बारिश से कई राज्यों में रबी फसल चौपट, किसान नेता ने की पुरानी व्यवस्था के तहत मुआवजे की मांग

ओलावृष्टि-बारिश से हरियाणा के करनाल और पंजाब के संगरूर में सबसे अधिक गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है. इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. वहीं, महाराष्ट्र में पिछले चार दिनों में भारी बारिश से 1,439 हेक्टेयर फसलें प्रभावित हुई हैं. असमय बारिश से चना, गेहूं, ज्वार जैसी फसलें और आम, अंगूर, केले  जैसे फल के बागानों को नुकसान पहुंचा है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 20 Mar, 2026 | 05:40 PM

पिछले दो दिनों से रूक-रूक कर हो रही बारिश और ओलावृष्टि से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में रबी फसलों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा है. इसी बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गेहूं, आलू, सरसों और दलहन फसलों की हुई बर्बादी की भरपाई के लिए आकलन करने के निर्देश दिए हैं. केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि हमने तय किया है कि जिन राज्यों में फसलों को नुकसान हुआ है, वहां फसल बीमा योजना के तहत मुआवजा दिया जाए. लेकिन सरकार के इस फैसले से किसान नेता खुश नहीं हैं. एमएसपी कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनिन मान के पूर्व हरियाणा प्रेसिडेंट गुणी प्रकाश ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि फसल बीमा योजना के तहत किसानों को मुआवजा देना सही नहीं है. इस प्रोसेस के तहत किसानों को मुआवजा मिलने में महीनों नहीं, बल्कि वर्ष लग जाते हैं.

उन्होंने कहा कि फसल बीमा योजना की प्रक्रिया काफी जटिल है. इसमें ऑनलाइन प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती हैं. ऐसे में अधिकांश किसान तकनीकी प्रक्रिया के कारण फसल बीमा के तहत मुवआजे के लिए आवेदन भी नहीं कर पाते हैं. साथ ही इस प्रक्रिया में बीमा कंपनियों को ज्यादा मुनाफा होता है. उन्होंने कहा कि हरियाणा के कई जिलों के किसानों को एक साल पूरा हो जाने के बाद भी अभी तक फसल मुआवजा  नहीं मिला है. इसलिए फसल मुआवजा देने की पुरानी व्यवस्था ही सही थी, जिसमें उपायुक्त की सहभागिता होती थी. इस व्यवस्था में सभी किसानों को पूरा मुआवजा मिल जाता था.

गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ओलावृष्टि-बारिश से हरियाणा के करनाल और पंजाब के संगरूर में सबसे अधिक गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है. इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. शुरुआती ठंडा मौसम फसल के लिए लाभदायक था, लेकिन लागातार तेज बारिश और हवा ने फसल को नुकसान पहुंचाया. संगरूर के किसानों का कहना है कि तेज हवा के चलने से गेहूं की फसल जमीन पर गिर गई है. अब इसकी ठीक होने की संभावना नहीं है, क्योंकि फसल पहले ही पक चुकी थी.

रोहतक में 22 मिमी बारिश दर्ज की गई

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शुक्रवार को हरियाणा में भारी बारिश की रिपोर्ट दी थी. रोहतक में 22 मिमी, सोनीपत में 19 मिमी और पानीपत में 13.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई. अत्यधिक तापमान लगभग 6°C गिरने के कारण ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ठंडा मौसम शुरुआती और मध्यवर्ती बुवाई वाली फसलों के लिए लाभदायक हो सकता है, क्योंकि इससे सिंचाई कम करनी पड़ेगी, लेकिन लंबे समय तक पानी जमा रहना जड़ों के लिए खतरा बना हुआ है. संगरूर के मुख्य कृषि अधिकारी धर्मिंदरजीत सिंह ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा कि बारिश तापमान तो कम कर रही है, लेकिन फसलों पर इसका भौतिक असर पैदावार के लिए चिंता का विषय है.

महाराष्ट्र में 1,014 हेक्टेयर खेत बारिश से प्रभावित

वहीं, महाराष्ट्र में भी बेमौसम बारिश से फसलों का नुकसान पहुंचा है. राज्य कृषि विभाग के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार दिनों में भारी बारिश से 1,439 हेक्टेयर फसलें प्रभावित हुई हैं. असमय बारिश से चना, गेहूं, ज्वार जैसी फसलें और आम, अंगूर, केले  जैसे फल के बागानों को नुकसान पहुंचा है. शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार धाराशिव जिले में सबसे ज्यादा असर हुआ है, जहां 1,014 हेक्टेयर खेत प्रभावित हुए. अन्य प्रभावित जिलों में सोलापुर, नांदेड़, यवतमाल, लातूर, नागपुर, चंद्रपुर और कोल्हापुर शामिल हैं. जबकि, उत्तर प्रदेश के मेरठ क्षेत्र में भी तेज हवा चलने से गेहूं और सरसों की फसलें जमीन पर गिर गई हैं, जिससे आर्थिक नुकसान का अनुमान है. किसानों के अनुसार, गेहूं की बालियां निकल चुकी हैं लेकिन दाना पूरी तरह तैयार नहीं हुआ था, इसलिए जमीन पर गिरने से पैदावार कम हो सकती है.

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Published: 20 Mar, 2026 | 05:35 PM
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