जनवरी में अगेती भिंडी की खेती से बदल सकती है किस्मत, कम समय में एक एकड़ से लाखों की कमाई

जनवरी का महीना किसानों के लिए कमाई बढ़ाने का बेहतरीन मौका लेकर आता है. अगेती भिंडी की खेती कम समय में तैयार होकर बाजार पहुंचती है, जब दाम ज्यादा मिलते हैं. सही समय, सही विधि और देखभाल से यह फसल किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 11 Jan, 2026 | 12:21 PM

Bhindi Farming: नए साल की ठंडी सुबह में खेतों पर जमी ओस सिर्फ मौसम की कहानी नहीं कहती, बल्कि समझदार किसानों के लिए कमाई का संकेत भी देती है. जनवरी का महीना अगेती भिंडी की खेती शुरू करने का सबसे बेहतर समय माना जाता है. वजह साफ है-जब बाजार में भिंडी कम होती है, उसी वक्त यह फसल तैयार होकर मंडी पहुंचती है और दाम आसमान छूते हैं. सही तरीके से खेती की जाए, तो एक एकड़ से लाख रुपये तक की आमदनी कोई बड़ी बात नहीं है.

बुवाई का सही समय और फायदा

अगेती भिंडी  की सबसे बड़ी ताकत इसका समय है. जनवरी के आखिर से फरवरी के मध्य तक बुवाई करने पर फसल तेजी से बढ़ती है और 40 से 50 दिनों में तुड़ाई शुरू हो जाती है. इस दौरान बाजार में भिंडी की आवक कम रहती है, जिससे किसानों को अच्छा भाव मिलता है. बहुत ज्यादा ठंड और पाले से बचने के लिए जनवरी के अंतिम सप्ताह के बाद ही बुवाई करना ज्यादा सुरक्षित रहता है. सही समय पर बोआई करने से पौधों की बढ़वार  अच्छी होती है और उत्पादन लंबा चलता है.

खेत की तैयारी और खाद प्रबंधन

भिंडी की फसल  लंबे समय तक फल देती है, इसलिए खेत की तैयारी में लापरवाही भारी पड़ सकती है. सबसे पहले खेत की गहरी जुताई करें और उसमें अच्छी तरह सड़ा हुआ गोबर खाद या वर्मी कंपोस्ट मिलाएं. इससे मिट्टी भुरभुरी होती है और जड़ों को ताकत मिलती है. संतुलित पोषण  के लिए फास्फोरस, पोटाश और जरूरत के अनुसार नाइट्रोजन का इस्तेमाल फायदेमंद रहता है. अच्छी तैयारी से फसल 6 से 8 महीने तक लगातार उत्पादन दे सकती है.

उन्नत किस्में और बोआई की विधि

अच्छी पैदावार के लिए उन्नत हाइब्रिड किस्मों  का चयन बहुत जरूरी है. आजकल बाजार में ऐसी किस्में उपलब्ध हैं जो जल्दी तैयार होती हैं और फल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है. बोआई के लिए रिज एंड फर्रो यानी मेड पद्धति सबसे सफल मानी जाती है. इसमें तय दूरी पर मेड बनाकर बीज बोए जाते हैं, जिससे जल निकास अच्छा रहता है और पौधे स्वस्थ  रहते हैं. प्रति एकड़ सीमित मात्रा में बीज पर्याप्त होता है, इससे लागत भी काबू में रहती है.

रोग-कीट नियंत्रण और कमाई का गणित

भिंडी की खेती  में जड़ की गांठ और कीट सबसे बड़ी समस्या बन सकते हैं. शुरुआत में ही सही दवाओं का इस्तेमाल करने से इनका खतरा काफी कम हो जाता है. साथ ही खरपतवार नियंत्रण पर ध्यान देना भी जरूरी है, ताकि पौधों को पूरा पोषण  मिल सके. अगर फसल की देखभाल सही तरीके से की जाए, तो जब यह मंडी पहुंचती है, तब 70 से 100 रुपये प्रति किलो तक का भाव मिल सकता है. इसी वजह से अगेती भिंडी की खेती किसानों के लिए कम समय में ज्यादा मुनाफा देने वाला विकल्प बन

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