बारिश में भीग गया गेहूं? छोटी सी गलती से खराब हो सकता है पूरा अनाज, ऐसे रखें सुरक्षित
बारिश में भीगने के बाद गेहूं को सही तरीके से सुखाना और स्टोर करना बेहद जरूरी होता है. थोड़ी सी लापरवाही से अनाज खराब हो सकता है और बाजार में कम दाम मिल सकते हैं. कृषि विशेषज्ञ किसानों को समय रहते नमी कम करने, सही जगह पर सुखाने और सुरक्षित स्टोरेज अपनाने की सलाह दे रहे हैं, ताकि नुकसान से बचा जा सके.
Wheat Storage: मौसम बदलते ही किसानों की सबसे बड़ी चिंता शुरू हो जाती है, खासकर तब जब कटाई के बाद रखा गेहूं बारिश में भीग जाए. थोड़ी सी लापरवाही से महीनों की मेहनत खराब हो सकती है. भीगे हुए गेहूं में नमी बढ़ने पर फंगस लगने, दाने काले पड़ने और बाजार में कम दाम मिलने का खतरा रहता है. लेकिन अगर सही समय पर कुछ जरूरी उपाय कर लिए जाएं, तो गेहूं की चमक, गुणवत्ता और बाजार कीमत को आसानी से बचाया जा सकता है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सही तरीके से सुखाने और स्टोर करने से नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है.
भीगे गेहूं को तुरंत अलग करना क्यों है जरूरी?
बारिश के बाद सबसे पहले गेहूं की सही जांच करना बेहद जरूरी होता है. कई बार केवल ऊपर की परत भीगती है, लेकिन किसान पूरे स्टॉक को एक साथ छोड़ देते हैं. इससे नमी धीरे-धीरे पूरे गेहूं में फैलने लगती है और बड़ा नुकसान हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार भीगे हुए गेहूं को तुरंत सूखे अनाज से अलग कर देना चाहिए. अगर गीला गेहूं सूखे गेहूं में मिल गया, तो पूरा स्टॉक खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. सबसे ज्यादा गीले हिस्से को पहले सुखाना जरूरी होता है ताकि फंगस और बदबू बनने से बचाव हो सके. किसानों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि गेहूं को कभी सीधे जमीन पर न फैलाएं. जमीन की सीलन दानों में फिर से नमी बढ़ा सकती है और अनाज काला पड़ सकता है.
सही तरीके से सुखाने पर बनी रहती है गेहूं की चमक
भीगे हुए गेहूं को सुखाने का तरीका बहुत मायने रखता है. अगर गेहूं को बहुत तेज धूप में लंबे समय तक छोड़ दिया जाए, तो दाने कमजोर होकर टूटने लगते हैं. इससे उसकी गुणवत्ता और बाजार कीमत दोनों पर असर पड़ता है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गेहूं को पक्के फर्श या तिरपाल पर पतली परत में फैलाना चाहिए. परत ज्यादा मोटी नहीं होनी चाहिए ताकि हवा और धूप हर दाने तक पहुंच सके. हर दो-तीन घंटे में गेहूं को पलटना भी जरूरी होता है. जब नमी कम होने लगे, तो गेहूं को हवादार लेकिन हल्की छाया वाली जगह पर रखना बेहतर माना जाता है. इससे दानों की प्राकृतिक चमक बनी रहती है और बाजार में अच्छे दाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
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तिरपाल और हवा का सही इस्तेमाल बचा सकता है बड़ा नुकसान
अनाज सुखाते समय तिरपाल या प्लास्टिक शीट का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद माना जाता है. इससे जमीन की नमी गेहूं तक नहीं पहुंचती और अचानक बारिश होने पर अनाज को तुरंत ढंका भी जा सकता है. अगर मौसम लगातार खराब हो और धूप न निकल रही हो, तो किसानों को हवा का सही इंतजाम करना चाहिए. बड़े पंखे या ब्लोअर की मदद से हवा चलाने पर नमी जल्दी खत्म होती है और फंगस लगने का खतरा कम हो जाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक ज्यादा देर तक गीला रहने पर गेहूं में बदबू आने लगती है और दाने काले पड़ सकते हैं. ऐसे अनाज की बाजार में कीमत काफी कम हो जाती है.
स्टोर करने से पहले करें ये जरूरी जांच
भीगे हुए गेहूं को जल्दबाजी में बोरियों में भरना सबसे बड़ी गलती मानी जाती है. अगर अनाज पूरी तरह सूखा नहीं होगा, तो स्टोर करने के बाद अंदर ही अंदर गर्मी पैदा होगी और गेहूं सड़ सकता है. कृषि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गेहूं को स्टोर करने से पहले उसकी नमी जरूर जांच लें. दाने को दांत से दबाने पर अगर कट जैसी आवाज आए, तो समझा जाता है कि नमी काफी हद तक निकल चुकी है. सुखाने के बाद गेहूं की छंटाई भी जरूरी होती है. काले, टूटे या सिकुड़े हुए दानों को अलग कर देना चाहिए. साफ और चमकदार गेहूं की बाजार में ज्यादा मांग रहती है और व्यापारी भी बेहतर कीमत देते हैं. अगर गेहूं ज्यादा खराब हो गया हो, तो उसे खाने के बजाय पशु आहार के रूप में इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर सही कदम उठाकर किसान अपनी मेहनत और कमाई दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं.