फसल विविधीकरण को बढ़ावा दे रही सरकार, इस फसल की खेती करने पर फ्री में मिलेंगे 17500 रुपये
किसानों को डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) अपनाने पर प्रति एकड़ 1,500 रुपये की मदद दी जा रही है. यह तकनीक पारंपरिक धान रोपाई की तुलना में मजदूरी की जरूरत कम करती है और 15-19 फीसदी पानी बचाती है. वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार ने इस योजना पर 35 करोड़ रुपये खर्च किए.
Punjab Agriculture News: पंजाब में फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके लिए राज्य सरकार ने बजट 2026 में मोटी रकम का प्रावधान किया है. सरकार को उम्मीद है कि इससे फसल विविधीकरण अपनाने वाले किसानों को ज्यादा प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी. खास बात यह है कि राज्य सरकार धान की जगह मक्के की खेती को बढ़ावा दे रही है. इस बार सरकार धान की जगह खरीफ मक्का की खेती करने वाले किसानों प्रोत्साहित करने के लिए 15 करोड़ खर्च करेगी. साथ ही कई अन्य तरह की सब्सिडी भी दी जाएगी.
दरअसल, बीते दिनों बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि 2025-26 में धान से खरीफ मक्का की ओर बदलाव को बढ़ावा देने के लिए छह जिलों पठानकोट, गुरदासपुर, बठिंडा, संगरूर, जलंधर और कपूरथला में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसमें किसानों को प्रति हेक्टेयर 17,500 रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस बजट में इसके लिए 15 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. लेकिन सवाल उठता है कि घोषित प्रोत्साहन दर पर 15 करोड़ रुपये से केवल लगभग 8,572 हेक्टेयर (लगभग 21,172 एकड़) धान से मक्का में परिवर्तन को ही समर्थन दिया जा सकता है. यानी पंजाब में धान के रकबे के सामने यह संख्या बहुत छोटी लगती है. हर साल राज्य में खरीफ मौसम में 32 लाख हेक्टेयर से ज्यादा भूमि पर धान लगाया जाता है, जो उस समय की कुल कृषि योग्य भूमि का लगभग 89 फीसदी है.
14 लाख से अधिक ट्यूबवेल को मिलेगी सब्सिडी पर बिजली
सरल शब्दों में कहें तो मक्का प्रोत्साहन योजना धान के क्षेत्र का 1 फीसदी से भी कम हिस्सा ही छूती है, जिससे सवाल उठता है कि यह नीति वास्तव में विविधीकरण को कितनी दूर तक बढ़ा सकती है. वहीं, 7,715 करोड़ रुपये की मुफ्त और सब्सिडी वाली बिजली, जो 14 लाख से अधिक ट्यूबवेल सिंचाई के लिए दी जा रही है, यह भी दिखाती है कि धान अभी भी खेतों पर हावी है. क्योंकि पंजाब सरकार फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को मुफ्त और सब्सिडी पर बिजली भी देगी. इसके लिए 7,715 करोड़ खर्च किए जाएंगे. यह सब्सिडी मुख्य रूप से 14 लाख से अधिक ट्यूबवेल सिंचाई पर खर्च होगी, जो जून मध्य से अक्टूबर की शुरुआत तक धान की बुवाई और कटाई के दौरान सबसे बड़ा कृषि व्यय है.
DSR तकनीक से खेती करने पर 1,500 रुपये की मदद
वहीं, किसानों को डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) अपनाने पर प्रति एकड़ 1,500 रुपये की मदद दी जा रही है. यह तकनीक पारंपरिक धान रोपाई की तुलना में मजदूरी की जरूरत कम करती है और 15- 19 फीसदी पानी बचाती है. वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार ने इस योजना पर 35 करोड़ रुपये खर्च किए, और FY 2026-27 के लिए 40 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है.
हाइब्रिड बीजों पर 33 फीसदी सब्सिडी दी गई
हालांकि DSR तकनीक को पानी बचाने वाली तकनीक के रूप में बढ़ावा दिया जाता है. लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह अभी भी धान की खेती को ही समर्थन देती है और किसानों को पूरी तरह से धान से दूर जाने के लिए प्रेरित नहीं करती. वहीं, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि FY 2025- 26 में PAU द्वारा सुझाए गए बीटी कपास हाइब्रिड बीजों पर 33 फीसदी सब्सिडी दी गई, जिससे 52,000 से अधिक कपास किसानों को सीधे 11 करोड़ रुपये मिले और इस साल कपास के क्षेत्र में 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. फिर भी, पंजाब में कपास की खेती सालों में काफी घट गई है. वहीं, कृषि अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस तरह की सब्सिडी ने ऐतिहासिक रूप से पानी अधिक खपत करने वाली फसलों जैसे धान को बढ़ावा दिया है.