तमिलनाडु के धान किसानों की बढ़ीं मुश्किलें, अब 18 की जगह 14 घंटे मिलेगी बिजली.. कैसे होगी सिंचाई
तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा में कुरुवई धान की फसल जल संकट से जूझ रही है. भूजल स्तर गिरने, पानी में बढ़ती लवणता और मेट्टूर बांध से पानी नहीं छोड़े जाने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. सिंचाई के लिए बिजली आपूर्ति भी घटा दी गई है, जबकि विशेषज्ञों ने किसानों को सितंबर में सांबा धान की बुवाई की सलाह दी है.
Tamil Nadu News: तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा में कुरुवई धान की खेती करने वाले किसानों पर तीहरी मार पड़ी है. भूजल स्तर में तेज गिरावट, पानी में बढ़ती खारापन (लवणता) और मेट्टूर बांध से कावेरी का पानी नहीं छोड़े जाने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. भीषण गर्मी के कारण पानी तेजी से सूख रहा है, जिससे पापनासम और तिरुवैयारु क्षेत्रों के किसान अपनी खड़ी फसल बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इस बीच बिजली वितरण कंपनी टैंगेडको ने भी किसानों की चिंता बढ़ा दी है. कंपनी ने सिंचाई पंपों के लिए मिलने वाली 18 घंटे की मुफ्त बिजली घटाकर 14 घंटे कर दी है.
कृषि विभाग के अनुसार, थंजावुर जिले में करीब एक लाख एकड़ क्षेत्र में भूजल के सहारे कुरुवई धान की खेती की गई है. सामान्य वर्षों में किसान शुरुआत में भूजल से सिंचाई करते हैं और बाद में मेट्टूर बांध से कावेरी का पानी छोड़े जाने के बाद उसी पानी से फसल की सिंचाई करते हैं. इस बार बांध से पानी नहीं मिलने के कारण स्थिति गंभीर हो गई है. इस साल मेट्टूर बांध में पानी कम होने के कारण हर साल की तरह 12 जून को कावेरी का पानी नहीं छोड़ा जा सका. इससे हजारों किसान पूरी तरह भूजल के सहारे खेती करने को मजबूर हो गए हैं.
2,000 एकड़ की फसल की कटाई पूरी
पापनासम के किसान जी. श्रीनिवासन ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि तेज गर्मी की वजह से खेतों का पानी जल्दी सूख जाता है. उन्होंने कहा कि पिछले छह महीने से कावेरी नदी में पानी नहीं बह रहा है और भूजल स्तर भी लगातार नीचे जा रहा है. ऐसे में सिंचाई के लिए बिजली आपूर्ति कम किए जाने से किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. जानकारी के अनुसार, पापनासम ब्लॉक में करीब 8,400 एकड़ क्षेत्र में कुरुवई धान की खेती की गई है. इनमें से लगभग 2,000 एकड़ की फसल की कटाई पूरी हो चुकी है, जबकि बाकी फसल पानी की कमी से प्रभावित हो रही है.
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सिंचाई प्रभावित हो रही है
कावेरी डेल्टा के वेल्लम पेरंबूर, थेन पेरंबूर, अल्लूर अजीसिकुडी, पनावेली और आसपास के गांवों में किसानों को एक और बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. यहां भूजल में खारापन (लवणता) काफी बढ़ गया है, जिससे सिंचाई प्रभावित हो रही है. किसानों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में मेट्टूर बांध से समय पर पानी छोड़ा जाता था. इससे नहरों के जरिए भूजल का स्तर बढ़ता था और पानी का खारापन कम हो जाता था. लेकिन इस साल पानी नहीं छोड़े जाने से स्थिति और खराब हो गई है.
मेट्टूर बांध से पानी छोड़ने की मांग
किसानों ने सरकार से 3 अगस्त (आदि पेरुक्कु) से पहले कुछ दिनों के लिए मेट्टूर बांध से पानी छोड़ने की मांग की है. हालांकि, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बांध में इतना पानी नहीं है कि ऐसा किया जा सके. सीनियर एग्रो टेक्नोलॉजिस्ट फोरम के पी. कलैवानन के अनुसार, मेट्टूर बांध में इस समय करीब 35 टीएमसी (TMCft) पानी है, जबकि इसकी कुल क्षमता 93.47 टीएमसी है. ऐसे में अब अगस्त की बजाय सितंबर में पानी छोड़े जाने की संभावना अधिक है. उन्होंने सलाह दी कि किसान सितंबर में मानसून पर भरोसा करते हुए मध्यम अवधि वाली सांबा धान की सीधी बुवाई (Direct Sowing) कर सकते हैं.