जनवरी में भिंडी की अगेती खेती बना सकती है किसान को लखपति, कम खर्च में मिलेगा बंपर मुनाफा

जब बाजार में सब्जियों की आवक कम होती है, उसी समय अगेती भिंडी खेत से निकलकर मंडी पहुंचती है और अच्छे दाम दिलाती है. सही समय पर बुवाई, थोड़ी समझदारी और नियमित देखभाल इस फसल को मुनाफे का मजबूत जरिया बना सकती है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 15 Jan, 2026 | 10:09 AM

Okra farming: जनवरी का महीना आमतौर पर ठंड और सुस्ती से जोड़ा जाता है, लेकिन समझदार किसानों के लिए यही समय कम लागत में ज्यादा कमाई का रास्ता भी खोल देता है. खास तौर पर अगेती भिंडी की खेती उन किसानों के लिए किसी मौके से कम नहीं है, जो जल्दी नकद आमदनी चाहते हैं. जब बाजार में सब्जियों की आवक कम होती है, उसी समय अगेती भिंडी खेत से निकलकर मंडी पहुंचती है और अच्छे दाम दिलाती है. सही समय पर बुवाई, थोड़ी समझदारी और नियमित देखभाल इस फसल को मुनाफे का मजबूत जरिया बना सकती है.

अगेती भिंडी क्यों है खास

अगेती भिंडी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सामान्य सीजन से पहले तैयार हो जाती है. जनवरी के आखिर से फरवरी के मध्य तक बोई गई भिंडी तेजी से बढ़ती है और करीब 40 से 50 दिनों में पहली तुड़ाई देने लगती है. इस समय बाजार में भिंडी की कमी रहती है, इसलिए दाम सामान्य से कहीं ज्यादा मिलते हैं. यही वजह है कि अगेती भिंडी को कम समय में ज्यादा कमाई वाली फसल माना जाता है. हालांकि जनवरी की शुरुआत में बहुत ज्यादा ठंड और पाले की आशंका रहती है, इसलिए बुवाई का सही समय चुनना बेहद जरूरी होता है.

खेत और मिट्टी की सही तैयारी

अगेती भिंडी की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी सबसे अहम कदम है. खेत की मिट्टी हल्की, भुरभुरी और उपजाऊ होनी चाहिए, ताकि जड़ें आसानी से फैल सकें. गहरी जुताई करने के बाद अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट मिलाने से मिट्टी में जान आ जाती है. इससे पौधे मजबूत बनते हैं और उत्पादन भी बेहतर होता है. संतुलित मात्रा में फास्फोरस और पोटाश देने से फूल और फल अच्छी संख्या में आते हैं, जबकि जरूरत पड़ने पर नाइट्रोजन की थोड़ी-थोड़ी मात्रा पौधों को हरा-भरा बनाए रखती है.

सिंचाई और देखभाल से बढ़ेगा उत्पादन

सर्दियों में भिंडी की फसल को जरूरत से ज्यादा पानी देना नुकसानदायक हो सकता है. ज्यादा नमी से जड़ सड़न जैसी समस्या आ सकती है, इसलिए हल्की लेकिन नियमित सिंचाई सबसे बेहतर रहती है. जैसे-जैसे मौसम गर्म होने लगे, पानी की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाई जा सकती है. शुरुआती दिनों में निराई-गुड़ाई पर खास ध्यान देना चाहिए, ताकि खरपतवार पोषण न छीन सकें और पौधों को पूरा फायदा मिले.

कम लागत, ज्यादा मुनाफा

अगर खर्च की बात करें तो एक एकड़ में अगेती भिंडी की खेती पर करीब 40 से 60 हजार रुपये तक की लागत आती है. वहीं सही देखभाल और अच्छे बाजार भाव मिलने पर एक एकड़ से लाखों रुपये तक की कमाई संभव है. यही वजह है कि अगेती भिंडी आज किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. सही योजना और मेहनत के साथ जनवरी में शुरू की गई यह खेती किसानों की आमदनी को नई रफ्तार दे सकती है.

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