल्कि दो चरणों में किसानों के खाते में पहुंचेगी. पहले साल 27 हजार रुपये और दूसरे साल 18 हजार रुपये दिए जाएंगे. इससे किसानों को खेती की शुरुआती लागत निकालने में आसानी होगी और वे बिना ज्यादा जोखिम के पपीता की खेती शुरू कर सकेंगे.

खेती के लिए तय किए गए तकनीकी नियम

योजना के तहत पपीता की खेती को वैज्ञानिक तरीके से करने पर जोर दिया गया है. प्रति हेक्टेयर करीब 2,500 पौधे लगाए जाएंगे. पौधों के बीच की दूरी लगभग 2.2 मीटर रखी जाएगी, ताकि पौधों को पर्याप्त जगह और पोषण मिल सके. इससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर होने की उम्मीद है.

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस योजना का लाभ वही किसान ले सकेंगे, जिनके पास कम से कम 0.25 एकड़ जमीन हो. अधिकतम सीमा 5 एकड़ तय की गई है. इससे छोटे और मध्यम किसानों को खास तौर पर फायदा मिलेगा.

इन जिलों में मिलेगी योजना की सुविधा

पपीता अनुदान योजना राज्य के 22 जिलों में लागू की जाएगी. इनमें भोजपुर, बक्सर, गोपालगंज, जहानाबाद, लखीसराय, मधेपुरा, बेगूसराय, भागलपुर, दरभंगा, गया, कटिहार, खगड़िया, मुजफ्फरपुर, नालंदा, पश्चिम चंपारण, पटना, पूर्वी चंपारण, पूर्णिया, सहरसा, समस्तीपुर, मधुबनी और वैशाली शामिल हैं. इन जिलों में जलवायु और मिट्टी पपीता की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है.

किसानों की आय बढ़ाने की उम्मीद

राज्य के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा है कि यह योजना बिहार की बागवानी को नई दिशा देगी. पपीता जैसी फसलों से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों की आमदनी में भी साफ इजाफा होगा. सरकार को उम्मीद है कि आने वाले समय में किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ फल और सब्जी उत्पादन की ओर भी तेजी से बढ़ेंगे.

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Published: 19 Jan, 2026 | 07:30 AM

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