चार लाख डेयरी किसानों को कई महीनों से नहीं हुआ भुगतान, 200 करोड़ रुपये का है बकाया

तमिलनाडु में आविन को दूध सप्लाई करने वाले चार लाख डेयरी किसानों को चार महीने से प्रोत्साहन राशि नहीं मिली. किसानों ने राज्य सरकार से लंबित 200 करोड़ रुपये जल्द जारी करने और आविन के 550 करोड़ रुपये सालाना नुकसान की भरपाई की मांग की. कई सहकारी समितियां घाटे में चल रही हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 5 Jan, 2026 | 05:43 PM

Tamil Nadu News: तमिलनाडु में आविन (Aavin) को दूध सप्लाई करने वाले करीब चार लाख डेयरी किसानों को पिछले चार महीनों से प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है. इसका कारण सरकार की ओर से फंड जारी होने में देरी बताया जा रहा है. किसानों ने राज्य सरकार से 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की लंबित राशि जल्द जारी करने की मांग की है. किसानों का कहना है कि ज्यादातर गांव स्तर की दुग्ध सहकारी समितियां घाटे में चल रही हैं. उन्होंने मांग की कि सरकार आविन को हर साल होने वाले करीब 550 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई करे, जो मई 2021 से दूध की कीमत 3 रुपये प्रति लीटर घटाने के बाद से हो रहा है. किसानों ने कहा कि जैसे बस सेवाएं चलाने के लिए परिवहन निगमों को सरकार मुआवजा देती है, वैसे ही आविन को भी नुकसान की भरपाई मिलनी चाहिए.

कुछ महीने पहले प्रोत्साहन राशि में देरी के चलते सरकार ने आविन को अपने आंतरिक फंड और मुनाफे में चल रही जिला सहकारी यूनियनों के पैसे से भुगतान करने की अनुमति दी थी, यह भरोसा देते हुए कि बाद में राशि लौटा दी जाएगी. इसी के तहत जून से अगस्त की प्रोत्साहन राशि आंतरिक फंड से दी गई थी. आविन (Aavin) ने कहा है कि प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियों  का बकाया भुगतान जल्द कर दिया जाएगा, हालांकि बाद के महीनों का भुगतान अभी भी लंबित है. आविन के प्रबंध निदेशक जॉन लुइस ने बताया कि संस्था को दूध उत्पादक किसानों और खासकर चेन्नई जैसे शहरों के मध्यम वर्गीय उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाना होता है.

दूध की कीमत घटाने का फैसला करती है

उन्होंने कहा कि जब सरकार दूध की कीमत घटाने का फैसला करती है, तो उसे लागू करना फेडरेशन और जिला यूनियनों समेत सभी की जिम्मेदारी होती है. उन्होंने दावा किया कि 90 फीसदी से ज्यादा प्राथमिक सहकारी समितियां  मुनाफे में चल रही हैं और बकाया राशि जल्द चुकाई जाएगी. वहीं, किसानों का आरोप है कि मुनाफे में चल रही जिला यूनियनों के फंड से प्रोत्साहन राशि देने से प्राथमिक समितियों को मिलने वाला सालाना लाभांश घट गया है, जिससे कई समितियां घाटे में चली गई हैं. तमिलनाडु मिल्क प्रोड्यूसर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव एम. जी. राजेंद्रन ने कहा कि कम खरीद मूल्य के कारण कई यूनियन और गांव स्तर की सहकारी समितियां नुकसान में हैं.

भैंस के दूध का रेट 47 रुपये प्रति लीटर तय किया गया

किसानों की मांग पर सरकार ने 18 दिसंबर 2023 से 3 रुपये प्रति लीटर का प्रोत्साहन  शुरू किया था. इसके बाद गाय के दूध का खरीद मूल्य 38 रुपये और भैंस के दूध का 47 रुपये प्रति लीटर तय किया गया. वेल्लोर के डेयरी किसान एस. कृष्णा कुमार ने कहा कि मई 2021 में दूध के बिक्री मूल्य में कटौती के बाद आविन को हर साल 550 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, लेकिन परिवहन निगमों की तरह आविन को सरकार से कोई मुआवजा नहीं मिल रहा है.

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Published: 5 Jan, 2026 | 05:37 PM

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