केंद्र सरकार खेती में खतरनाक केमिकल इस्तेमाल को घटाने के साथ ही घटिया, नकली पेस्टीसाइड निर्माण और बिक्री रोकने पर तेज गति से काम कर रही है और इसीलिए पेस्टीसाइड एक्ट में बदलाव किया जा रहा है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पेस्टीसाइड मैनेजमेंट बिल (Pesticides Management Bill 2026 ) अगले संसद सत्र में लाया जाएगा. पहले मॉनसून सत्र में इसे पेश किए जाने की बात कही गई थी. लेकिन, ऐसा नहीं हो सका. कहा जा रहा है कि किसानों और इंडस्ट्री के सुझावों और आपत्तियों का रिव्यू समेत बिल का काम लगभग अंतिम चरण में है. अब अगला संसद का शीतकालीन सत्र नवंबर के आखिरी सप्ताह से दिसंबर 2026 तक चलने की संभावना है. यानी दिसंबर में ही 58 साल से लागू पुराने पेस्टीसाइड निर्माण और बिक्री संबंधी नियम बदले जा सकेंगे.
इस कानून का मकसद 58 साल पुराने इंसेक्टिसाइड्स एक्ट 1968 और इंसेक्टिसाइड्स रूल्स 1971 को बदलना है. क्योंकि, मौजूदा कानून में उल्लंघन करने वाली कंपनियों या लोगों पर ज्यादा सजा और जुर्माने का प्रावधान नहीं है. सरकार चाहती है कि नकली और घटिया कीटनाशकों पर पूरी तरह से रोकथाम लगाई जा सके.
कृषि मंत्री ने कहा – अगले सत्र में लाएंगे नया कानून
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज चौहान ने बीते दिन राजस्थान के बारां में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि संसद के अगले सत्र में देश में नकली कीटनाशक और पेस्टीसाइड बनाने वालों के खिलाफ नया कानून लाया जाएगा. इस कानून से खाद-बीज में बेईमानी करने वालों लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो सकेंगी. उन्होंने कहा कि मौजूदा 1968 का कानून अभी मिलावट करने वालों के खिलाफ कारगर नहीं है, इसलिए भारत सरकार ने यह नया फैसला लिया है.
20 जुलाई से 13 अगस्त तक संसद का मॉनसून सत्र चला है. अब अगला संसद का शीतकालीन सत्र होगा, जो नवंबर के आखिरी सप्ताह से दिसंबर 2026 तक चलने की संभावना है. यानी दिसंबर में ही 58 साल से लागू पुराने पेस्टीसाइड निर्माण और बिक्री संबंधी नियम बदले जा सकेंगे.
कृषि मंत्रालय को किसानों, इंडस्ट्री के सुझाव-आपत्तियां मिलीं
कृषि मंत्रालय ने पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल 2026 का ड्राफ्ट फरवरी 2026 में जारी किया था और मंत्रालय ने किसान संगठनों, इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स से आपत्तियां और सुझाव मांगे थे. सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि बिल पर आपत्तियों और सुझावों का रिव्यू किया जा रहा है. इसके अलावा भी नियमों में कुछ बदलावों पर काम जारी होने के चलते बिल की प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में बताई जा रही है. सरकार शीतकालीन सत्र में यह पेस्टीसाइड बिल पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार रहेगी.
40 लाख रुपये तक जुर्माना और 5 साल जेल का प्रावधान
नए कानून में सजा और जुर्माने के प्रावधान काफी सख्त रखने की बात कही गई है. अगर कोई व्यक्ति खतरनाक या गैर-मानक कीटनाशक बनाता या बेचता है, तो उसे 5 साल तक की जेल और 40 लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है. यदि किसी कीटनाशक के इस्तेमाल से किसी की मौत होती है और वह तय मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. बार-बार नियम तोड़ने पर जुर्माना बढ़ाया जाएगा और तीसरी बार गलती होने पर कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा. कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी भी इसके लिए उत्तरदायी होंगे.
कीटनाशकों पर निगरानी और किसानों को ट्रेनिंग मिलेगी
नए कानून में तकनीक का खास उपयोग किया जाएगा. इसके तहत सभी तरह के कीटनाशकों को एक डिजिटल सिस्टम में दर्ज करना जरूरी होगा. देश में बनने वाले और विदेश से आने वाले हर पेस्टीसाइड को सरकार के डैशबोर्ड पर रजिस्टर करना पड़ेगा. इससे निगरानी आसान हो जाएगी. सरकार इस नए बिल के जरिए किसानों को भी सुरक्षित खेती के लिए तैयार करना चाहती है. इसके तहत किसानों को सही तरीके से दवा छिड़कने की ट्रेनिंग दी जाएगी. साथ ही उन्हें सुरक्षा उपकरण यानी प्रोटेक्शन गियर के इस्तेमाल के लिए भी जागरूक किया जाएगा. रिटेलर्स के लिए भी नियम तय किए जाएंगे, ताकि वे केवल मानक के अनुरूप उत्पाद ही बेचें.