सिरसा के किन्नू को मिला GI टैग, अब किसानों की बढ़ेगी इनकम.. 13106 हेक्टेयर में होती है खेती

हरियाणा के सिरसा जिले में उगाए जाने वाले किन्नू को GI टैग मिल गया है, जिससे यह राज्य का पहला GI मान्यता प्राप्त फल बन गया है. इसकी मिठास, रसदार गुणवत्ता और बड़े आकार ने इसे खास पहचान दिलाई है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों को बेहतर कीमत, नए बाजार और निर्यात के अवसर मिलेंगे.

नोएडा | Updated On: 3 Jul, 2026 | 07:49 AM

Haryana News: हरियाणा के सिरसा जिले में उगाए जाने वाले किन्नू को अब नई पहचान मिल गई है. इसे भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिला है. इस सम्मान के साथ ‘सिरसा किन्नू’ हरियाणा का पहला ऐसा फल बन गया है, जिसे GI टैग प्राप्त हुआ है. इस उपलब्धि से हरियाणा की बागवानी और खट्टे फलों के उत्पादन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है. साथ ही, मंगियाना गांव स्थित भारत-इजरायल उत्कृष्टता केंद्र (Indo-Israel Centre of Excellence) द्वारा किसानों को सिखाई गई आधुनिक और वैज्ञानिक खेती तकनीकों की भूमिका भी सामने आई है.

GI टैग मिलने से सिरसा किन्नू को एक अलग पहचान मिलेगी और इसकी नकली बिक्री पर रोक लगाने में मदद होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किन्नू की बाजार में मांग बढ़ेगी, किसानों को बेहतर कीमत मिल सकेगी और निर्यात के नए अवसर भी खुलेंगे. सिरसा किन्नू को GI टैग दिलाने की पहल बागवानी विभाग ने खारी सुरेरां गांव के किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से की थी. जिला बागवानी अधिकारी दीन मोहम्मद ने द ट्रिब्यून से कहा कि सिरसा का किन्नू  दूसरे क्षेत्रों में उगाए जाने वाले किन्नू की तुलना में अधिक मीठा, रसदार और आकार में बड़ा होता है. यही इसकी खासियत है, जिसके कारण इसे GI टैग मिला.

2013 से किसान आधुनिक तरीके से कर रहे खेती

अधिकारियों के अनुसार, इस उपलब्धि में मंगियाना स्थित भारत-इजरायल  उत्कृष्टता केंद्र की भी बड़ी भूमिका रही है. वर्ष 2013 से यहां किसानों को आधुनिक तरीके से खट्टे फलों की खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. केंद्र के प्रभारी एवं उपनिदेशक (बागवानी) डॉ. रमेश कुमार ने कहा  कि इजरायली विशेषज्ञों ने किसानों को ड्रिप सिंचाई, फर्टिगेशन, सघन बागवानी (हाई-डेंसिटी प्लांटेशन) और वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी. इसके अलावा किसानों को पौधरोपण, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन, छंटाई और बाग की देखभाल से जुड़ा नियमित प्रशिक्षण भी दिया जाता है. इससे किन्नू की गुणवत्ता और उत्पादन में लगातार सुधार हुआ है.

हर साल लगभग 1.82 लाख मीट्रिक टन किन्नू का उत्पादन

विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने से सिरसा में किन्नू की उत्पादकता  में काफी बढ़ोतरी हुई है. यही वजह है कि आज सिरसा हरियाणा का सबसे बड़ा किन्नू उत्पादक जिला बन चुका है. जिले में करीब 13,106 हेक्टेयर क्षेत्र में किन्नू के बाग हैं और यहां हर साल लगभग 1.82 लाख मीट्रिक टन किन्नू का उत्पादन होता है. बागवानी और कृषि विशेषज्ञ गुरजीत सिंह मान ने कहा कि GI टैग मिलने से ‘सिरसा किन्नू’ की पहचान देश और विदेश के बाजारों में और मजबूत होगी. इससे किन्नू की मांग बढ़ने की उम्मीद है और किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिल सकेगा.

Published: 3 Jul, 2026 | 07:44 AM

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