Duck Farming: मैथिली बत्तख पालन से बढ़ेगी गांव की कमाई, कम खर्च में अंडा और मांस दोनों से फायदा

पूर्वी इलाकों में पाई जाने वाली मैथिली बत्तख अब किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बन रही है. यह कम देखभाल में आसानी से पलती है और अंडा व मांस दोनों से आय देती है. छोटे किसान और महिला समूह इसे अपनाकर कम लागत में नियमित कमाई कर सकते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 21 Feb, 2026 | 11:59 AM

Maithili Duck: गांव के तालाब किनारे सुबह-सुबह तैरती बत्तखों का झुंड अब सिर्फ एक खूबसूरत नजारा नहीं, बल्कि कमाई का मजबूत जरिया बनता जा रहा है. खासकर पूर्वी इलाकों में पाई जाने वाली मैथिली बत्तख आज छोटे किसानों और महिला समूहों के लिए उम्मीद की नई किरण बन रही है. कम खर्च, कम देखभाल और दोहरा फायदा-अंडा भी और मांस भी-यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है.

स्थानीय मौसम में ढली, कम देखभाल में पले

मैथिली बत्तख की सबसे बड़ी ताकत है कि यह स्थानीय जलवायु के हिसाब से खुद को आसानी से ढाल लेती है. ज्यादा गर्मी हो या बरसात, इसे ज्यादा परेशानी नहीं होती. गांवों में जहां तालाब, पोखर  या खेतों में पानी भरा रहता है, वहां इसका पालन और भी आसान हो जाता है. इन्हें महंगे शेड या खास इंतजाम की जरूरत नहीं पड़ती. साधारण बांस या टीन की छत के नीचे भी इन्हें रखा जा सकता है. बीमारियां भी कम लगती हैं, इसलिए दवा पर ज्यादा खर्च नहीं आता. यही वजह है कि कम पूंजी वाले किसान भी इसे आसानी से शुरू कर सकते हैं.

अंडा और मांस दोनों से कमाई

मैथिली बत्तख को दोहरे फायदे वाली नस्ल माना जाता है. यह सालभर में अच्छी संख्या में अंडे देती है. ग्रामीण बाजारों में बत्तख के अंडों  की मांग लगातार बढ़ रही है, क्योंकि लोग इसे सेहत के लिए फायदेमंद मानते हैं. इसके साथ-साथ इसका मांस भी बाजार में अच्छे दाम पर बिकता है. त्योहारों और खास मौकों पर इसकी मांग और बढ़ जाती है. अगर कोई किसान 20 से 25 बत्तखों से शुरुआत करे, तो कुछ ही महीनों में उसे नियमित आमदनी मिलने लगती है. धीरे-धीरे संख्या बढ़ाकर कमाई को दोगुना किया जा सकता है.

महिला समूहों के लिए सुनहरा मौका

गांवों में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं अब बत्तख पालन  की ओर तेजी से बढ़ रही हैं. इसका कारण साफ है-कम मेहनत और नियमित आमदनी. घर के आसपास ही पालन संभव है, इसलिए महिलाओं को बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती. सुबह-शाम दाना देना और साफ पानी की व्यवस्था करना ही मुख्य काम है. कई जगहों पर महिलाएं मिलकर छोटे स्तर पर पालन शुरू कर रही हैं और अंडों की बिक्री से हर महीने अच्छी कमाई कर रही हैं. इससे परिवार की आमदनी बढ़ रही है और आत्मनिर्भरता भी.

कम लागत, ज्यादा मुनाफा

मैथिली बत्तख पालन की सबसे खास बात है कि इसमें लागत कम और फायदा ज्यादा है. ये खेतों में कीड़े-मकोड़े और बचा-खुचा अनाज खाकर भी अपना पेट भर लेती हैं. इससे दाने पर खर्च कम हो जाता है. अगर पास में तालाब हो तो आधी जरूरत तो वहीं पूरी हो जाती है. बस साफ पानी और रात में सुरक्षित जगह का इंतजाम जरूरी है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सही देखभाल और समय पर टीकाकरण किया जाए तो यह व्यवसाय लंबे समय तक मुनाफा देता है. छोटे किसान इसे खेती के साथ जोड़कर अतिरिक्त आय का मजबूत साधन बना सकते हैं.

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