टिकाऊ और लाभकारी खेती के लिए मध्य प्रदेश के 4 जिलों का रोडमैप जारी कर दिया गया है. केंद्रीय कृषि मंत्री ने रायसेन में चल रहे राष्ट्रीय कृषि मेले के दूसरे दिन मध्य प्रदेश के सीहोर, देवास, विदिशा और रायसेन का कृषि रोडमैप जारी किया. उन्होंने कहा कि कृषि को लाभकारी बनाने के लिए नई तकनीकों, विविध फसलों और एकीकृत खेती को अपनाना जरूरी है. कृषि मंत्री ने किसानों से संवाद किया और उन्हें आधुनिक तकनीक से खेती करने की सलाह दी.
पारंपरिक खेती के साथ जैविक खेती करें किसान
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रायसेन में उन्नत कृषि महोत्सव के दूसरे दिन किसानों को एक बड़ी सौगात देते हुए सीहोर, रायसेन, विदिशा और देवास, इन चार जिलों का समग्र कृषि रोडमैप जारी किया. केन्द्रीय मंत्री ने महोत्सव में फसल बीमा योजना पर किसानों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों के साथ उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि किसान पारंपरिक खेती के साथ पशुपालन, बागवानी, मधुमक्खी पालन और जैविक खेती को अपनाएं, ताकि कम लागत में अधिक लाभ मिल सके. सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे किसान तक पहुंचे, इसके लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं.
विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास का कृषि रोडमैप जारी
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उन्नत कृषि महोत्सव का यह आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश की कृषि व्यवस्था में सुधार लाने का एक गंभीर प्रयास है. उन्होंने कहा कि आज विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास जिलों के लिए कृषि विकास का रोडमैप तैयार किया गया है. आगे मध्यप्रदेश के सभी जिलों के लिए इसी प्रकार की योजना बनाई जाएगी. इन योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के समन्वय से किसानों को इसका लाभ पहुंचाया जाएगा, ताकि खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सके. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब जरूरत इस बात की है कि किसान अपनी मिट्टी, जलवायु, पानी की उपलब्धता और संसाधनों के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से खेती करें. केवल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि सही फसल और टिकाऊ खेती पर ध्यान देना जरूरी है.
कृषि रोडमैप के तीन मुख्य उद्देश्य हैं
- पहला- कृषि को अधिक लाभकारी बनाते हुए उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाना.
- दूसरा- पानी का संरक्षण कर जल-कुशल और जलवायु सहिष्णु खेती विकसित करना.
- तीसरा- फसल विविधीकरण, प्रोसेसिंग और बेहतर बाजार जुड़ाव के जरिए खेती को आधुनिक बनाना.
कृषि रोडमैप में वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ने पर जोर
उन्होंने कहा कि इन चार जिलों की जलवायु, मिट्टी और तापमान को ध्यान में रखते हुए एक समग्र कृषि रोडमैप तैयार किया गया है. इसका उद्देश्य ब्लॉक स्तर पर स्थान-विशिष्ट कार्ययोजनाएं तैयार करने का है, ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुसार कृषि को विकसित किया जा सके. उन्होंने कहा कि पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं, धान और सोयाबीन पर निर्भरता कम कर वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने की जरूरत है. कि रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास जिलों में सिंचाई का बड़ा हिस्सा भूजल पर निर्भर है, जबकि कई क्षेत्रों में भूजल स्तर गंभीर स्थिति में पहुंच चुका है. इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए गेहूं के अलावा अन्य फसलों की संभावनाओं पर भी विचार किया गया है.
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि टमाटर, प्याज, लहसुन, भिंडी, शिमला मिर्च जैसी सब्जियों के साथ ही यहां अनार जैसे फलों की अच्छी संभावनाएं हैं. इसके अलावा ड्रैगन फ्रूट और एवोकाडो जैसी अधिक लाभ देने वाली फसलों को भी अपनाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि यदि वैज्ञानिक तरीके से योजना बनाकर फसल विविधीकरण और संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाए, तो क्षेत्र के किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़त की जा सकती है.