बरसात में करें इस खास टमाटर की खेती, 45 दिनों में शुरू होगा फलन.. होगी तगड़ी कमाई
बरसात के मौसम में खाली खेतों का सही उपयोग कर किसान टमाटर की नई किस्मों से अच्छी कमाई कर सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ वैरायटी जल्दी तैयार होकर 45 दिनों में फल देने लगती हैं. सही तकनीक और देखभाल से फसल खराब नहीं होती और बाजार में अच्छा दाम मिल सकता है.
Tomato Farming: कई किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर ऐसी फसलों की तरफ बढ़ रहे हैं, जिनसे कम समय में ज्यादा मुनाफा मिल सके. खासकर बरसात के मौसम में खेत खाली रहने के कारण किसानों को नुकसान होता है. ऐसे में टमाटर की कुछ नई किस्में किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बन सकती हैं. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात में भी कुछ खास टमाटर की वैरायटी अच्छी पैदावार देती हैं और बाजार में इनके अच्छे दाम मिलते हैं.
बरसात में भी नहीं खराब होती फसल
आमतौर पर लोग मानते हैं कि बरसात के मौसम में टमाटर की खेती करना नुकसान का सौदा है क्योंकि ज्यादा पानी और नमी के कारण फसल खराब हो सकती है. लेकिन अब ऐसी कई नई किस्में सेमीनीस अभिलाष, सिजेंटा साहू, अर्का रक्षक एवं बीएयू द्वारा नई किस्म की विकसित की गई टमाटर आ चुकी हैं जो बारिश के मौसम में भी अच्छी पैदावार देती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार ये टमाटर बारिश में जल्दी गलते नहीं हैं और सही देखभाल करने पर अच्छा फलन देते हैं. यही वजह है कि अब कई किसान खाली पड़े खेतों में बरसाती टमाटर की खेती कर रहे हैं. बरसात में सब्जियों की सप्लाई कम हो जाती है, इसलिए बाजार में टमाटर के दाम भी काफी बढ़ जाते हैं. कई जगहों पर इसका भाव 70 से 80 रुपये किलो तक पहुंच जाता है. ऐसे में किसान इस खेती से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
45 दिनों में शुरू हो जाता है फलन
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि टमाटर की कुछ नई किस्में बहुत जल्दी तैयार हो जाती हैं. किसान पौधे लगाने के करीब 40 से 45 दिनों के भीतर फल तोड़ना शुरू कर सकते हैं. कम समय में तैयार होने वाली यह खेती किसानों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है. इससे खेत लंबे समय तक खाली नहीं रहते और किसान एक के बाद दूसरी फसल आसानी से ले सकते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक किसान ऐसी किस्मों का चुनाव करें जो बरसात में रोगों का सामना कर सकें. अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का इस्तेमाल करने से पैदावार और फल की गुणवत्ता दोनों बेहतर रहती हैं.
जहां जलभराव हो, वहां न करें खेती
बरसात के मौसम में टमाटर की खेती करते समय खेत का चुनाव बहुत जरूरी होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस खेती को ऐसे इलाके में करना चाहिए जहां बाढ़ या ज्यादा जलभराव की समस्या न हो. अगर खेत में लंबे समय तक पानी भरा रहता है तो पौधों की जड़ें खराब हो सकती हैं और पूरी फसल को नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए खेत से पानी निकालने की सही व्यवस्था होना जरूरी है. किसानों को समय-समय पर खेत की निगरानी भी करनी चाहिए ताकि किसी बीमारी या कीट का हमला होने पर तुरंत इलाज किया जा सके.
अलान विधि से करें खेती
विशेषज्ञों ने बरसात में टमाटर की खेती के लिए अलान विधि अपनाने की सलाह दी है. इस विधि में मिट्टी को ऊंचा करके पौधे लगाए जाते हैं, जिससे पानी सीधे पौधों की जड़ों में जमा नहीं होता. अगर किसान बिना अलान विधि के खेती करते हैं तो पौधों के गलने का खतरा बढ़ जाता है. वहीं ऊंची क्यारी पर लगाए गए पौधे ज्यादा सुरक्षित रहते हैं और बेहतर फलन देते हैं. कृषि जानकारों का कहना है कि सही तकनीक, अच्छी किस्म और समय पर देखभाल से किसान बरसात में भी टमाटर की खेती से शानदार कमाई कर सकते हैं. कम समय में तैयार होने वाली यह फसल किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है.