Polyhouse Subsidy: आजकल मौसम का मिजाज कब बदल जाए, कोई भरोसा नहीं. कभी तेज बारिश, कभी ओले, तो कभी झुलसा देने वाली गर्मी-किसानों की मेहनत पलभर में खराब हो जाती है. ऐसे हालात में अब सुरक्षित या संरक्षित खेती किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है. अच्छी बात यह है कि मध्य प्रदेश सरकार इस आधुनिक खेती तरीके पर 50 फीसदी तक सब्सिडी दे रही है, ताकि किसान कम जोखिम में ज्यादा मुनाफा कमा सकें.
क्या है संरक्षित खेती और क्यों है जरूरी?
मध्य प्रदेश में संरक्षित खेती का मतलब है फसल को खुले खेत की बजाय एक ढांचे के अंदर उगाना, जैसे पॉली हाउस या शेडनेट हाउस. इससे फसल पर सीधे धूप, बारिश, ओले या पाला का असर कम पड़ता है. इस तरीके से सब्जी और फूलों की खेती करने पर पैदावार ज्यादा और गुणवत्ता बेहतर मिलती है. बाजार में ऐसी फसल के अच्छे दाम भी मिलते हैं. बदलते मौसम को देखते हुए यह तरीका किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प बन रहा है.
पॉली हाउस पर आधी लागत दे रही सरकार
अगर मध्य प्रदेश के किसान पॉली हाउस बनाना चाहते हैं, तो सरकार इसकी लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा दे रही है. अलग-अलग आकार के हिसाब से लागत तय की गई है.
- 500 से 1008 वर्ग मीटर तक के पॉली हाउस के लिए 935 रुपये प्रति वर्ग मीटर लागत मानी गई है.
- 1008 से 2080 वर्ग मीटर तक 890 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय है.
- 2080 से 4000 वर्ग मीटर तक 844 रुपये प्रति वर्ग मीटर लागत मानी गई है.
इन सभी पर आधा पैसा सरकार देगी. इससे किसानों का शुरुआती खर्च काफी कम हो जाएगा और वे कम जोखिम में ज्यादा उत्पादन ले सकेंगे.
शेडनेट हाउस और प्लास्टिक मल्चिंग का फायदा
शेडनेट हाउस के अंदर फसल को तेज धूप, बारिश और ओलों से बचाया जा सकता है. इसके लिए 710 रुपये प्रति वर्ग मीटर लागत तय की गई है और इस पर भी 50 प्रतिशत अनुदान मिलेगा. अधिकतम 4000 वर्ग मीटर तक इसका लाभ लिया जा सकता है. इसके अलावा प्लास्टिक मल्चिंग पर भी आर्थिक मदद दी जा रही है. इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है, खरपतवार कम उगते हैं और पानी की बचत होती है. इसकी लागत 0.32 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर मानी गई है और इस पर भी आधी रकम सरकार दे रही है. अधिकतम दो हेक्टेयर तक इसका लाभ मिलेगा.
अच्छी पौध पर भी सब्सिडी, ऐसे करें आवेदन
अगर किसान पॉली हाउस में बेहतर किस्म की सब्जी या फूलों की पौध लगाना चाहते हैं, तो उस पर भी सहायता मिलेगी. 4000 वर्ग मीटर तक 140 रुपये प्रति वर्ग मीटर की लागत तय है और इस पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा. आवेदन के लिए किसानों को अपने जिले के उद्यानिकी कार्यालय में संपर्क करना होगा. जरूरी कागजात में आधार कार्ड, खेत का खसरा या बी-1 की प्रति, बैंक पासबुक की कॉपी, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो और आधार से लिंक मोबाइल नंबर शामिल हैं.