कीटनाशकों के संपर्क में आने से 535 किसानों की मौत, टेंशन में सरकार.. मुआवजे पर खर्च हुए 5 करोड़

राजस्थान में जनवरी 2024 से जनवरी 2026 के बीच कीटनाशकों के संपर्क में आने से 535 किसानों की मौत हुई. विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार प्रभावित परिवारों को 5.1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया. जांच में 189 कीटनाशक नमूने घटिया पाए गए, जिससे किसानों की सुरक्षा, रसायनों की गुणवत्ता और नियामकीय निगरानी पर सवाल उठे हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 8 Jun, 2026 | 08:08 AM

Rajasthan News: राजस्थान में खेती के दौरान कीटनाशकों के संपर्क में आने से किसानों की मौत का गंभीर मामला सामने आया है. विधानसभा में पेश कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2024 से जनवरी 2026 के बीच कीटनाशकों के प्रभाव से 535 किसानों की जान गई है. यह आंकड़ा खेती में रसायनों के सुरक्षित उपयोग और किसानों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है. जिलावार आंकड़ों में बीकानेर में सबसे अधिक 57 किसानों की मौत हुई. इसके बाद चूरू में 56, हनुमानगढ़ और झालावाड़ में 42-42 किसानों की जान गई. जोधपुर में 38, जबकि श्रीगंगानगर और ब्यावर में 31-31 किसानों की मौत दर्ज की गई.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार ने इस अवधि में प्रभावित परिवारों को कुल 5.1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया. हालांकि अलग-अलग जिलों में मुआवजे की राशि  में काफी अंतर देखने को मिला. कई जगह मौतों की संख्या और स्वीकृत मुआवजा दावों के बीच भी बड़ा अंतर सामने आया है. विधानसभा में रखे गए रिकॉर्ड में 189 कीटनाशक नमूने भी मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए. इससे खेती में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की गुणवत्ता और किसानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं.

बीकानेर में सबसे अधिक मिला मुआवजा

ये आंकड़े रासायनिक खेती के जोखिम, कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग की कमी और नियमों के कमजोर पालन की ओर इशारा करते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने और कीटनाशकों की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी की जरूरत है. बीकानेर में प्रभावित परिवारों को सबसे अधिक 92 लाख रुपये का मुआवजा मिला, जबकि चूरू को 72 लाख रुपये, जोधपुर को 58 लाख रुपये और हनुमानगढ़ को 48 लाख रुपये दिए गए. दूसरी ओर, श्रीगंगानगर और झालावाड़ को केवल 18-18 लाख रुपये का मुआवजा मिला, जबकि झालावाड़ में 42 किसानों की मौत दर्ज की गई थी.

किसानों को कितना मिला मुआवजा

वहीं, डीग में आठ किसानों की मौत के बावजूद कोई मुआवजा नहीं दिया गया. कोटा में 11 मौतों के मुकाबले केवल 2 लाख रुपये की सहायता राशि  स्वीकृत हुई. अधिकारियों का कहना है कि मुआवजे में यह अंतर दावों के सत्यापन और मंजूरी की प्रक्रिया के कारण है. कृषि विभाग के रिकॉर्ड में यह नहीं बताया गया है कि प्रत्येक किसान की मौत कीटनाशक के संपर्क में आने के किस विशेष कारण से हुई.

कृषि विभाग के आंकड़ों में केवल उन्हीं मामलों को शामिल किया गया है, जिनमें कीटनाशकों के इस्तेमाल के दौरान कृषि कार्य करते हुए किसानों की मौत हुई और जिन्हें प्रशासन ने सत्यापित किया. इस मुद्दे पर किशनपोल विधायक अमीन कागजी ने ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ से कहा कि यदि सामान्य खेती-किसानी के काम के दौरान सैकड़ों किसानों की जान जा रही है, तो सरकार केवल मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती. उन्होंने किसानों की सुरक्षा के लिए जवाबदेही तय करने, कीटनाशकों पर सख्त नियंत्रण और पूरे राजस्थान में व्यापक सुरक्षा कार्यक्रम लागू करने की मांग की.

5,570 कीटनाशक नमूने की जांच की गई

विधानसभा में पेश आंकड़ों से कीटनाशकों की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर स्थिति सामने आई है. पिछले दो वर्षों में राजस्थान के विभिन्न जिलों से 5,570 कीटनाशक नमूने लिए गए, जिनमें से 5,521 की जांच की गई. जांच में 5,332 नमूने तय मानकों पर खरे उतरे, जबकि 189 नमूने घटिया या मानक से कम गुणवत्ता वाले पाए गए. गुणवत्ता जांच में अनियमितताएं मिलने के बाद अधिकारियों ने 282 नोटिस जारी किए. इसके अलावा 14 मामलों में अदालत का रुख किया गया, 14 लाइसेंस निलंबित किए गए और 22 लाइसेंस रद्द कर दिए गए. ये आंकड़े किसानों की सुरक्षा और बाजार में बिक रहे कीटनाशकों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.

17 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे

कीटनाशकों की गुणवत्ता जांच में सबसे ज्यादा खराब नमूने श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ से मिले, जहां 17-17 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे. इसके बाद बीकानेर में 13, कोटा में 10 और भीलवाड़ा में 9 नमूने घटिया पाए गए. कार्रवाई के मामले में भी श्रीगंगानगर सबसे आगे रहा, जहां 34 नोटिस जारी किए गए. बीकानेर में 20, हनुमानगढ़ में 19 और चूरू में 17 नोटिस दिए गए. वहीं, कुल 14 मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई, जिनमें बीकानेर के पांच और श्रीगंगानगर के तीन मामले शामिल हैं.

क्या बोले कृषि मंत्री

राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा  ने इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गृह विभाग द्वारा पुलिस थानों से जुटाए गए आंकड़ों की दोबारा समीक्षा कराई जाएगी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जैविक खेती और कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा दे रही है तथा ऐसी मौतों को रोकने के लिए और सख्त कदम उठाए जाएंगे. मंत्री ने कहा कि किसानों को रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने के लिए अपनी कुल कृषि भूमि का 25 प्रतिशत हिस्सा जैविक खेती के लिए आरक्षित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. सरकार का मानना है कि जैविक खेती को बढ़ावा देने से किसानों की सुरक्षा बढ़ेगी और खेती में रसायनों के इस्तेमाल से होने वाले जोखिम कम होंगे.

 

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 8 Jun, 2026 | 07:49 AM

लेटेस्ट न्यूज़