Mushroom Farming Scheme Bihar: खेती में कम लागत और ज्यादा कमाई का रास्ता तलाश रहे किसानों के लिए मशरूम उत्पादन एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रहा है. खासकर बटन मशरूम की बढ़ती मांग ने इसे एक लाभदायक व्यवसाय बना दिया है. बिहार के जहानाबाद में बागवानी विभाग की पहल से मशरूम उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है. सरकार किसानों को इस काम के लिए लाखों रुपये की सब्सिडी भी दे रही है, जिससे किसान आधुनिक तरीके से खेती शुरू कर सकें. ऐसे सही योजना और तकनीक के साथ मशरूम उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. यही वजह है कि अब कई किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ मशरूम उत्पादन भी शुरू कर रहे हैं.
मशरूम उत्पादन को मिल रहा बढ़ावा
बिहार के जहानाबाद में बागवानी विभाग मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रहा है. विभाग किसानों को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी भी उपलब्ध करा रहा है. बताया जा रहा है कि जिले में अब मशरूम उत्पादन बड़े स्तर पर होने लगा है. यहां मशरूम से जुड़े बड़े प्लांट भी लगाए जा रहे हैं, जहां स्पॉन तैयार करने से लेकर मशरूम उत्पादन तक का काम किया जा रहा है. इससे कई किसानों को अच्छी कमाई होने लगी है. बटन मशरूम की बाजार में ज्यादा मांग होने के कारण किसान इस खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं.

मशरूम उत्पादन
मशरूम उत्पादन के लिए जरूरी स्ट्रक्चर
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बटन मशरूम उत्पादन के लिए खास तरह के ढांचे की जरूरत होती है. इसमें मुख्य रूप से तीन तरह के स्ट्रक्चर शामिल होते हैं-
- मशरूम स्पॉन लैब
- कंपोस्ट यूनिट
- वातानुकूलित मशरूम उत्पादन इकाई
बटन मशरूम उगाने के लिए तापमान नियंत्रित वातावरण जरूरी होता है, इसलिए वातानुकूलित यूनिट का उपयोग किया जाता है. इन तीनों स्ट्रक्चर को अलग-अलग या एक साथ भी लगाया जा सकता है.
लागत और सब्सिडी का पूरा हिसाब
- योजना के तहत किसानों को अलग-अलग इकाइयों पर सब्सिडी दी जा रही है.
- स्पॉन लैब की लागत लगभग 20 लाख रुपये है, जिस पर 40 प्रतिशत यानी 8 लाख रुपये का अनुदान मिलता है.
- कंपोस्ट यूनिट की लागत करीब 30 लाख रुपये है, जिस पर 12 लाख रुपये की सब्सिडी मिलती है.
- मशरूम उत्पादन इकाई की लागत भी लगभग 30 लाख रुपये है, जिस पर 12 लाख रुपये का अनुदान दिया जाता है.
- इस तरह तीनों यूनिट मिलाकर कुल लागत लगभग 80 लाख रुपये आती है और कुल 32 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है.

सरकारी सब्सिडी से मशरूम खेती बन रही किसानों का सहारा.
कौन ले सकता है योजना का लाभ
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस योजना में बैंक एंडेड सब्सिडी दी जाती है. यानी किसानों को पहले बैंक से लोन स्वीकृत कराना होगा, उसके बाद अनुदान मिलेगा. योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करनी होगी. इसके अलावा इस योजना का लाभ केवल वही किसान उठा सकते हैं जिनके पास अपनी जमीन है. भूमिहीन किसान इस योजना के पात्र नहीं हैं. इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान https://horticulture.bihar.gov.in/ पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि मशरूम उत्पादन कम जगह में ज्यादा कमाई देने वाला व्यवसाय है. सही प्रशिक्षण और सरकारी सहायता के साथ यह खेती किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बन सकती है. कुल मिलाकर, जहानाबाद में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने की यह पहल किसानों के लिए एक नया अवसर बन रही है. सब्सिडी और तकनीकी सहयोग के साथ अब किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ मशरूम उत्पादन से भी अच्छी कमाई कर सकते हैं.