बारिश से 4500 हेक्टेयर प्याज की फसल चौपट, उत्पानद में 15 फीसदी तक गिरावट की संभावना

महाराष्ट्र के नासिक जिले में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से करीब 4,500 हेक्टेयर में प्याज की फसल बर्बाद हो गई, जिससे उत्पादन में 12-15 फीसदी तक गिरावट की आशंका है. कीमतें लागत से नीचे रहने के कारण किसान परेशान हैं और सरकार से मुआवजा व राहत की मांग कर रहे हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 25 Mar, 2026 | 03:46 PM

Maharashtra Crop Failure: पिछले हफ्ते हुई बेमौसम बारिश के चलते महाराष्ट्र में फसलों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा है. नासिक जिले में आंधी और ओलावृष्टि से प्याज की बर्बादी कुछ ज्यादा ही हुई है. जिले के पांच तालुकों में लगभग 4,500 हेक्टेयर में लगी ग्रीष्मकालीन प्याज की फसल भारी बारिश से चौपट हो गई. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है. ऐसे में प्याज उत्पादन में 12 से 15 फीसदी तक की गिरावट आने की बात कही जा रही है.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों का कहना है कि इस मौसम में प्याज के कुल उत्पादन में 12 से 15 फीसदी तक की गिरावट आने की संभावना है. ऐसे में कहा जा रहा है कि प्याज का कुल उत्पादन पिछले साल के 39 लाख मीट्रिक टन से घटकर इस साल लगभग 34 लाख मीट्रिक टन रह सकता है. राज्य कृषि विभाग के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा नुकसान मालेगांव में हुआ, जहां 1,646 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई. इसके बाद सताना का नंबर है, जहां 1,598 हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई. बाकी 950 हेक्टेयर नुकसान नंदगांव, निफाड़ और सिन्नर तालुकों में दर्ज किया गया. इस साल नासिक में गर्मियों की प्याज  की खेती का क्षेत्र पहले ही घटकर 1.6 लाख हेक्टेयर हो गया था, जो पिछले साल के 1.8 लाख हेक्टेयर से लगभग 10 फीसदी कम है.

7,000 हेक्टेयर में बागवानी को पहुंचा नुकसान

अधिकारियों के मुताबिक, गुरुवार को जिले में हुई बेमौसम बारिश  और ओले के चलते लगभग 7,000 हेक्टेयर में फसल को नुकसान पहुंचा है. इसमें ग्रीष्मकालीन प्याज सबसे ज्यादा प्रभावित हुई. वहीं बारिश से अनार के बागानों को भी भारी क्षति हुई है. कुल 1,377 हेक्टेयर अनार के बागान प्रभावित हुए है, जिसमें अकेले मालेगांव में 1,264 हेक्टेयर शामिल हैं.

मंडियों में कितना है प्याज का ताजा रेट

वहीं, जिले के एपीएमसी मार्केट्स में गर्मियों की प्याज की आवक पिछले 10 दिनों में धीरे-धीरे बढ़ी है. मार्केट में अभी भी लेट खरीफ प्याज सबसे ज्यादा है, जो कुल आवक का लगभग 80 फीसदी हिस्सा है. शुक्रवार को देश के सबसे बड़े थोक प्याज बाजार लासलगांव एपीएमसी में करीब 3,600 क्विंटल गर्मियों की प्याज की नीलामी हुई, जिसमें औसत भाव 1,250 रुपये प्रति क्विंटल रहा. जबकि मिनिमम और मैक्सिमम रेट 555 रुपये से 1,500 रुपये प्रति क्विंटल तक रहे. वहीं, लेट खरीफ प्याज का औसत भाव 890 रुपये प्रति क्विंटल रहा और उसी दिन 10,200 क्विंटल प्याज नीलामी में बिका.

किसानों को मिले सब्सिडी

किसानों का कहना है कि पिछले तीन महीने में थोक प्याज के दामों में तेज गिरावट  ने उन्हें परेशान कर दिया है. प्याज किसानों का कहना है कि उत्पादन की लागत लगभग 1,800 रुपये प्रति क्विंटल है. अगर बिकने का भाव इससे नीचे चला जाता है, तो हमें भारी नुकसान होता है. दाम महीनों से लागत से नीचे बने हुए हैं. ऐसे में हम चाहते हैं कि राज्य सरकार ऐसे किसानों को, जिन्होंने नुकसान पर प्याज बेची है, उन्हें 1,500 रुपये प्रति क्विंटल का अनुदान दे.

कितनी है खरीफ प्याज की शेल्फ लाइफ

बता दें कि खरीफ और लेट खरीफ प्याज की शेल्फ लाइफ 25-30 दिनों की होती है, जबकि गर्मियों की प्याज की शेल्फ लाइफ 6-7 महीने की होती है. इसलिए गर्मियों की प्याज बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है. इसे मार्च-अप्रैल में काटा जाता है और यह मध्य अक्टूबर तक खरीफ फसलों के आने तक सप्लाई बनाए रखती है. अगर इस चक्र में बाधा आती है, तो बाजार में कमी आ जाती है.

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Published: 25 Mar, 2026 | 03:41 PM
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