पॉलीहाउस में जरबेरा की खेती से कमाल की कमाई, एक बार पौधे लगाएं और 3-4 साल तक लगातार फूल पाएं

जरबेरा की खेती आज किसानों के लिए कम क्षेत्र में ज्यादा कमाई का बेहतर विकल्प बन रही है. पॉलीहाउस में इसकी खेती से कई वर्षों तक लगातार उत्पादन मिलता है और बाजार में सालभर मांग बनी रहती है. जानिए इसकी खेती का तरीका, लागत, उत्पादन, बाजार और सफल खेती के जरूरी सुझाव.

नोएडा | Updated On: 6 Jul, 2026 | 07:16 PM

Gerbera Farming: अगर आप ऐसी खेती करना चाहते हैं, जिसमें कम जगह से बेहतर आमदनी हो और एक बार पौधे लगाने के बाद कई साल तक उत्पादन मिलता रहे, तो पॉलीहाउस में जरबेरा (Gerbera) की खेती बेहतरीन विकल्प बन सकती है. शादी-विवाह, होटल, धार्मिक आयोजनों, बुके और इवेंट डेकोरेशन में इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है. यही वजह है कि देशभर में कई किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर फ्लोरीकल्चर की ओर रुख कर रहे हैं. NHRDF के संयुक्त निदेशक डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, जरबेरा एक उच्च मूल्य का कट-फ्लॉवर है. यदि किसान प्रमाणित पौधे, नियंत्रित वातावरण और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाएं, तो लगातार कई वर्षों तक गुणवत्तापूर्ण फूलों का उत्पादन लेकर अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं.

पॉलीहाउस में क्यों सफल होती है जरबेरा की खेती?

जरबेरा की खेती खुले खेत में भी संभव है, लेकिन व्यावसायिक स्तर पर पॉलीहाउस  सबसे उपयुक्त माना जाता है. यहां तापमान, नमी और रोशनी नियंत्रित रहती है, जिससे फूलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर होते हैं. इसके लिए 18-25 डिग्री सेल्सियस तापमान, अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी और 5.5 से 6.5 pH वाली भूमि सबसे उपयुक्त मानी जाती है. रोपाई से पहले मिट्टी का उपचार (Soil Sterilization) करना जरूरी होता है, ताकि फफूंद और मिट्टी जनित रोगों का खतरा कम हो. विशेषज्ञ टिश्यू कल्चर से तैयार प्रमाणित पौधों का ही उपयोग करने की सलाह देते हैं. पौधों की कीमत आमतौर पर 20 से 50 रुपये के बीच होती है.

एक बार रोपाई, 3-4 साल तक उत्पादन

पॉलीहाउस में उठी हुई क्यारियों (Raised Beds) पर पौधे लगाए जाते हैं और सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम  सबसे बेहतर माना जाता है. कतारों के बीच लगभग 35 से 40 सेंटीमीटर की दूरी रखी जाती है. रोपाई के करीब 70 से 90 दिन बाद फूल आना शुरू हो जाते हैं. एक स्वस्थ पौधा लगभग 3 से 4 वर्षों तक व्यावसायिक उत्पादन देता है और सालभर में औसतन 35 से 50 फूल दे सकता है. डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, जरबेरा की खेती में रोजाना निगरानी बेहद जरूरी है. पीली पत्तियां, रोगग्रस्त हिस्से और कीटों का समय रहते नियंत्रण करने से पौधे लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं और फूलों की गुणवत्ता बनी रहती है.

लागत ज्यादा, लेकिन कमाई भी बेहतर

जरबेरा की खेती  की शुरुआती लागत अपेक्षाकृत अधिक होती है क्योंकि पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई, पौधे, बेड तैयार करने और उर्वरकों पर अच्छा निवेश करना पड़ता है. एक एकड़ पॉलीहाउस स्थापित करने में लाखों रुपये का खर्च आ सकता है. हालांकि केंद्र और राज्य सरकारें मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) जैसी योजनाओं के तहत पॉलीहाउस निर्माण पर सब्सिडी भी उपलब्ध कराती हैं.

बाजार की मांग और सफल खेती के जरूरी सुझाव

जरबेरा के फूल सामान्य दिनों में किसानों को लगभग 3 से 8 रुपये प्रति फूल तक का भाव दिला सकते हैं. वहीं शादी के सीजन, वेलेंटाइन डे, मदर्स डे और नए साल जैसे अवसरों पर कीमत 10 से 20 रुपये प्रति फूल या इससे अधिक भी मिल सकती है. यदि किसान सीधे फ्लोरिस्ट, होटल, इवेंट कंपनियों या फूल मंडियों से जुड़कर बिक्री करें, तो मुनाफा और बढ़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि खेती शुरू करने से पहले स्थानीय बाजार की मांग का अध्ययन जरूर करें. साथ ही प्रमाणित पौधे खरीदें, पॉलीहाउस का तापमान नियंत्रित रखें, ड्रिप सिंचाई और फर्टिगेशन अपनाएं तथा समय पर फूलों की तुड़ाई करें. वैज्ञानिक तरीके से की गई जरबेरा की खेती किसानों के लिए लंबे समय तक नियमित और बेहतर आय का मजबूत स्रोत बन सकती है.

Published: 6 Jul, 2026 | 11:30 PM

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