पुलवामा में 375 एकड़ जमीन पर किसान नहीं उगा पाएंगे धान, बुवाई करने पर FIR.. भड़के अन्नदाता

पुलवामा में 3,000 कनाल सरकारी जमीन पर धान की खेती रोकने से विवाद बढ़ गया है. प्रशासन ने एफआईआर की चेतावनी दी, जबकि किसानों ने विरोध शुरू किया. PDP सहित कई नेताओं ने खेतों में उतरकर समर्थन जताया. किसानों का कहना है कि सदियों से वे इस जमीन पर खेती कर रहे हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 9 Jun, 2026 | 04:15 PM

Paddy Cultivation: दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में 3,000 कनाल (375 एकड़) सरकारी जमीन पर किसान धान की रोपाई नहीं कर पाएंगे. प्रशासन ने धान की बुवाई करने पर रोक लगा दी है. साथ ही आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की चेतावनी दी है. इससे कई गांवों के किसानों की कमाई पर असर पड़ेगा. हालांकि, किसानों  ने राज्य सरकार के इस फैसले का विरोध करना शुरू कर दिया है. वहीं, किसानों के समर्थन में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) भी उतर आई है. PDP के नेताओं और किसानों ने धान की रोपाई कर विरोध जताया.

स्थानीय किसान शबीर अहमद ने ‘मीडिया’ से बात करते हुए कहा कि भले ही यह सरकारी जमीन है, लेकिन कई दशकों से यहां धान की खेती हो रही है और चार गांवों के 1,000 से अधिक परिवार इसी पर निर्भर हैं. उन्होंने कहा कि इस वसंत में जब ग्रामीण रोपाई की तैयारी कर रहे थे, तभी तहसीलदार पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे और उन्हें खेती से रोक दिया. इतना ही नहीं, कुछ ग्रामीणों द्वारा पहले से लगाए गए पौधों को ट्रैक्टर से नष्ट भी कर दिया गया. साथ ही खेतों में जाने पर एफआईआर दर्ज  करने की चेतावनी दी गई. उन्होंने कहा कि यह जमीन पिछले 80 वर्षों से खेती के लिए उपयोग की जा रही है और इसी पर गांव के लोगों का जीवन और पशुधन निर्भर है.

किसानों की कमाई होगी प्रभावित

किसान शबीर अहमद ने कहा कि छोटे-छोटे 3-4 कनाल के खेतों में लोग अपने लिए धान उगाते हैं और पशुओं के लिए चारा भी तैयार करते हैं. उन्होंने कहा कि अगर सरकार यह जमीन अपने कब्जे में ले लेती है, तो इससे स्थानीय लोगों की आजीविका पर गंभीर असर  पड़ेगा. वहीं, किसानों के समर्थन में स्थानीय विधायक वहीद-उर-रहमान पर्रा ने भी खेतों में हल चलाकर धान की रोपाई की. उन्होंने इसे जमीन कब्जे और किसानों को बेदखल करने के खिलाफ एक प्रतीकात्मक विरोध बताया. पर्रा ने पदगामपोरा में उन्हीं खेतों में धान के पौधे लगाए, जहां तहसीलदार ने पुलिस कार्रवाई की चेतावनी दी थी.

2000 कनाल उपजाऊ कृषि भूमि

पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने भी किसानों के साथ जुड़ते हुए राजस्व विभाग  पर आरोप लगाया कि वह पुलवामा के डेंगरपोरा में करीब 2000 कनाल उपजाऊ कृषि भूमि गरीब परिवारों से छीनने की कोशिश कर रहा है, जहां लोग सदियों से खेती करते आ रहे हैं. पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि जम्मू में सिधरा डिमोलिशन की तरह ही जम्मू-कश्मीर सरकार भी पुलिस का इस्तेमाल कर इन कथित अवैध आदेशों को लागू कर रही है और विरोध करने वालों पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) लगाने की धमकी दी जा रही है. उन्होंने कहा कि कश्मीर की जमीन यहां के लोगों की है.

राजनीतिक मामलों में दखल न दे पुलिस

मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर पुलिस से अपील की कि वह राजनीतिक मामलों में दखल न दे. उन्होंने कहा कि PSA एक सख्त आतंकवाद-रोधी कानून है और इसे उन लोगों पर नहीं लगाया जाना चाहिए जो अपनी जमीन और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. पीडीपी के विरोध प्रदर्शन के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और पूर्व जिला विकास परिषद उपाध्यक्ष मुख्तार अहमद बंद ने भी पुलवामा के डेंगरपोरा और पदगामपोरा में धान के खेतों में हल चलाकर विरोध जताया.

 

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Published: 9 Jun, 2026 | 04:00 PM

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